सिलेंडर की चिंता छोड़िए, बायोगैस पर मिलेगी सब्सिडी
सब्सिडी अब डीबीटी के जरिए सीधे बैंक खाते में

* पशुपालक किसानों को ईंधन के साथ जैविक खाद का भी लाभ
अमरावती/दि.12 – ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू ईंधन की जरूरत पूरी करने और पशुओं के गोबर का उपयोग जैविक खाद के रूप में करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय बायोगैस एवं जैविक खाद कार्यक्रम को बढ़ावा दिया जा रहा है. योजना के तहत बायोगैस संयंत्र लगाने वाले लाभार्थियों को मिलने वाली सब्सिडी अब पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से सीधे उनके बैंक खाते में जमा की जाएगी. इससे सब्सिडी वितरण में पारदर्शिता बढ़ने के साथ ही बिचौलियों की भूमिका कम होगी और लाभार्थियों को समय पर सहायता मिलने की उम्मीद है.
* ग्रामीण परिवारों के लिए दोहरा फायदा
बायोगैस संयंत्र से पशुओं के गोबर का उपयोग कर घर के लिए ईंधन तैयार किया जा सकता है. इससे एलपीजी सिलेंडर पर निर्भरता और घरेलू ईंधन का खर्च कम करने में मदद मिल सकती है. वहीं, बायोगैस बनने के बाद बचने वाली स्लरी का उपयोग जैविक खाद के रूप में किया जा सकता है. स्लरी में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटैशियम जैसे पोषक तत्व मौजूद होने के कारण यह खेतों के लिए उपयोगी मानी जाती है. इस तरह पशुपालक परिवारों को एक ही योजना से घरेलू ईंधन और खेती के लिए जैविक खाद का लाभ मिल सकता है.
* कितनी सब्सिडी मिलेगी?
योजना के तहत अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लाभार्थियों को 22 हजार रुपये तक सब्सिडी, अन्य पात्र लाभार्थियों को 14,350 रुपये तक सब्सिडी, जिला परिषद सेस योजना के तहत बायोगैस संयंत्र लगाने वाले लाभार्थियों को अतिरिक्त 10 हजार रुपये की सहायता का प्रावधान बताया गया है. मंजूर सब्सिडी पीएफएमएस के माध्यम से सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में जमा की जाएगी.
* पात्रता और जरूरी दस्तावेज
बायोगैस संयंत्र लगाने के लिए लाभार्थी के पास पर्याप्त जगह और सामान्यतः कम से कम 2 से 3 पशु होना आवश्यक है. आवेदन के साथ आधार कार्ड, बैंक पासबुक की प्रति, 7/12 एवं 8-अ उतारा, पासपोर्ट साइज फोटो और सहमति पत्र जैसे दस्तावेज आवश्यक होंगे.
* ऐसे करें आवेदन
योजना का लाभ लेने के इच्छुक पशुपालक किसान अपने नजदीकी पंचायत समिति के कृषि विभाग से संपर्क कर आवेदन प्रक्रिया और पात्रता की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.
* बिचौलियों पर लगेगा अंकुश
डीबीटी व्यवस्था के कारण सब्सिडी किस लाभार्थी को और कब दी गई, इसका डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा. इससे अनावश्यक प्रशासनिक देरी और बिचौलियों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी. सब्सिडी वितरण में लापरवाही या अनावश्यक देरी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की व्यवस्था भी की गई है.





