तीर्थक्षेत्र अंबिकापुर की पावन भूमि में गुरुमाउली का जयघोष
षोडशोपचार पूजन सहित श्रीसूक्त यज्ञ

* नाटिका, पौधा रोपण, जगद्गुरु के आशीर्वचन
* शिष्यों में अभूतपूर्व उत्साह, श्रद्धा का वातावरण
अमरावती/दि.1 – अंबिकापुर स्थित श्री रुख्मिणी जन्मभूमि विदर्भ पीठ में गुरु पूर्णिमा का वार्षिक उत्सव अभूतपूर्व उल्लास, उमंग, भक्ति, अनुशासन के साथ मनाया गया. भक्ति और अध्यात्म का दिव्य संगम इस समय देखने मिला. जय गुरु माउली के घोष से संपूर्ण अंबिकापुर की पावन भूमि मानों गुंजायमान हो गई थी. प्रात: पूजन से लेकर गुरु दीक्षा तक अखंड भक्ति का प्रवाह, यज्ञ, नाटिका, जगद्गुरु के आशीर्वचन, एड पेड गुरु के नाम अभियान के माध्यम से सनातन संस्कारों का संदेश प्रसारित किया गया.
* जगद्गुरु की भावपूर्ण काव्य रचना
गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर जगद्गुरु प.पू. रामानंदाचार्य स्वामी राजेश्वर माउली सरकार ने भावपूर्ण काव्य रचना के माध्यम से गुरु की महत्ता को विषद किया. आपने कहा कि, नीले अवकाश में केवल नीला दिखाई देता है/प्रकाश में वह सूर्य दिखाई देता है/मानों अज्ञान की काली छाया में छुपा होता है/उसमें मानवता विकसित कर प्रकाशमान करता है/वहीं लौकिक प्राप्त गुरु होता है/ इसलिए आज के दिन का नाम गुरु पूर्णिमा होता है.
* मर्यादा ही सर्वोच्च शिक्षा
स्वामीजी ने शिष्यों को संदेश देते हुए कहा कि, मर्यादा से बडा न कोई शास्त्र है, न शस्त्र. मर्यादावान का जीवन ही सबसे बडी गुरु शिक्षा है. आपने यह भी कहा कि, सनातन संस्कृति का व्यास पूर्णिमा अक्षयवट है. जैसे चंद्रमा 27 कलाओं से पूर्ण होता है, वैसे ही शिष्य गुरुकृपा से पूर्णता प्राप्त करता है. आपने बताया कि, भगवान श्रीकृष्ण ने सांदीपनि ऋषि से ज्ञान प्राप्ति की थी. भगवान श्रीराम ने मुनि वशिष्ठ से मर्यादा की शिक्षा ग्रहण की. मर्यादा ही जीवन का सर्वोच्च शास्त्र और साधना है. प.पू. गुरुजी ने जीवन के तीन मूल तत्व बताए. कर्तव्यनिष्ठा, तत्परता और आज्ञा पालन. स्वामीजी ने कहा कि, गुरु से जुडना केवल भौतिक लाभ के लिए नहीं, अपितु आर्थिक उन्नति के लिए आवश्यक होता है. गुरु द्वारा दिया गया मंत्र जीवन का बडा आधार होता है. श्रद्धा विश्वास से ही साधना सफल होती है.
* पूर्व मंत्री, नेताओं की उपस्थिति
पूर्व मंत्री यशोमति ठाकुर, पूर्व मंत्री जगदीश गुप्ता और अनेकानेक नेता-राजनेता, विधायक उमेश उर्फ चंदू यावलकर, विधायक दादाराव केचे, भाजपा जिलाध्यक्ष रविराज देशमुख, प्रहार अध्यक्ष संजय देशमुख सहित अनेक मान्यवरों ने माउली सरकार के आशीर्वाद प्राप्त किए. पीठ के अध्यक्ष सुरेश पाटिल ने रुख्मिणी माताजी के जन्मस्थान पर भव्य मंदिर निर्माण हेतु श्रद्धालुओं से तन, मन, धन से सहयोग करने का अनुरोध किया. संचालक पीठ की विश्वस्त मंदा नांदुरकर ने किया. इस समय श्रद्धालुओं ने रक्तदान कर सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वहन किया. गुरु पूर्णिमा का यह उत्सव एक धार्मिक आयोजन न होकर संस्कार, अनुशासन, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक और आध्यात्मिक उन्नति का प्रेरणादायी महोत्सव सिद्ध हुआ.
* भक्ति संगीत और गुरु प्रचिती नाटिका
दोपहर 12 बजे भक्ति संगीत सेवा यवतमाल के जीतू पाखरे द्वारा भावपूर्ण रुप से समर्पित की गई. पंडाल में उपस्थित हजारों श्रद्धालु भक्तिभाव में डूब गए. गायत्री डांस अकादमी द्वारा प्रस्तुत गुरु प्रचिती नाटिका ने सभी का मन मोह लिया. गुरु कृपा से शिष्यों के जीवन में आए परिवर्तन और अनुभवों को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया. दोपहर 12.30 बजे सामूहिक गुरु पूजन प्रारंभ हुआ. देर शाम तक यह पूजन चलता रहा. भक्ति और समर्पण की दिव्य अनुभूती हुई.
* श्रीसूक्त, पुरुषसूक्त महायज्ञ
ओंकारेश्वर से पधारे विद्वान मित्रजनों के सानिध्य में पवित्र और अत्यंत लाभकारी श्रीसूक्त-पुरुषसूक्त यज्ञ प्रात: 10 बजे विधिवत संपन्न किया गया. यज्ञ की शास्त्रोक्त आहूतियों ने वातावरण को पूर्णत: आध्यात्मिक उर्जा से ओतप्रोत कर दिया था. उपरांत विशेष आकर्षण व नए आयाम के अनुसार एक पेड गुरु के नाम अभियान शुरु किया गया. श्रद्धालुओं ने पौधे रोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया. हजारों ने महाप्रसाद का लाभ लिया.