कोरियाई तीरंदाजों को हराना असंभव लगता था, अब बदलेगी तस्वीर

अमरावती की 17 वर्षीय तीरंदाज कुमकुम मोहोड ने जताया भरोसा

 एशियाई खेलों में ऐतिहासिक स्वर्ण जीतकर भारतीय तीरंदाजी में जगाई नई उम्मीद
अमरावती /दि. 10– रिकर्व तीरंदाजी में दक्षिण कोरिया का लंबे समय से दबदबा रहा है. कोरियाई तीरंदाजों को चुनौती देना कभी लगभग असंभव माना जाता था, लेकिन अब यह तस्वीर बदल सकती है. आयची-नागोया एशियाई खेलों में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीतने वाली अमरावती की 17 वर्षीय तीरंदाज कुमकुम मोहोड ने यह विश्वास व्यक्त किया है. उनका मानना है कि इस उपलब्धि से भारतीय तीरंदाजों का आत्मविश्वास बढ़ा है और आगामी स्पर्धाओं में भारत कोरियाई खिलाड़ियों को कड़ी चुनौती दे सकेगा.
कुमकुम ने एशियाई खेलों में व्यक्तिगत रिकर्व स्पर्धा का स्वर्ण जीतकर इतिहास रचा. वह इस स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय बनीं. उन्होंने महिला टीम स्पर्धा में भी स्वर्ण पदक हासिल किया, जबकि धीरज बोम्मादेवरा के साथ मिश्रित टीम स्पर्धा में रजत पदक अपने नाम किया. व्यक्तिगत स्पर्धा में उनकी जीत से भारत को लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 के लिए एक महत्वपूर्ण ओलंपिक कोटा भी मिला.
* दक्षिण कोरियाई खिलाड़ी को हराकर रचा इतिहास
कुमकुम के करियर का सबसे यादगार क्षण दक्षिण कोरिया की ओ येजिन के खिलाफ व्यक्तिगत फाइनल मुकाबला रहा. ओ येजिन विश्व युवा तीरंदाजी प्रतियोगिता में दो स्वर्ण पदक जीत चुकी थीं. कड़े मुकाबले में कुमकुम ने दबाव के बीच संयम बनाए रखा और निर्णायक निशाना साधकर जीत हासिल की. उनकी इस सफलता ने भारतीय तीरंदाजी में नई उम्मीद जगाई है.

* विदेशी प्रशिक्षक का वेतन तीन महीने से लंबित
जहां एक ओर भारतीय तीरंदाजी में उपलब्धियों की चर्चा है, वहीं दूसरी ओर विदेशी प्रशिक्षक डेव कजिन्स का वेतन लंबित होने का मामला सामने आया है. अमेरिका के कजिन्स को मई में भारत का मुख्य कंपाउंड तीरंदाजी प्रशिक्षक नियुक्त किया गया था. बताया गया है कि पदभार संभालने के तीन महीने बाद भी उन्हें वेतन नहीं मिला है.
सूत्रों के अनुसार, वेतन में देरी और पिछले तीन महीनों के दौरान मिले व्यवहार को लेकर कजिन्स नाराज हैं. बकाया वेतन नहीं मिलने पर भारत छोड़कर अपने देश लौटने की चेतावनी दिए जाने की भी जानकारी सामने आई है. हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है.

 

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