‘कोणार्क’ की लापरवाही से अमरावती में कचरे का साम्राज्य

12 वार्डों में सफाई ठप

* 85 किराए की कचरा गाड़ियां रुकीं, अधिकारी भी मौन
अमरावती /दि.21- गणेशोत्सव के बीच अमरावती शहर में कचरा उठाने की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है. दिसंबर 2025 से शहर की सफाई और कचरा संकलन का ठेका संभाल रही ‘कोणार्क’ कंपनी की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. शनिवार को जोन क्रमांक 1, 3 और 5 के अंतर्गत आने वाले 12 वार्डों में सफाई और कचरा संकलन का काम पूरी तरह ठप रहा. इसके चलते शहर के प्रमुख चौराहों, सड़कों और विभिन्न इलाकों में कचरे के ढेर दिखाई देने लगे हैं.
कंपनी ने ठेका मिलने के करीब नौ महीने बाद भी कचरा परिवहन के लिए अपनी गाड़ियां उपलब्ध नहीं कराई हैं. बताया जा रहा है कि पूरा काम किराए की गाड़ियों के भरोसे चलाया जा रहा था. समय पर भुगतान नहीं मिलने से नाराज वाहन मालिकों ने करीब 85 किराए की गाड़ियां खड़ी कर दीं, जिसके चलते कचरा उठाने की व्यवस्था पर सीधा असर पड़ा है.
* भुगतान को लेकर वाहन मालिकों में नाराजगी
कचरा परिवहन के लिए इस्तेमाल की जा रही किराए की गाड़ियों के मालिकों का आरोप है कि कंपनी की ओर से समय पर भुगतान नहीं किया गया. इसके चलते उन्होंने वाहन उपलब्ध कराना बंद कर दिया. गाड़ियां नहीं होने से वार्डों में घर-घर से कचरा संकलन और उसे डंपिंग स्थल तक पहुंचाने की प्रक्रिया प्रभावित हुई है. इसका असर अब शहर की सफाई व्यवस्था पर साफ दिखाई दे रहा है. जगह-जगह कचरे के ढेर जमा होने से दुर्गंध फैल रही है और नागरिकों में नाराजगी बढ़ रही है.
* त्यौहार के समय सफाई व्यवस्था पर सवाल
गणेशोत्सव जैसे महत्वपूर्ण त्योहार के दौरान शहर में सफाई व्यवस्था ठप होने से नागरिकों में रोष है. नागरिकों का सवाल है कि जब पहले से ही त्योहार के दौरान कचरा बढ़ने की संभावना रहती है, तो नगर निगम प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की? नागरिक विकास डोंगरे ने कहा कि शहर में जगह-जगह कचरा जमा होने से दुर्गंध फैल रही है. ऐसे माहौल में त्योहार मनाना भी मुश्किल हो रहा है. उन्होंने नगर निगम से ठेकेदार कंपनी के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने और वैकल्पिक व्यवस्था शुरू करने की मांग की.
* सफाई अधिकारी पर भी उठे सवाल
कचरा संकट के बीच नगर निगम के सफाई विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं. आरोप है कि संबंधित अधिकारी नागरिकों और मीडिया के फोन नहीं उठा रहे हैं. इससे प्रशासन की जवाबदेही को लेकर नाराजगी बढ़ रही है. शहर में सफाई व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण विषय पर जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने से नागरिकों में असंतोष और बढ़ रहा है.
* हाईकोर्ट के फैसले के बाद कर्मचारियों की चिंता
‘कोणार्क’ कंपनी से जुड़े मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ के फैसले के बाद सफाई कर्मचारियों में भी अपने भविष्य को लेकर चिंता होने की बात सामने आ रही है. कर्मचारियों के बीच वेतन, ईएसआर्ईसी और बीमा जैसी सुविधाओं को लेकर असमंजस बताया जा रहा है. बताया जा रहा है कि, कुछ कर्मचारियों ने काम शुरू करने से पहले अग्रिम वेतन की मांग की है. इसका भी सफाई व्यवस्था पर असर पड़ने की बात सामने आई है.
* नागरिकों के प्रमुख सवाल
कंपनी अपनी गाड़ियों के बजाय किराए की गाड़ियों पर निर्भर क्यों है? ठेका लेते समय कंपनी ने अपनी व्यवस्था विकसित करने की बात कही थी. इसके बावजूद दिसंबर 2025 से अब तक किराए की गाड़ियों पर निर्भरता क्यों बनी हुई है?
* भुगतान व्यवस्था में बार-बार समस्या क्यों?
यदि वाहन मालिकों को समय पर भुगतान नहीं मिला, तो मनपा और ठेकेदार कंपनी ने इसका समय रहते समाधान क्यों नहीं किया?
* त्यौहार के समय वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
गणेशोत्सव के दौरान कचरा बढ़ने की संभावना के बावजूद 85 वाहन रुकने के बाद शहर को तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं मिल सकी?
* मनपा प्रशासन की जवाबदेही कौन तय करेगा?
12 वार्डों में सफाई ठप होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से स्पष्ट कार्रवाई और जानकारी सामने क्यों नहीं आ रही है? गणेशोत्सव के बीच पैदा हुए इस कचरा संकट ने नगर निगम की सफाई व्यवस्था और ठेकेदार कंपनी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब देखना यह है कि नगर निगम प्रशासन तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था करता है या शहरवासियों को इसी तरह कचरे के ढेर के बीच त्योहार मनाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा.

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