कोणार्क को सुप्रीम कोर्ट में सहयोग न करे मनपा, प्रभागवार निकाले सफाई के ठेके

शहर सुधार समिती सभापति राधा कुरिल ने उठाई मांग, आयुक्त को सौंपा पत्र

* कहा – सिंगल हैंडेड ठेकेदार को काम देकर देख लिया, शहर में जगह-जगह कचरे के ढेर
* अदालत से निरस्त करार समाप्त कर नई निविदा जारी करने की मांग
अमरावती/दि.15 – शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर मनपा के शहर सुधार समिति की सभापति राधा राजू कुरिल ने मनपा प्रशासन पर निशाना साधते हुए मांग की है कि, कोणार्क कंपनी के मामले में मनपा को सुप्रीम कोर्ट में उसका सहयोग नहीं करना चाहिए. उन्होंने कहा कि शहरवासियों को कचरे की समस्या से स्थायी राहत दिलाने के लिए किसी एक ठेकेदार को पूरे शहर की सफाई व्यवस्था सौंपने के बजाय प्रभागवार निविदा निकालकर अलग-अलग ठेकेदार नियुक्त किए जाने चाहिए.
पार्षद राधा कुरिल ने कहा कि मनपा पहले ही एक ही ठेकेदार को पूरे शहर की सफाई का काम सौंपने का प्रयोग कर चुकी है. उनके अनुसार, इसके बावजूद शहर में जगह-जगह कचरे के ढेर दिखाई दे रहे हैं और नागरिकों को अपेक्षित सफाई व्यवस्था नहीं मिल रही है. ऐसे में उसी व्यवस्था को जारी रखने के बजाय प्रभागवार सफाई ठेका प्रणाली लागू करना अधिक प्रभावी होगा. पार्षद राधा कुरिल के अनुसार, वर्ष 2017 में प्रभागवार सफाई व्यवस्था के तहत करीब 10 लाख रुपये प्रतिमाह के ठेके दिए जाते थे. उस व्यवस्था में कचरा उठाने के साथ मच्छरों के नियंत्रण के लिए फॉगिंग, कुओं में ब्लीचिंग पाउडर डालना, सार्वजनिक शौचालयों की सफाई और तणनाशक का छिड़काव जैसे विभिन्न कार्य भी ठेकेदारों के जिम्मे थे. उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान व्यवस्था में करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद नागरिकों को कचरे और गंदगी से राहत नहीं मिल रही है. उन्होंने नए करार में पहले की व्यवस्था में शामिल कई आवश्यक कार्यों को पर्याप्त रूप से शामिल नहीं किए जाने पर भी सवाल उठाया.
शहर सुधार समिती सभापति राधा कुरिल ने कहा कि प्रभागवार ठेके होने का एक बड़ा फायदा यह था कि किसी एक ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई या उसका ठेका रद्द होने की स्थिति में दूसरे प्रभागों के ठेकेदारों के माध्यम से सफाई व्यवस्था को प्रभावित होने से बचाया जा सकता था. इसके विपरीत पूरे शहर का काम एक ही ठेकेदार के पास होने से यदि किसी कारण से उस ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई होती है तो पूरे शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित होने का खतरा बना रहता है. उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यवस्था के कारण सफाई व्यवस्था को लेकर नागरिकों में असंतोष बढ़ रहा है और इसका खामियाजा नगरसेवकों को भी भुगतना पड़ रहा है.
पार्षद राधा कुरिल ने मनपा प्रशासन से मांग की कि अदालत द्वारा निरस्त किए गए कोणार्क कंपनी के करार को आगे बढ़ाने के बजाय उसे समाप्त कर प्रभागवार सफाई ठेकों के लिए नई निविदा प्रक्रिया शुरू की जाए. उन्होंने कहा कि शहर को स्वच्छ रखने के लिए व्यवस्था का विकेंद्रीकरण जरूरी है और अलग-अलग प्रभागों में अलग-अलग ठेकेदार रहने से जवाबदेही भी तय की जा सकेगी. उन्होंने कहा कि अमरावतीकरों को स्वच्छ और नियमित सफाई व्यवस्था उपलब्ध कराना मनपा की प्राथमिक जिम्मेदारी है. इसके लिए ऐसी व्यवस्था लागू की जानी चाहिए जिसमें किसी एक ठेकेदार पर पूरे शहर की निर्भरता न हो.

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