जीवन का हर पल खुशी से जिएं, जीवन को सुंदर बनाने की जिम्मेदारी हमारी ही है – गणेश शिंदे
‘अमृत मंथन’ के अंतिम सत्र में प्रेरणादायी विचारों की मेजवानी; श्रोताओं की अभूतपूर्व भीड़

अमरावती/दि.5 – तुषार भारतीय मित्र परिवार की ओर से पिछले 14 वर्षों से आयोजित तीन दिवसीय ‘अमृत मंथन व्याख्यानमाला’ के अंतिम सत्र को अभूतपूर्व प्रतिसाद मिला. महाराष्ट्र के प्रसिद्ध वक्ता एवं गीतकार गणेश शिंदे ने ‘जीवन सुंदर है’ विषय पर प्रभावी और भावस्पर्शी शैली में विचार रखते हुए उपस्थित श्रोताओं को जीवन को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखने का संदेश दिया.
गणेश शिंदे ने कहा कि जीवन सुंदर है या नहीं, यह परिस्थितियां तय नहीं करतीं, बल्कि हम परिस्थितियों को किस नजरिए से देखते हैं, इसी पर जीवन का सौंदर्य निर्भर करता है. सुख-दुख, सफलता-असफलता, संघर्ष, रिश्ते और बदलती परिस्थितियों को स्वीकार करते हुए हर पल खुशी से जीने का उन्होंने आह्वान किया.
उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में इंसान पैसा, प्रतिष्ठा और सफलता के पीछे दौड़ रहा है, लेकिन इसी दौड़ में जीवन जीने का आनंद खोता जा रहा है. जीवन में कितना हासिल किया, इससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि मिले हुए हर पल को कितनी खुशी और संतुष्टि से जिया. परिवार और आसपास के लोगों को समय देना, रिश्तों को संभालना तथा छोटी-छोटी खुशियों का उत्सव मनाना ही सुंदर जीवन का आधार है.
अपेक्षाएं कम करें, कृतज्ञता बढ़ाएं और शिकायतें कम करके खुशी तलाशने की दृष्टि विकसित करें, ऐसा जीवनमंत्र देते हुए शिंदे ने श्रोताओं को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित किया. उन्होंने कहा कि परिस्थितियां बदलने का इंतजार करने के बजाय अपना दृष्टिकोण बदलने से भी सकारात्मकता पैदा की जा सकती है.
मोबाइल और सोशल मीडिया की आभासी दुनिया में खोने के बजाय वास्तविक जीवन के लोगों से संवाद करने और रिश्तों को समय देने का संदेश भी उन्होंने दिया. संघर्षों से घबराने के बजाय उनसे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए. असफलता अंत नहीं, बल्कि नई शुरुआत का अवसर है, ऐसा उन्होंने विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से समझाया.
गणेश शिंदे के विनोदी अंदाज, किस्सों, भावनात्मक प्रसंगों और जीवन से जुड़े उदाहरणों ने पूरे सभागार को मंत्रमुग्ध कर दिया. उनके द्वारा प्रस्तुत प्रसिद्ध गीत ‘काय सांगू राणी तुला’ को भी श्रोताओं ने उत्स्फूर्त दाद दी. तालियों की गड़गड़ाहट से कार्यक्रम स्थल गूंज उठा.
उल्हास बापूरीकर की अध्यक्षता में हुए अंतिम सत्र में आयोजक तुषार भारतीय, चेतन गावंडे, लता देशमुख, भारती गुहे सहित अनेक गणमान्य उपस्थित थे. कार्यक्रम में इतनी बड़ी संख्या में श्रोता पहुंचे कि सभागार की सभी कुर्सियां कम पड़ गईं. कई श्रोताओं ने चटाई पर बैठकर पूरा व्याख्यान सुना. इस तरह अंतिम सत्र ने भीड़ का नया रिकॉर्ड बनाया.
कार्यक्रम का संचालन राधा मोहोल ने किया. प्रस्तावना तुषार भारतीय ने रखी, जबकि अतिथियों का परिचय मंदार नानोटी ने कराया. आभार चेतन गावंडे ने माना. कार्यक्रम की शुरुआत ‘महाराष्ट्र गीत’ से और समापन ‘वंदे मातरम’ से हुआ.
पिछले 14 वर्षों से ‘अमृत मंथन’ के माध्यम से अमरावतीवासियों को विभिन्न क्षेत्रों के नामचीन वक्ताओं के विचार सुनने का अवसर मिल रहा है. ज्ञान, संस्कार, प्रेरणा और सकारात्मक विचारों की इस वैचारिक मेजवानी ने अमरावती के सांस्कृतिक और वैचारिक क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है. तीन दिवसीय इस वैचारिक पर्व का समापन अगले वर्ष नए विषयों और नए विचारों के साथ फिर मिलने के संकल्प के साथ हुआ.





