भागवत कथा का श्रवण ही मनुष्य के जीवन को पवित्र और शांत बनाता है
बालव्यास अंशिकाजी का प्रतिपादन

* मंगलवार से श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ
* माहेश्वरी परिवार व माहेश्वरी महिला मंडल का आयोजन
धामणगांव रेलवे /दि.6 – श्रीमद् भागवत केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को ईश्वर से जोडनेवाला दिव्य मार्ग है. कलियुग में भगवान के नाम का स्मरण और भागवत कथा का श्रवण ही मनुष्य के जीवन को पवित्र, शांत और सार्थक बनाता है, ऐसा प्रतिपादन बालव्यास अंशिकाजी ने किया. वे माहेश्वरी परिवार एवं माहेश्वरी महिला मंडल के संयुक्त तत्वावधान में सावन मास के पावन अवसर पर मंगलवार से आयोजित 7 दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के पहले दिन कथा श्रवण करवा रही थी.
श्रीमद् भागवत कथा के प्रारंभ से पहले श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर, सिनेमा चौक से सैकडों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में भव्य कलश यात्रा निकाली गई. महिलाओं ने सिर पर मंगल कलश धारण किए, वहीं श्रद्धालु भगवान के जयघोष, भजन-कीर्तन और भक्तिमय धुनों के साथ नगर भ्रमण करते हुए वृंदावन धाम माहेश्वरी भवन पहुंचे, जहां पहले दिन की कथा का प्रारंभ वृंदावन निवासी 11 वर्षीय सुप्रसिद्ध बालव्यास पूज्य अंशिकाजी ने अपनी ओजस्वी वाणी में किया.
कथा के प्रथम दिवस पर उन्होंने श्रीमद् भागवत महापुराण की महिमा, उसके श्रवण का महत्व बताया तथा प्रथम श्लोक के आध्यात्मिक भाव का अत्यंत सरल एवं प्रभावशाली ढंग से वर्णन किया. उन्होंने बताया कि, कथा सुनने से मन के विकार दूर होते है, भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की प्राप्ती होती है तथा जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है. उन्होंने श्रद्धालुओं से आवाहन किया कि, वे कथा को केवल सुने ही नहीं, बल्कि उसके आदर्शों को अपने जीवन में भी उतारे.
कथा के दौरान मधुर भजनों और संगीतमय प्रस्तुति ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया. माहेश्वरी परिवार, माहेश्वरी महिला मंडल, धामणगांव तहसील माहेश्वरी महिला संगठन एवं बहु-बेटी मंडल ने सभी श्रद्धालुओं से 10 अगस्त तक रोजाना दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक आयोजित कथा में सहपरिवार उपस्थित होकर श्रीमद् भागवत कथा की अमृतवाणी का श्रवण करने और पुण्य लाभ प्राप्त करने की अपील की है.