सैकडों करोड का गोल्ड लोन कारोबार
अमरावती में कितने किलो सोना है गिरवी?

* मुथुट का फ्रॉड उजागर होने से ग्राहकों में हडकंप
* सोने की तेजी से साहूकारों के हाथ-पांव फूले
* दूसरी किस्त
अमरावती/दि.15 – मुथुट नामक निजी वित्तीय कंपनी के सोना गिरवी घोटाले ने अमरावती के कई लोगों को हिलाकर रख दिया है. पहले केवल सराफा मार्केट में सोने के आभूषण और वस्तुएं गिरवी रखकर पैसों का काम पूरा किया जाता था. पिछले 10 वर्षों में निजी वित्तीय कंपनियों और बैंकों द्वारा भी सोने के मॉर्गेज लोन शुरु किए जाने से यह प्रश्न उपस्थित किया जा रहा है कि, आखिर अमरावती में कितने किलो सोना गिरवी है? जानकार अपने-अपने अंदाज बता रहे हैं. वहीं सराफा मार्केट के साहूकारो के हाथ-पांव सोने की तेजी के कारण फूल गए हैं. गोल्ड लोन का मार्केट कई सौ करोड तक पहुंच जाने का दावा बैंकिंग व्यवस्था से जुडे जानकार ने अमरावती मंडल से चर्चा में किया.
* निर्धारित से अधिक ब्याज
उन्होंने बताया कि, एक-एक फाइनांस कंपनी में 10-20 करोड के गोल्ड लोन केसेस होने की जानकारी फ्रॉड उजागर होने के बाद सामने आ रही हैं. ऐसे में शहर के 100 से अधिक परवानाधारक साहूकार के पास भी कई किलो सोना गिरवी रखा गया है. जिसके ऐवज में जरुरतमंदों ने रकम उठाई है. रकम और ब्याज जमा करने पर ही उनका सोना लौटाया जाता है. सरकार द्वारा निर्धारित ब्याज रेट से अधिक ब्याज निजी साहूकारों द्वारा वसूले जाने की बात दिन के उजाले की तरह साफ है.
* कई बडे साहूकार, करोडों का लेन-देन
अमरावती सराफा बाजार में अनेक बडे साहूकार होने का दावा कर ज्वेलरी व्यवसाय से जुडे लोगों ने यह भी दावा किया कि, एक-एक साहूकार के पास 5 से 10 करोड के गहान है. गहान अर्थात उतनी रकम से लगभग दुगनी रकम का सोना जमा है. उनके लेन-देन करोडों में होने की जानकारी देते हुए दावा किया गया कि, सरकारी स्तर पर सीमित त्यौहार की जानकारी दी जाती है. इसका कारण यह है कि, प्रत्येक व्यवहार पर ब्याज में सरकार को भी भुगतान करना होता है. अमरावती सराफा में दर्जनों ऐसे साहूकार रहने की जानकारी इस समय दी गई. उन्होंने बताया कि, कुछ फर्म के पास वर्षों से खातेदार है. उनके कर्जदार नियमित ब्याज चुकाकर गहान व्यवहार को नया कर लेते हैं.
* बैंकों का प्रवेश
सुरक्षित निवेश की दृष्टि से बैंकों ने भी गोल्ड लोन को प्रोत्साहन दिया. निजी साहूकारों की तुलना में ब्याज दर कम होने से काफी ग्राहक गोल्ड लोन के लिए बैंकों की सीढियां चढने लगे. उसी प्रकार निजी वित्तीय कंपनियों का भी गोल्ड लोन मार्केट में बोलबाला बढता रहा. इसके बावजूद हालांकि सराफा के परंपरागत कस्टमर्स अपने साहूकारों से जुडे रहे. इसके पीछे जानकारों ने वजह भी बतायी कि, कंपनी हो या बैंक दी गई अवधि में रेहन अर्थात गहान रखा सोना छुडाना पडता है, या फिर ब्याज की राशि जमा करानी पडती है. उसी प्रकार बैंकों और कंपनियों में ब्याज के अलावा चार्जेस वसूले जाते हैं. इस कारण भी परंपरागत ग्राहक अपने साहूकार अर्थात सराफ के पास ही वक्त-जरुरत सोना गिरवी रखते आए हैं. इसलिए आज की घडी में सराफा कारोबारियों के पास कितने किलो सोना गिरवी रखा गया है, इसका अंदाज जानकार व्यक्त करते हैं. (अगले अंक में जारी)





