भारतीय लोकतंत्र में आवाजों और भावनाओं को समाहित करने की क्षमता

कॉकरोच जनता पार्टी’ पर आरएसएस की पहली प्रतिक्रिया

नागपुर/दि.30 – सोशल मीडिया पर इन दिनों चर्चा में रहने वाली ’कॉकरोच जनता पार्टी’ को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है. भारतीय लोकतंत्र में हर प्रकार की आवाज़ों और भावनाओं को समाहित करने की अपार क्षमता है, ऐसा आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा है. नागपुर में आयोजित एक पत्रकार परिषद में वे बोल रहे थे. इस दौरान उन्होंने देश की युवा पीढ़ी यानी ’जेन-ज़ी’, भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था और पाकिस्तान के साथ संबंधों पर संघ की भूमिका स्पष्ट की.
’कॉकरोच जनता पार्टी’ के बारे में पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए सुनील आंबेकर ने कहा, भारत लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पूरी तरह पालन करता है. देश में पारदर्शी चुनाव होते हैं और सोशल मीडिया सहित यहां के मीडिया पूरी तरह स्वतंत्र हैं. इसलिए लोकतंत्र में होने वाली किसी भी चर्चा या लोगों द्वारा व्यक्त किए जाने वाले विभिन्न विचारों को आश्चर्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. इसे एक सामान्य प्रक्रिया माना जाना चाहिए.
उन्होंने आगे कहा, हमारी जनता और लोकतांत्रिक व्यवस्था बेहद मजबूत है. देश की युवा पीढ़ी यानी ’जेन-ज़ी’ बेहद आशावादी है. इन युवाओं का देश और संवैधानिक ढांचे पर अटूट विश्वास है. लोकतंत्र में मुद्दे उठते रहते हैं और उन्हें सुलझाने के रास्ते भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया से ही निकलते हैं. उन्होंने यह विश्वास भी व्यक्त किया कि हमारी कोई भी संस्था कमजोर नहीं है.
संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले द्वारा हाल ही में पाकिस्तान के संदर्भ में दिए गए बयान का उल्लेख करते हुए आंबेकर ने संघ की भूमिका और स्पष्ट की. उन्होंने कहा, संवाद के माध्यम से ही समस्याओं का समाधान हो सकता है, इस पर संघ का हमेशा विश्वास रहा है. सरकारी स्तर पर बातचीत करना एक राजनीतिक निर्णय होता है. लेकिन जब आधिकारिक रास्ते बंद होते हैं, तब दोनों देशों के नागरिकों के बीच संवाद और व्यापार जारी रहना चाहिए, ताकि संबंध मजबूत बने रहें और धीरे-धीरे समस्याओं के समाधान में मदद मिल सके.
* भारत के विभाजन पर टिप्पणी
पत्रकार परिषद के अंत में बोलते हुए सुनील आंबेकर ने भारत के ऐतिहासिक विभाजन का उल्लेख किया. उन्होंने कहा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हमेशा भारत के विभाजन के विरोध में रहा है. यदि उस ऐतिहासिक काल में हमारा संगठन आज जितना मजबूत होता, तो भारत का विभाजन कभी नहीं हुआ होता. यह स्पष्ट टिप्पणी उन्होंने इस अवसर पर की.

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