बारिश का मौसम आधा बीता, फिर भी बांध प्यासे
अब तक कुल औसत का केवल 34.4 फीसद पानी ही बरसा

* जुलाई माह तक अपेक्षित बारिश में भी 22 फीसद का ‘बैकलॉग’
* जिले के सबसे बडे बांध अप्पर वर्धा में 51.63 फीसद जलसंग्रह
* सभी 56 छोटे-बडे व मध्यम बांधों में 46.80 फीसद पानी है जमा
* बारिश और बांधों की स्थिती को कहा जा सकता है चिंताजनक
* अगले दो माह में संतोषजनक बारिश होने का सभी को बेसब्री से इंतजार
* अन्यथा रबी के सीजन व अगली गर्मी में हो सकती है जबरदस्त जलकिल्लत
अमरावती/दि.25- जून से सितंबर माह तक चलनेवाले बारिश के सीजन का अब तक लगभग आधा समय बीत चुका है और अब बारिश का केवल आधा सीजन ही बाकी है. लेकिन इस दौरान कुल औसत बारिश का 50 फीसद पानी भी नहीं बरसा है तथा जून व जुलाई माह के दौरान अपेक्षित रहनेवाली बारिश में भी करीब 22 फीसद का बैकलॉग है. जिसके चलते जिले के एकमात्र व सबसे बडे अप्पर वर्धा बांध सहित जिले के कुल 56 छोटे-बडे व मध्यम प्रकल्पों में महज 46.80 फीसद जलसंग्रहण है. जिसमें से अप्पर वर्धा प्रकल्प में 51.63 फीसद, 7 मध्यम प्रकल्पों में 40.60 फीसद व 48 लघु प्रकल्पों में 41.79 फीसद जलसंग्रहण रहने की जानकारी है. जिसके चलते माना जा रहा है कि, यदि अब आगामी अगस्त व सितंबर माह के दौरान औसत व अपेक्षित बारिश का कोटा पूरा नहीं होता है, तो बांधों में जलसंग्रहण की स्थिती चिंताजनक रहेगी. साथ ही आगामी रबी सीजन के दौरान सिंचाई के लिए पानी की कमी रहने के साथ-साथ आगामी गर्मी के मौसम दौरान पिने हेतु पानी की किल्लत का सामना भी करना पड सकता है.
बता दे कि, बारिश के मौसम दौरान 1 जून से 24 जुलाई तक अमरावती जिले में 331.1 मिमी बारिश होने की अपेक्षा रहती है. जिसकी ऐवज में अब तक 258.2 मिमी यानी 77.5 फीसद पानी बरसा है. जो अपेक्षित बारिश की तुलना में करीब 22 फीसद कम है. जबकि बारिश के अमरावती जिले में बारिश के मौसम दौरान 1 जून से 30 सितंबर तक 4 माह की अवधि में औसत 749.8 मिमी बारिश होने की अपेक्षा व्यक्त की जाती है. जिसकी ऐवज में अब तक केवल 34.4 फीसद पानी ही बरसा है. जबकि गतवर्ष इसी अवधि तक 312.7 मिमी बारिश हो चुकी थी. जो अपेक्षित बारिश की तुलना में 93.9 फीसद थी. ऐसे में कहा जा सकता है कि, इस बार गत वर्ष की तुलना में भी अब तक हुई बारिश का प्रतिशत करीब 15 फीसद से कम है. ज्ञात रहे कि, अमरावती जिले में जून माह के दौरान 147.6 मिमी बारिश अपेक्षित होती है. जिसकी तुलना में इस बार जून माह के दौरान 125.1 मिमी यानी 84.8 फीसद बारिश हुई थी. खासबात यह रही कि, इस बार जून माह में मानसून का आगमन विलंब से होने के बावजूद जून माह में बारिश का प्रदर्शन अच्छा खासा रहा. वहीं जुलाई माह के दौरान अमरावती जिले में औसत 185.5 मिमी पानी बरसना अपेक्षित रहता है. जिसकी ऐवज में इस बार जुलाई माह के दौरान 24 जुलाई तक 131.1 मिमी यानी 71.8 फीसद पानी बरसा. ऐसे में जून व जुलाई माह के दौरान अपेक्षित रहनेवाली औसत 331.1 मिमी में से 258.2 मिमी यानी 77.5 फीसद पानी बरसा है. जो वार्षिक औसत की तुलना में 34.4 फीसद है. जबकि गतवर्ष 1 जून से 24 जुलाई के दौरान 312.7 मिमी पानी बरसा था. जो अपेक्षित की तुलना में 93.9 फीसद था. ऐसे में इस बार बारिश के प्रमाण को काफी हद तक अत्यल्प कहा जा सकता है. जिसके चलते भविष्य में पानी को लेकर अभी से चिंताजनक तस्वीर दिखाई दे रही है.
बारिश का प्रमाण कम रहने का सीधा असर जिले के सभी छोटे-बडे व मध्यम बांधों के जलसंग्रहण व जलस्तर पर भी दिखाई दे है. क्योंकि रूख-रूख कर हो रही बारिश और बारिश का प्रमाण अत्यल्प रहने के चलते जिले के सभी बांध इस समय लगभग आधे ही भरे हुए है. बता दे कि, जिले के एकमात्र सबसे बडे अप्पर वर्धा बांध की कुल जलसंग्रहण क्षमता 564.05 दलघमी है. जिसमें इस समय 291.23 दलघमी यानी 51.63 फीसद जलसंग्रहण है. गतवर्ष की तुलना में इस स्थिती को इस वजह से समाधानकारक कहा जा सकता है कि, गतवर्ष भी 25 जुलाई को अप्पर वर्धा बांध में 291.23 दलघमी यानी 51.63 फीसद जलसंग्रहण था. वहीं जिले के 7 मध्यम प्रकल्पों की कुल जलसंग्रहण क्षमता 256.24 दलघमी है. जिनमें इस समय 104.04 दलघमी यानी 40.60 फीसद जलसंग्रहण है. जबकि गतवर्ष इस 7 मध्यम प्रकल्पों में 104.82 दलघमी यानी 40.91 फीसद जलसंग्रहण था. इन 7 मध्यम प्रकल्पों में से शाहनूर प्रकल्प में 15.32 दलघमी यानी 33.28 फीसद, चंद्रभागा प्रकल्प में 33.10 दलघमी यानी 80.25 फीसद, पूर्णा प्रकल्प में 26.19 दलघमी यानी 74.05 फीसद, सापन प्रकल्प में 15.89 दलघमी यानी 41.17 फीसद, पंढरी प्रकल्प में 12.12 दलघमी यानी 21.49 फीसद, बोर्डीनाला प्रकल्प में 1.42 दलघमी यानी 11.72 फीसद जलसंग्रहण रहने की जानकारी है. जबकि गडगा प्रकल्प से संबंधित आंकडे उपलब्ध नहीं हुए है. जबकि गतवर्ष शहानुर प्रकल्प में 21.95 दलघमी यानी 47.68 फीसद है. चंद्रभागा प्रकल्प में 26.23 दलघमी यानी 63.58 फीसद, पूर्णा प्रकल्प में 18.63 दलघमी यानी 52.63 फीसद, सापन प्रकल्प में 24.58 दलघमी यानी 63.68 फीसद, पांढरी प्रकल्प में 11.74 दलघमी यानी 20.81 फीसद व बोर्डीनाला प्रकल्प में 1.70 दलघमी यानी 14.03 फीसद जलसंग्रह था. इसके अलावा जिले के 48 लघु प्रकल्पों की कुल जलसंग्रहण क्षमता 286.85 दलघमी है. जिनमें इस समय 94.71 दलघमी यानी 41.79 फीसद जलसंग्रहण है. लघु प्रकल्पों की स्थिती को संतोषजनक कहा जा सकता है. क्योंकि इन 48 लघु प्रकल्पों में गत वर्ष 82.21 दलघमी यानी 36.24 फीसद जलसंग्रहण था. ऐसे में जिले के सभी 56 छोटे-बडे व मध्यम बांधों में कुल 1047.14 दलघमी की जलसंग्रहण क्षमता है. जिनमें इस समय 490.07 दलघमी यानी 46.80 फीसद जलसंग्रहण है. जबकि जिले के इन सभी बांधों में गतवर्ष 478.26 दलघमी यानी 45.67 फीसद जलसंग्रहण था.
उपरोक्त स्थिती व आंकडों को देखते हुए कहा जा सकता है कि, बारिश का आधा सीजन बीत जाने के बावजूद अभी आधे से भी कम बारिश हुई है. जिसके चलते जिले के सभी छोटे-बडे व मध्यम बांध में केवल आधे ही भर पाए है. ऐसे में अगले 60 दिनों की कालावधी को काफी महत्वपूर्ण माना जा सकता है. यदि आगामी दो माह के दौरान जिले में चहुओर झमाझम पानी बरसता है, तो बांधों में जलस्तर बढने के साथ ही जलसंग्रहण भी बढेगा. इसके चलते जहां एक ओर बारिश के चलते खरिफ फसलों की अच्छी पैदावार के लिए अनुकूल स्थितियां बनेगी. वहीं दूसरी ओर आगामी रबी सीजन के लिए फसलों की सिंचाई हेतु पानी की उपलब्धता रहेगी. साथ ही साथ आगामी गर्मी के मौसम दौरान पेयजल हेतु पानी की कोई किल्लत भी नहीं होगी.
* संभाग के सभी बांधों में जलसंग्रहण कम
यहां यह भी विशेष उल्लेखनिय है कि, अमरावती शहर व जिले सहित संभाग के पांचों जिलोें में बारिश को लेकर कमोबेश एकसमान स्थिती है. इसके चलते अमरावती जिले के बांधों की तरह संभाग के पांचों जिलों के बांध भी प्यासे है और संभाग के कुल 288 छोटे-बडे व मध्यम प्रकल्पों में इस समय केवल 38.05 फीसद जलसंग्रहण है. बता दे कि, संभाग के कुल 288 जल प्रकल्पों की जल संग्रहण क्षमता 3102.44 दलघमी है. जिसकी ऐवज में इन सभी बांधों में औसत 1180.38 दलघमी यानी 38.08 फीसद पानी जमा है. इस संदर्भ में विदर्भ सिंचाई विकास महामंडल की ओर से लिए गए आंकडों के मुताबिक, 1399.92 दलघमी की जल संग्रहण क्षमता वाले 9 बडे प्रकल्पों में 580.43 दलघमी यानी 41.46 फीसद, 771.72 दलघमी की जलसंग्रहण क्षमता वाले 27 मध्यम प्रकल्पों में 336.84 दलघमी यानी 43.65 फीसद तथा 930.80 दलघमी की जलसंग्रहण क्षमता वाले 252 लघु प्रकल्पोें में 263.11 दलघमी यानी 28.27 फीसद जलसंग्रहण है. बांधों की स्थिती एवं जलसंग्रहण के इन आंकडों को देखते हुए संभाग में पानी को लेकर भयावह भविष्य की तस्वीर बनती दिखाई दे रही है. जिसके चलते अब सभी की आंखें आसमान की ओर टिकी हुई है और हर कोई आगामी दो माह के दौरान दमदार व जोरदार बारिश होने की प्रतिक्षा कर रहा है.





