हेल्मेट बना शहर का बडा मुद्दा
खाकी ने झोंकी पूरी फौज, थानों के अधिकारी-कर्मी भी मुस्तैद

* आपराधिक घटनाओं की जांच-पडताल रही साइड में!
* पुलिस का नारा-सिर सलामत तो…
अमरावती/दि.25 – शहरी क्षेत्र में भी शुक्रवार से अनिवार्य किए गए दुपहिया सवारों के हेल्मेट सख्ती हेतु एक ओर जहां खाकी ने पूरी फौज तैनात कर दी है, यातायात सिपाहियों के साथ ही थानों के अधिकारी-कर्मियों को भी हेल्मेट जांच के लिए लगा दिया गया है. दूसरी ओर आपराधिक घटनाओं की जांच-पडताल दरकिनार किए जाने का दावा क्राइम क्षेत्र के जानकार कर रहें है. उनका दावा है कि, दुपहिया सवार का हेल्मेट पहनना ही सबसे बडा मुद्दा फिलहाल शहर का बना है. ऐसे में घर-घर केवल और केवल हेल्मेट की चर्चा हो रही है.
* दूसरे दिन भी सैकडों चालान
यातायात पुलिस विभाग ने पहले दिन 445 चालान काटे थे. कहा जा रहा है कि, सैकडों दुपहिया चालकों को ताकीद देकर छोडा गया था. इसके अतिरिक्त सैकडों दुपहिया सवार हेल्मेट नहीं पहने होने के कारण उन्हें 500 से लेकर एक हजार रुपए तक चालान थमाए गए. शनिवार दूसरे दिन भी सैकडों वाहनों को चालान दिए जाने की जानकारी मिल रही है.
* थानों के कर्मचारी भी तैनात
इस बीच आयुक्तालय क्षेत्र में थानों के अधिकारी और कर्मियों को भी दुपहिया सवारों के हेल्मेटशुदा होने की जांच के लिए मुकर्रर कर दिया गया. अत: 10 थानों के कर्मचारी भी आज से इस अभियान में लग गए. अनेक चौराहों और प्रमुख मार्गों पर खाकी वर्दीधारी भी चालान काटते देखे गए. जिन दुपहिया सवारों ने हेल्मेट नहीं पहना था, उन्हें चेतावनी देने के साथ जुर्माना किया गया. पुलिस कर्मी बार-बार यह दोहराते सुने गए कि, आप ही की सुरक्षा के लिए हेल्मेट अनिवार्य किया गया है, कृपया हेल्मेट धारण कर सहयोग करें.
* अपराधों पर अंकुश कैसे?
यातायात विभाग के साथ-साथ थानों के अधिकारी-कर्मियों को भी दुपहिया सवारों की जांच में लगा दिए जाने पर शहरवासियों ने सवाल पूछना शुरु कर दिया है. उनका प्रश्न है कि, सारी पुलिस केवल दुपहिया सवार ने हेल्मेट पहना है या नहीं, इसी की पडताल में लग जाएगी, तो गैरकानून धंधों और अपराधों पर अंकुश की जिम्मेदारी कौन निभाएगा. जबकि शहर में आए दिन हत्या के प्रयास और कई बार हत्या की घटनाएं हो रही है. इतना ही नहीं तो इसी सप्ताह हुए एक एक्सीडेंट की ओर भी यह लोग संकेत कर रहे हैं. जिसमें हेल्मेट पहनने के बावजूद दुर्घटना में युवा कारोबारी की दर्दनाक मृत्यु हो गई. परिवार पर वज्राघात हो गया.
* गैरकानूनी धंधे पनप रहे
इन लोगों का दावा है कि, शहर पुलिस ने हेल्मेट को ही सबसे बडा विषय बना रखा है. हेल्मेट कंपलसरी किया गया है. उसकी मुहिम में यातायात सिपाहियों के साथ खाकी वर्दी धारियों को भी लगाया गया है. जबकि शहर के अनेक भागों में नाना प्रकार के अवैध कारोबार धडल्ले से चल रहे है. अवैध धंधों के कारण ही आपराधिक घटनाएं बढती है. दो रोज पहले ही पुलिस ने 50 लाख की मेफेड्रॉन जब्त की. उसके पूरे नेटवर्क की खोजबीन होनी चाहिए. मादक पदार्थों के तस्करी और काले कारोबार पर निश्चित ही युवा पीढी के भविष्य को देखते हुए अंकुश लगना चाहिए. किंतु पुलिस को दुपहिया सवारों के हेल्मेट चेक करने के काम में लगा दिए जाने का आरोप कई शहरवासी कर रहे हैं.
* बदहाल सडकें भी खींच रही ध्यान
पुलिस के हेल्मेट संबंधी अभियान की आलोचना करनेवाले सोशल मीडिया पर जमकर व्यक्त हो रहे हैं. लोगों ने सडकों के बुरे हाल का उल्लेख कर कई भागों की गड्ढायुक्त सडकों के चित्र भी साझा किए हैं. उनका कहना है कि, हेल्मेट सख्ती से पहले प्रशासन को सडकों की मरम्मत और यातायात की अन्य सुविधाओं की ओर ध्यान देना चाहिए. सिटी बस सर्विस अच्छी हो और शहर के प्रत्येक एरिया में सिटी बसों की कनेक्टीविटी हो, तो लोग अपने दुपहिया सडकों पर उतारेंगे ही नहीं. सिटी बसों का ही अथवा सार्वजनिक यातायात प्रणाली का ही अवलंब करेंगे, इसके कई फायदे भी है. सडकों पर वाहन कम होंगे, प्रदूषण कम होंगा, हादसे कम होंगे.





