संपादकीय/फोटो-कुमकुम मोहोड, यशदीप भोगे, भारती फूलमाली के.

प्रेरणा बनें कुमकुम मोहोड, यशदीप भोगे, भारती फूलमाली की स्वर्णिम सफलता
जिस अमरावती से सप्ताहभर पहले छात्राओं पर जानलेवा हमले के समाचार आ रहे थे, भयंकर सडक दुर्घटना की खबरों ने निराश कर रखा है. सूखे की मार समूचा संभाग झेल रहा है. ऐसे में सुदूर जापान आईची खेल ग्राम में अंबानगरी अर्थात भारत का तिरंगा शान से लहराने वाली कुमकुम मोहोड की स्वर्णिम तथा यशदीप भोगे की रजत सफलता का सुखद समाचार देखा जाए तो रेगिस्तान में सुखद हवा के झोंके समान है. अमरावती के लिए जापान के आईची शहर का एशियाई खेल कदाचित लंबे समय तक स्मरण रखा जाएगा. यहां क्रिकेटर भारती फूलमाली और अब कुमकुम तथा यशदीप की मेडल हासिल करने वाली सफलता अद्भूत है. कुमकुम की सफलता अनेक मायनों में बडी है. कुमकुम ने एक नहीं बल्कि दो गोल्ड मेडल एशियाई खेलों में अपने अर्थात अपने देश के नाम किए हैं. अमरावती की पहली खिलाडी है, जिसने एशियाई खेलों में दो व्यक्तिगत गोल्ड मेडल प्राप्त किए. इसके पीछे निश्चित ही कुमकुम के बरसों के परिश्रम, लगन तो है ही. उसका दृढ निश्चय भी रहा. जिसके कारण कुमकुम ने असाधारण सफलता प्राप्त की है.
खेल जगत की बात करें, तो अमरावती का हनुमान व्यायाम प्रसारक मंडल क्रिकेट के इतर अन्य देशज खेलों और परंपराओं का बडा केंद्र है. 100 से अधिक वर्षों से अपने क्षेत्र में कार्यरत है. उपलब्धियां भी बडी मात्रा में हनुमान अखाडे ने प्राप्त की है. राज्य शासन ने हनुमान अखाडे को खेल विश्वविद्यालय के रुप में विकसित करने की घोषणा दो वर्ष पूर्व बजट में की थी. अब तक वह केवल घोषणा रही है. ऐसे में कुमकुम मोहोड, यशदीप भोगे की सफलता से निश्चित ही राज्य शासन का लक्ष्य पुन: अमरावती की ओर विशेषकर हनुमान अखाडे के खेल विद्यापीठ बनाए जाने की ओर जाएगा, इस प्रकार की आशा खेल प्रेमी कर रहे हैं.
कुमकुम मोहोड अथवा भारती फूलमाली और यशदीप भोगे तीनों की सफलता इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि, तीनों साधारण, मध्यम परिवार के हैं. जहां, साधन सीमित होते हैं, परिश्रम अधिक करना पडता है. बल्कि कुमकुम मोहोड ने स्वयं बताया है कि, कोरोना महामारी दौरान उसने लकडी के तीर-कमान से अभ्यास किया. उसके पास आज के दौर का आधुनिक बो-एरो न था. कालांतर में अपनी प्रतिभा के बूते कुमकुम ने प्रसिद्ध कार्पोरेट कंपनी की स्पांसरशिप प्राप्त की. तब जाकर वह पहले विश्व तीरंदाजी स्पर्धा और पिछले सप्ताह एशियाई गेम्स में सटीक निशाने लगा सकी. पदक जीत सकी. ऐसा ही मामला यशदीप भोगे का रहा. भोगे ने पहले लकवा जैसी बीमारी को मात दी. फिर एशियाई खेलों में धडाधड तीर चलाकर भारत के नाम रजत पदक किया. इसलिए भी कह सकते हैं कि, अमरावती के खिलाडियों को उपरोक्त पदक विजेताओं से प्रेरणा लेनी होगी. वे भी विश्व पटल पर छा सकते हैं. देश और अमरावती का नाम बडा कर सकते हैं.
अमरावती के संभाग स्तर खेल संकुल को विकसित किया जा रहा है. यहां खेल सामग्री के साथ आधुनिक सुविधाओं पर बल दिया जा रहा. अमरावती की विधायक सुलभा खोडके इसके लिए सतत प्रयत्नशील है. पिछले महीनों में आपने खेल संकुल और क्रीडा सुविधाओं के वास्ते 12 करोड की राशि लाई है. अमरावती में विविध खेल अकादमी भी प्रयत्नशील है. खेलों की ओर देखने का अमरावतीवासियों का भी नजरिया अब बदलेगा. क्योंकि कुमकुम मोहोड ने डबल गोल्डन कामयाबी हासिल की है, तो शिव छत्रपति अवॉर्ड विजेता यशदीप भोगे भी सिल्वर मेडल जीतने में यशस्वी रहे हैं. अमरावती के युवाओं को दोनों ही तीरंदाजों की सफलता से प्रेरणा लेना चाहिए. दोनों ही यशस्वी खिलाडी सामान्य परिवारों को बिलांग करते हैं. आपने सतत प्रयास जारी रखे, जिसके कारण राष्ट्रीय टीम में चयन और समस्त एशिया के सबसे बडे खेल महाकुंभ में जौहर दिखाने का अवसर प्राप्त किया. फिर देश के लिए मेडल भी जीते. कुमकुम मोहोड के गौरवशाली पिता अनिल मोहोड ने भी इस प्रकार का आवाहन जिले के युवाओं से किया है. सही भी है कि, युवा वर्ग सकारात्मक रहते हुए सही दिशा में अपने प्रयत्नों की पराकाष्ठा करें, तो सफलता मिलती ही है. क्षेत्र खेल का हो या व्यापार जगत अथवा अन्य कोई. कुमकुम और यशदीप दोनों की सफलता इस बात की भी परिचायक है कि, प्रतिभा को अवसर मिलने चाहिए. तो बेहतरीन रिजल्ट मिलते हैं.
इन दिनों देखा गया कि, कई खेलों बॉक्स क्रिकेट, रायफल शूटिंग, साइकलिंग, रेसिंग को अमरावती के अभिजात्य वर्ग ने अपना रखा है. उनका यह खेल विशेष से लगाव निश्चित ही उनके शौक की श्रेणी में कहा जा सकता है. यह भी देखा गया कि, विविध समाज के संगठन बॉक्स क्रिकेट और इस प्रकार के आयोजन करते आए हैं. किंतु खेलों को अब गंभीरता से लेने वाले भी कम नहीं है. मैदान पर जमकर पसीना बहाया जा रहा है. लक्ष्य प्राप्ती के लिए परिश्रम की पराकाष्ठा अमरावती के खेल-खिलाडी भी कर रहे हैं. इतना ही नहीं, तो सीमित मात्रा में ही सही शासन और कार्पोरेट क्षेत्र सहायता करता हैं. पिछले अगस्त में ही राज्य शासन ने शिव छत्रपति अवॉर्ड विजेता यशदीप भोगे को 50 लाख की राशि प्रदान की थी. उनके प्रशिक्षक गणेश विश्वकर्मा को भी आर्थिक सहायता दी गई थी. इस प्रकार की समय पर मिल जाने वाली सहायता से खेल-खिलाडियों का मनोबल बढता है. क्रिकेट के इतर भी अमरावती हो या भारत वर्ष तभी लोगों का ध्यान आकर्षित होता है, जब खेल विशेष में धन की बात आती है. प्रतिभाओं को तराशने के लिए अमरावती के लोगों, संगठनों को आगे आना चाहिए. यहां अनेक जीतेश शर्मा, यशदीप भोगे, कुमकुम मोहोड, पूर्वशा शेंडे, भारती फूलमाली मौजूद हैं. उनकी प्रतिभा को निखारना समस्त अमरावती की जिम्मेदारी है.





