‘अवकाश मंजूर होने के बाद वेतन कटौती कैसे?’
शिक्षक समन्वय समिति ने उठाया सवाल

* उग्र आंदोलन की चेतावनी
अमरावती/दि.21- 9 जुलाई को राज्यव्यापी शिक्षक आंदोलन में शामिल हुए शिक्षकों के वेतन में कटौती की चर्चा के बीच अमरावती जिला सर्व प्राथमिक शिक्षक संगठन समन्वय समिति ने प्रशासन पर सवाल उठाए हैं. समिति का कहना है कि जब शिक्षकों ने विधिवत एक दिन का आकस्मिक अवकाश लेकर आंदोलन में भाग लिया और उनकी छुट्टी स्वीकृत थी, तो फिर वेतन कटौती किस आधार पर की जाएगी? समिति ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने वेतन कटौती का निर्णय लिया तो जिलेभर में फिर से सामूहिक अवकाश लेकर अनिश्चितकालीन आंदोलन किया जाएगा.
* 3,515 शिक्षक आंदोलन में हुए थे शामिल
समिति के अनुसार, अमरावती जिले की 1,575 स्कूलों के 3,515 शिक्षक एक दिन का स्वीकृत अवकाश लेकर 9 जुलाई के राज्यव्यापी आंदोलन में शामिल हुए थे. इस आंदोलन में जिला परिषद, मनपा और नगर परिषद स्कूलों के शिक्षक भी शामिल थे.
* मुख्याध्यापक ने मंजूर की थी छुट्टी
शिक्षक नेताओं का कहना है कि शिक्षकों की छुट्टी मंजूर करने का अधिकार संबंधित मुख्याध्यापक के पास होता है. जब अवकाश विधिवत स्वीकृत किया गया था, तब बाद में वेतन कटौती करना नियमों और प्राकृतिक न्याय के विरुद्ध होगा.
* शिक्षा मंत्री के आश्वासन का दिया हवाला
समिति ने बताया कि 14 जुलाई को मुंबई स्थित मंत्रालय में शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे की अध्यक्षता में शिक्षक समन्वय समिति और शिक्षक विधायकों की बैठक हुई थी. बैठक में शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट आश्वासन दिया था कि स्वीकृत अवकाश लेकर आंदोलन में शामिल हुए किसी भी शिक्षक का वेतन नहीं काटा जाएगा. इस बैठक में प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के संचालक भी मौजूद थे.
* उग्र आंदोलन की चेतावनी
समिति के अध्यक्ष किरण पाटील ने कहा कि यदि शिक्षा विभाग ने शिक्षकों के वेतन में कटौती की कार्रवाई की, तो अमरावती जिला सर्व प्राथमिक शिक्षक संगठन समन्वय समिति के नेतृत्व में व्यापक और उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा. उन्होंने जिला परिषद प्रशासन और शिक्षा विभाग से किसी भी प्रकार का आततायी निर्णय न लेने और शिक्षा मंत्री के आश्वासन का पालन करने की मांग की है.





