एमपीएससी पेपर लीक मामले में 50 लाख की डील का दावा
ऋतुजा पाटील के कथित वॉट्सएप चैट से बढ़ी जांच की दिशा

* पुलिस खंगाल रही आर्थिक लेन-देन का पूरा नेटवर्क
मुंबई/पुणे /दि.28- महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (एमपीएससी) की अन्न एवं औषध प्रशासन विभाग की औषध निरीक्षक (ग्रुप-बी) भर्ती परीक्षा के कथित पेपर लीक मामले में जांच के दौरान एक नया और चौंकाने वाला दावा सामने आया है. मामले की आरोपी ऋतुजा पाटील के कथित व्हॉट्सऐप चैट से संकेत मिले हैं कि परीक्षा का प्रश्नपत्र हासिल करने के लिए 50 लाख रुपये की डील हुई थी. इस खुलासे के बाद जांच एजेंसियों ने आर्थिक लेन-देन की जांच और तेज कर दी है.
* पहले 5 लाख की चर्चा, अब 50 लाख का दावा
अब तक जांच में यह चर्चा थी कि प्रश्नपत्र लीक करने के लिए लगभग 5 लाख रुपये का लेन-देन हुआ था. हालांकि, जांच के दौरान सामने आए कथित व्हॉट्सऐप संदेशों में ऋतुजा पाटील अपनी एक सहेली से बातचीत करते हुए यह दावा करती दिखाई दे रही है कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र प्राप्त करने के लिए 50 लाख रुपये दिए गए थे. इस दावे ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है. अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि वास्तविक रकम कितनी थी और किन-किन लोगों के बीच यह लेन-देन हुआ.
* आर्थिक लेन-देन की गहन जांच
अपराध शाखा (क्राइम ब्रांच) पहले से ही पेपर लीक मामले में पैसों के प्रवाह और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है. सूत्रों के अनुसार, व्हॉट्सऐप चैट में कुछ ऐसे संकेत मिले हैं जिनसे यह संभावना जताई जा रही है कि परीक्षा में सफलता दिलाने के नाम पर बड़ी रकम का लेन-देन किया गया. जांच एजेंसियां अब बैंक खातों, मोबाइल रिकॉर्ड, डिजिटल भुगतान और संदिग्ध व्यक्तियों के बीच हुए संपर्कों का विश्लेषण कर रही हैं.
* 12 लाख रुपये दिए जाने की भी जानकारी
प्राथमिक जांच में यह जानकारी सामने आई है कि अमृत पाटील नामक व्यक्ति ने प्रवीण पाटील को लगभग 12 लाख रुपये दिए थे. जांचकर्ताओं का मानना है कि यह रकम कथित पेपर लीक नेटवर्क से जुड़ी हो सकती है. हालांकि, इस संबंध में अभी अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है. जांच के दौरान मयूर ठाकरे का नाम भी एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में सामने आया है. पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि मयूर ठाकरे ने कथित तौर पर विभिन्न आरोपियों के बीच संपर्क सूत्र की भूमिका निभाई थी या नहीं.
* एमपीएससी के तीन अधिकारी पहले से गिरफ्त में
इस बहुचर्चित मामले में अब तक एमपीएससी से जुड़े तीन अधिकारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और वे अपराध शाखा की हिरासत में हैं. उनसे लगातार पूछताछ की जा रही है. जांच एजेंसियों का मानना है कि इन अधिकारियों से पूछताछ के दौरान पेपर लीक नेटवर्क की कार्यप्रणाली, संभावित लाभार्थियों और आर्थिक लेन-देन से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं.
* डिजिटल साक्ष्य बने जांच का आधार
पुलिस अब मोबाइल फोन, व्हॉट्सऐप चैट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, बैंकिंग दस्तावेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच कर रही है. जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि प्रश्नपत्र किस स्तर से लीक हुआ, कितने अभ्यर्थियों तक पहुंचा और इसके बदले कितनी रकम वसूली गई.
* पूरे भर्ती तंत्र पर उठे सवाल
इस मामले ने राज्य की प्रतिस्पर्धी परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं. हजारों अभ्यर्थियों की मेहनत और भविष्य से जुड़े इस प्रकरण में अब सभी की निगाहें जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि चैट में किए गए दावों की सत्यता की स्वतंत्र जांच की जा रही है और सभी तथ्यों की पुष्टि के बाद ही आधिकारिक निष्कर्ष सामने आएंगे. फिलहाल यह मामला राज्य के सबसे चर्चित भर्ती घोटालों में से एक बन गया है.





