हाफकीन का निजीकरण नहीं होगा, तुकाराम मुंढे को सौंपी जाएगी जिम्मेदारी

विधानसभा में मंत्री नरहरी झिरवाल ने दी जानकारी

मुंबई/दि.3- महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र में राज्य की ऐतिहासिक हाफकीन बायो-फार्मास्युटिकल संस्था को लेकर चल रही निजीकरण की चर्चाओं पर सरकार ने बड़ा स्पष्टीकरण दिया है. खाद्य एवं औषध प्रशासन मंत्री नरहरी झिरवाल ने स्पष्ट कहा कि हाफकीन का किसी भी स्थिति में निजीकरण नहीं किया जाएगा और संस्था की एक इंच जमीन भी नहीं बेची जाएगी. साथ ही संस्था में कथित भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अव्यवस्था की जांच तथा पुनर्गठन की जिम्मेदारी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे को सौंपने की घोषणा भी की गई.
विधानसभा में हुई चर्चा के दौरान विभिन्न विधायकों ने हाफकीन की खराब स्थिति, लंबित निधि, उत्पादन में गिरावट और संभावित निजीकरण को लेकर सरकार से जवाब मांगा. इस पर मंत्री झिरवाल ने बताया कि संस्था के आधुनिकीकरण और वैक्सीन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए साझेदारी मॉडल पर प्रस्ताव लाया गया था, लेकिन केवल एक कंपनी द्वारा रुचि दिखाए जाने के कारण उसे आगे नहीं बढ़ाया गया. सरकार का उद्देश्य कभी भी संस्था को निजी हाथों में सौंपना नहीं था.
इस समय मंत्री नरहरी झिरवल ने स्वीकार किया कि वित्तीय और मानव संसाधनों की कमी के कारण हाफकीन का उत्पादन लगभग ठप हो चुका है. उन्होंने कहा कि संस्था को पुनर्जीवित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं और लंबित परियोजनाओं के लिए निधि उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा. चर्चा के दौरान यह भी सामने आया कि पिछले चार वर्षों में 26 आईएएस अधिकारियों ने संस्था में अपनी जिम्मेदारी छोड़ी है. विपक्षी सदस्यों ने संस्था में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के मामलों की उच्चस्तरीय जांच की मांग की. इस पर झिरवाल ने आश्वासन दिया कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
सबसे महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए मंत्री नरहरी झिरवल ने कहा कि हाफकीन को फिर से मजबूत और प्रभावी बनाने के लिए खाद्य एवं औषध प्रशासन आयुक्त तुकाराम मुंढे को संस्था की जिम्मेदारी सौंपने पर सरकार सहमत है. सदन में कई विधायकों ने मुंढे की कार्यशैली और प्रशासनिक दक्षता का उल्लेख करते हुए उन्हें यह जिम्मेदारी देने की मांग की थी. सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि मुंबई, पुणे और जळगांव स्थित हाफकीन की किसी भी जमीन की बिक्री नहीं की जाएगी तथा संस्था के पुनरुत्थान के लिए आवश्यक कदम जल्द उठाए जाएंगे.
हाफकीन को लेकर सरकार के इस आश्वासन के बाद निजीकरण की आशंकाओं पर फिलहाल विराम लग गया है, जबकि तुकाराम मुंढे को जिम्मेदारी सौंपे जाने की घोषणा को संस्था के पुनरुद्धार की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.

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