अध्यक्ष व सदस्यों की जांच के लिए नई समिती का गठन करें
एमपीएससी विवाद पर सीएम फडणवीस ने राज्यपाल को पत्र लिखा

मुंबई./दि.5- महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (एमपीएससी) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक विवाद को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बड़ा कदम उठाया है. मुख्यमंत्री ने राज्यपाल जिष्णुदेव वर्मा को संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत एमपीएससी के वर्तमान और पूर्व अध्यक्षों तथा सदस्यों के खिलाफ जांच के लिए समिति गठित करने की सिफारिश की है. मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से राज्यपाल को भेजे गए प्रस्ताव में उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति गठित कर तीन माह के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने का सुझाव दिया गया है. रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है.
बता दे कि, पुणे में पिछले कई दिनों से एमपीएससी अभ्यर्थी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. विशेष रूप से औषध निरीक्षक (ड्रग इंस्पेक्टर) भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने और परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के आरोपों ने छात्रों में रोष पैदा किया है. इस मामले में कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी भी हुई है, जिसके बाद आंदोलन और तेज हो गया. आंदोलनकारी छात्र एमपीएससी अध्यक्ष विवेक भीमनवार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं.
इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री फडणवीस और छात्र प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक में आयोग के अध्यक्ष अथवा सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई की संवैधानिक प्रक्रिया स्पष्ट की गई थी. उसी के अनुरूप अब राज्यपाल को जांच समिति गठित करने की सिफारिश भेजी गई है. छात्रों के साथ हुई चर्चा के दौरान एमपीएससी सचिव महेंद्र हरपालकर के तबादले का आश्वासन दिया गया था. इसके बाद उन्हें सचिव पद से कार्यमुक्त भी कर दिया गया है. सरकार के इस कदम को आंदोलनकारी छात्रों की प्रमुख मांगों पर प्रारंभिक कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है.
संविधान के अनुच्छेद 317 के अनुसार लोकसेवा आयोग के अध्यक्ष अथवा सदस्य को पद से हटाने से पहले निर्धारित जांच प्रक्रिया पूरी करना आवश्यक होता है. इसी कारण सरकार ने सीधे कार्रवाई के बजाय स्वतंत्र जांच समिति गठित करने का मार्ग अपनाया है.
एमपीएससी परीक्षा प्रणाली को लेकर उठे विवाद पर विपक्ष लगातार सरकार को घेर रहा है. वहीं सत्तारूढ़ गठबंधन के कुछ नेताओं ने भी आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं. ऐसे में मुख्यमंत्री फडणवीस की ओर से राज्यपाल को भेजी गई सिफारिश को एमपीएससी विवाद के संदर्भ में अब तक का सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम माना जा रहा है. समिति गठन को मंजूरी मिलने और जांच शुरू होने के बाद आयोग के वर्तमान तथा पूर्व पदाधिकारियों की भूमिका की औपचारिक जांच का रास्ता खुल सकता है. फिलहाल छात्र संगठनों और प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थियों की नजरें राज्यपाल के अगले निर्णय पर टिकी हुई हैं.





