विदर्भ से चोरी हुआ ट्रक सीधे पाकिस्तान भेजने की साजिश
चार राज्यों से होकर गुजरता था चोरी का अफलातून नेटवर्क

वर्धा /दि.23- चोरी की दुनिया भी अपने आप में एक पूरा गणित है. चोरी क्यों की गई, यह सवाल ही अक्सर पूरे रहस्य को उजागर कर देता है. वर्धा जिले के पिपरी मेघे निवासी किशोर पांडुरंग उरकुडे के साथ हुई एक ट्रक चोरी की घटना ने पुलिस के सामने ऐसा ही एक सनसनीखेज अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क खोलकर रख दिया.
जानकारी के मुताबिक करीब 50 लाख रुपये में खरीदा गया एक नया दस चक्का हायना ट्रक जब घर के सामने से गायब हो गया, तो पीड़ित के होश उड़ गए. रामनगर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज होते ही जांच शुरू हुई, लेकिन शुरुआती दौर में कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा. यह मामला पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया. रात की गश्त के दौरान उसी इलाके में एक संदिग्ध स्कॉर्पियो वाहन नजर आया था, जिसके आधार पर जांच की दिशा तय हुई. समृद्धि महामार्ग पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने पर ट्रक की आवाजाही के अहम सुराग मिले. इसके बाद पुलिस टीम ने करीब 9 दिनों तक लगातार चार राज्यों, हरियाणा, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश में पीछा करते हुए जांच की. जांच के दौरान यह सामने आया कि राजस्थान और गुजरात क्षेत्र में ऐसे दस चक्का हायना ट्रकों को बड़े पैमाने पर चोरी कर रंग बदलकर बेचा जाता है. स्थानीय खबरी तंत्र की मदद से पुलिस को यह भी जानकारी मिली कि यह वाहन गुजरात के रास्ते पाकिस्तान तक भेजे जाते हैं. चोरी के बाद ट्रकों का रंग-रूप बदलकर उनकी पहचान मिटा दी जाती है, जिससे उनका पता लगाना मुश्किल हो जाता है.
आखिरकार मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले के एक अत्यंत दुर्गम जंगल क्षेत्र में चोरी गया ट्रक बरामद कर लिया गया. वहां ट्रक का रंग बदलने का काम चल रहा था और उसके बाद उसे पाकिस्तान भेजने की तैयारी थी. हालांकि, पुलिस की भनक लगते ही आरोपी मौके से फरार हो गए. फिलहाल पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है और ट्रक को जब्त कर लिया गया है.
बिना किसी स्पष्ट सुराग के इस चोरी का पर्दाफाश करना किसी चुनौती से कम नहीं था. पुलिस उपनिरीक्षक व जांच अधिकारी दिनेश कांबले ने बताया कि तकनीकी जांच और पुलिस अधीक्षक सौरभ अग्रवाल के मार्गदर्शन से यह सफलता संभव हो सकी. इस जांच दल में अंबादास टोपले, अलीम शेख, गजानन म्हस्के, प्रसाद शिंदे, विशाल देवकाते, योगेश चन्ने, राहुल भोयर, रुपेश उगेमुगे, सचिन पवार, अवी बनसोड, मुकेश वांदिले, नरेंद्र पाराशर, विक्की अनेराव, मनोज भोसले, स्थानीय अपराध शाखा के आशीषसिंह ठाकूर, संजय राठोड, दीपक साठे, मिथुन जिचकार तथा साइबर सेल के गोविंदराव मुंढे और अक्षय राऊत शामिल थे. वहीं पुलिस अधीक्षक सौरभ अग्रवाल, अपर अधीक्षक सदाशिव वाघमारे, उपविभागीय अधिकारी प्रमोद मकेश्वर, अपराध शाखा प्रमुख विनोद चौधरी और थाना प्रभारी अजय भुसारी ने जांच को दिशा देने में अहम भूमिका निभाई. यह मामला न केवल अंतरराज्यीय वाहन चोरी गिरोह की पोल खोलता है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी गंभीर चिंता का विषय बनकर सामने आया है.





