जी. एच. रायसोनी विश्वविद्यालय के छात्रों ने किया बेंगलुरु में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और शोध का अनुभव

अमरावती /दि.16– अमरावती स्थित जी. एच. रायसोनी विश्वविद्यालय के छात्रों और एक संकाय सदस्य ने हाल ही में बेंगलुरु का शैक्षणिक एवं तकनीकी भ्रमण किया. इस दल में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. भुमैया जुला तथा तृतीय वर्ष के विद्युत अभियांत्रिकी छात्र सागर सुनीलराव सखरावड़े और द्वितीय वर्ष के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं दूरसंचार विभाग के छात्र जीत धोरे तथा प्रज्वल काले शामिल थे.
भ्रमण का मुख्य उद्देश्य छात्रों को कक्षा के बाहर व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना था. दल का लक्ष्य उन्नत शोध, उपग्रह प्रणालियों तथा सैद्धांतिक ज्ञान और वास्तविक अनुप्रयोगों के बीच संबंध को समझना और नवाचार तथा उच्च शिक्षा के प्रति रुचि बढ़ाना था. दिन की शुरुआत बेंगलुरु के इस्कॉन मंदिर की संक्षिप्त यात्रा से हुई. यह सांस्कृतिक अनुभव छात्रों को तकनीकी कार्यक्रमों से पहले थोड़ा विश्राम और आपसी संवाद का अवसर देने के साथ भारत की सांस्कृतिक धरोहर की सराहना करने में सहायक रहा. इसके बाद दल ने देश के प्रमुख वैज्ञानिक शोध केंद्र भारतीय विज्ञान संस्थान का दौरा किया. इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर बी. एस. रजनीकांत ने सत्र का संचालन किया. छात्रों ने उच्च वोल्टेज भौतिकी और प्लाज्मा उत्पादन संबंधी प्रयोगशाला प्रदर्शन देखा. इसमें दिखाया गया कि उच्च वोल्टेज लगाने से इलेक्ट्रॉनों के त्वरण और आयनीकरण के माध्यम से प्लाज्मा कैसे बनता है. यह प्रदर्शन विद्युत अभियांत्रिकी और विद्युत चुंबकत्व के सिद्धांतों को वास्तविक शोध एवं प्रयोगशाला विधियों से जोड़ने में सहायक सिद्ध हुआ.
भ्रमण का सबसे महत्वपूर्ण भाग इसरो टेलीमेट्री, ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क अर्थात् आईएसटीआरएसी का कार्यक्रम रहा. एमएमजीईआईएस शैक्षिक पहल के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न भागों के अभियांत्रिकी छात्र एकत्रित हुए. वरिष्ठ वैज्ञानिक श्री शंकर मदस्वामी ने उपग्रह संचार प्रणालियों और अंतरिक्ष मिशनों में मानव संसाधन विकास के बारे में जानकारी दी. छात्रों ने इसरो के पूर्व अध्यक्ष ए. एस. किरण कुमार से भी संवाद किया. उन्होंने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की प्रगति, चंद्रयान-1 और मंगलयान मिशनों से जुड़े ऑप्टिकल एवं इमेजिंग पेलोड तथा युवा अभियंताओं को निरंतर सीखने और नवाचार करने की प्रेरणा दी.
संचालन सुविधाओं में छात्रों ने जाना कि ग्राउंड स्टेशन कैसे अंतरिक्ष यान से टेलीमेट्री डेटा प्राप्त करते हैं, उपग्रहों को ट्रैक करते हैं और कमांड भेजते हैं. उन्होंने बड़े एंटीना सिस्टम देखे तथा संकेत शक्ति में परिवर्तन, उपग्रह की गति से होने वाले आवृत्ति बदलाव और सक्रिय पास के दौरान एंटीना संरेखण जैसी व्यावहारिक चुनौतियों को समझा. चर्चाओं में कक्षा गणना, अंतरिक्ष यान पृथक्करण और चंद्र मिशनों से जुड़े संचार लिंक भी शामिल रहे. इस भ्रमण ने छात्रों को संचार प्रणालियाँ, माइक्रोवेव अभियांत्रिकी, एंटीना और नियंत्रण प्रणालियों जैसे कक्षा विषयों को उपग्रह निगरानी और अंतरिक्ष मिशनों के वास्तविक कार्य से जोड़ने में मदद की. सांस्कृतिक, शैक्षणिक और तकनीकी अनुभवों के संयोजन ने प्रतिभागियों को यह स्पष्ट समझ दी कि अभियांत्रिकी ज्ञान राष्ट्रीय वैज्ञानिक कार्यक्रमों को कैसे समर्थन देता है.

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