दो दशक बाद मतदाता सूची का ‘गहन पुनरीक्षण’
9.86 करोड़ प्रविष्टियों की प्रत्यक्ष जांच

* आधार कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं
अकोला/दि.26 – निर्वाचन आयोग ने पूरे देश में मतदाता सूचियों का ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ करने के आदेश दिए हैं. इस अभियान का तीसरा चरण घोषित किया गया है, जिसमें महाराष्ट्र का समावेश है. इस अभियान में राज्य के लगभग 9 करोड़ 86 लाख मतदाताओं की प्रविष्टियों की प्रत्यक्ष जांच की जाएगी.
* 1952 से 2004 के बीच विभिन्न वर्षों में अभियान
देश में इससे पहले 1952 से 2004 के बीच विभिन्न वर्षों में ऐसा अभियान चलाया गया था. लेकिन पिछले 20 वर्षों में केवल ‘विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण’ किया गया है और ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ नहीं हुआ है. इस दौरान तेजी से हुए शहरीकरण के कारण जनसंख्या का बड़े पैमाने पर स्थानांतरण हुआ. कई मतदाताओं ने नए स्थान पर नाम दर्ज कराया, लेकिन पुराने स्थान से नाम नहीं हटाया. परिणामस्वरूप मतदाता सूचियों में दोहरे नाम बढ़ने की संभावना के चलते यह जांच की जा रही है.
* जनगणना के कारण महाराष्ट्र के लिए अलग समय-सारणी
राज्य की क्षेत्रीय मशीनरी वर्तमान में जनगणना के कार्य में व्यस्त है, इसलिए निर्वाचन आयोग ने महाराष्ट्र के लिए अलग समय-सारणी तय की है. यह प्रक्रिया जून माह से शुरू होकर अक्टूबर 2026 में पूरी होगी. राज्य के कुल 9 करोड़ 86 लाख 44 हजार 413 मतदाताओं के विवरण की पुष्टि 1 लाख 253 मतदान केंद्र स्तरीय अधिकारियों द्वारा की जाएगी. 30 जून से 29 जुलाई के बीच ‘बीएलओ’ घर-घर जाकर पहले से भरी हुई जानकारी वाला ‘गणना प्रपत्र’ मतदाताओं को देंगे. इसमें मतदाता की वर्तमान जानकारी तथा 2002-2004 की पुरानी जानकारी भरी होगी या मतदाता स्वयं इसे भर सकेंगे. मतदाता यह पुरानी जानकारी निर्वाचन आयोग कीvoters.eci.gov.in वेबसाइट से भी प्राप्त कर सकेंगे. मतदाताओं को यह गणना प्रपत्र ऑनलाइन भरने की सुविधा भी उपलब्ध होगी. गृहभेंट के दौरान यदि घर बंद मिलता है तो अधिकारी कम से कम 3 बार दौरा करेंगे.
* राज्य में 72 प्रतिशत पुरानी प्रविष्टियों की मैपिंग पूरी
राज्य में 72 प्रतिशत पुरानी प्रविष्टियों की मैपिंग पूरी हो चुकी है. मतदाता सूची में व्यक्ति भारतीय नागरिक है या नहीं, इसकी पुष्टि करने की जिम्मेदारी आयोग की है. यदि मतदाता सूची में प्रविष्टियाँ मेल नहीं खातीं, तो संबंधित मतदाताओं को नोटिस भेजकर दस्तावेज़ प्रस्तुत करने को कहा जाएगा. निर्वाचन आयोग के आदेश के अनुसार ‘आधार’ केवल पहचान प्रमाण के रूप में उपयोग किया जाता है. आधार अधिनियम, 2026 की धारा 9 के अनुसार आधार कार्ड को नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जाएगा, यह निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है.





