गजल मुशायरे ने परिवर्तनवादी आंबेडकरी साहित्य सम्मेलन में बांधा समां

अमरावती/दि.27– शब्दास्त्र विचार मंच तथा बैरिस्टर राजाभाऊ खोब्रागडे मेमोरियल ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर सभागृह, भीम टेकड़ी में आयोजित चौथे परिवर्तनवादी आंबेडकरी साहित्य सम्मेलन में आयोजित गजल मुशायरे ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया. यह साहित्य सम्मेलन बैरिस्टर राजाभाऊ खोब्रागडे, स्मृतिशेष सुखदेवराव तिडके तथा स्मृतिशेष सूर्यभानजी मेश्राम की स्मृति में 17 मई को आयोजित किया गया था.
सम्मेलन के दूसरे सत्र में आयोजित गजल मुशायरे की अध्यक्षता वरिष्ठ गजलकार सुदाम सोनुले ने की. मुशायरे में प्रख्यात उर्दू गजलकारा नर्गिस अली, अतुलकुमार ढोणे, अनिल अघम, प्रवीण कांबळे, अब्दुल समद रजा, अविनाश गोंडाणे तथा मधु हिरेकर ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी.
गजलकार अतुलकुमार ढोणे ने ‘होणार साध्य नाही मस्तीत नाचल्याने, होते विचार क्रांती साहित्य वाचल्याने…’ जैसी पंक्तियों के माध्यम से डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों को आत्मसात करने का संदेश दिया. वहीं अनिल अघम ने ‘बाबा तुझ्या प्रयत्ने, सारे घडून गेले…’ गजल प्रस्तुत कर सामाजिक परिवर्तन में बाबासाहेब के योगदान को भावपूर्ण ढंग से अभिव्यक्त किया.
नर्गिस अली ने ‘हमने भी जान गंवाई है चमन की खातिर…’ गजल के माध्यम से देश के लिए बलिदान देने वाले वीरों के प्रति सम्मान प्रकट किया. शब्दास्त्र प्रमुख प्रवीण कांबले ने ‘लढतोच बा भिमाचा सैनिक अजून आहे…’ जैसी ओजस्वी गजल से कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाया. अविनाश गोंडाणे ने समाज में बढ़ते ढोंग और विसंगतियों पर आधारित गजल प्रस्तुत की, जबकि अब्दुल समद रजा, पवन डोंगरे और मधु हिरेकर ने भी हृदयस्पर्शी गजलें पेश कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया.
कार्यक्रम का समापन अध्यक्ष सुदाम सोनुले की प्रभावशाली गजल ‘केली न काल पर्वा ज्यांनी इथे घरची…’ से हुआ. कार्यक्रम का संचालन पवन डोंगरे ने किया तथा आभार प्रदर्शन संजय डोंगरे ने माना.





