मनपा के 227 उद्यानों पर हर साल 3 करोड़ का खर्च, फिर भी बदहाल
109 उद्यान ठेके पर, 118 की जिम्मेदारी मनपा के पास

* सफाई के नाम पर खानापूर्ति, अब दो साल का ठेका देने की तैयारी
अमरावती/दि.3- अमरावती महानगरपालिका क्षेत्र के 22 प्रभागों में नागरिकों के लिए बनाए गए 227 उद्यानों की देखरेख पर प्रतिवर्ष करीब 3 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद अनेक उद्यानों की हालत बदहाल बनी हुई है. कहीं गंदगी का अंबार है तो कहीं नियमित साफ-सफाई का अभाव दिखाई देता है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद शहरवासियों को स्वच्छ और सुंदर उद्यान क्यों नहीं मिल पा रहे हैं?
मनपा क्षेत्र के कुल 227 उद्यानों में से 109 उद्यान ठेके पर दिए गए हैं. इन उद्यानों की देखरेख के लिए करीब 15 से 20 ठेकेदार काम करते हैं. प्रत्येक उद्यान में एक मजदूर और एक माली नियुक्त किया जाता है. छोटे उद्यानों के लिए प्रतिवर्ष करीब 2.23 लाख रुपए, जबकि बड़े उद्यानों के लिए 2.54 लाख रुपए तक का ठेका दिया जाता है.
* 118 उद्यान मनपा के भरोसे, हालात चिंताजनक
दूसरी ओर मनपा के पास 118 उद्यानों की सीधे देखरेख की जिम्मेदारी है. इन उद्यानों में पानी की सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद अनेक स्थानों पर साफ-सफाई और रखरखाव का अभाव साफ दिखाई देता है. उद्यानों में झाड़ियां, कचरा और अव्यवस्था नागरिकों के लिए परेशानी का कारण बन रही है. हाल ही में मनपा आयुक्त डॉ. मंगेश गोंदावले ने विभिन्न उद्यानों का निरीक्षण किया था. इसके बाद उद्यानों में सफाई अभियान शुरू किया गया. लेकिन सवाल यह है कि आयुक्त के निरीक्षण के बाद ही सफाई क्यों याद आती है? क्या नियमित निगरानी की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है?
* अब दो साल का ठेका, खराब काम पर बाहर का रास्ता
मनपा की स्थायी समिति ने अब उद्यानों के देखरेख और रखरखाव का ठेका एक वर्ष के बजाय दो वर्ष के लिए देने का निर्णय लिया है. इसके तहत जो ठेकेदार संतोषजनक काम करेगा और उद्यानों को स्वच्छ, सुंदर व हरा-भरा रखेगा, उसे आगे भी काम जारी रखने का अवसर मिलेगा. वहीं, काम में लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों को बाहर का रास्ता दिखाकर निविदा प्रक्रिया के माध्यम से नए ठेकेदार की नियुक्ति की जाएगी.
* ई-टेंडरिंग से बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा, लेकिन निगरानी कौन करेगा?
वर्तमान स्थिति को देखते हुए मनपा आयुक्त डॉ. गोंदावले का ई-टेंडरिंग के माध्यम से उद्यानों के ठेके देने का मानस है. उनका मानना है कि ई-टेंडरिंग से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और इसका फायदा उद्यानों के रखरखाव में दिखाई देगा. हालांकि, केवल ठेका प्रक्रिया बदलने से समस्या हल होगी या नहीं, यह बड़ा सवाल है. करोड़ों रुपए खर्च होने के बाद भी यदि उद्यान गंदे और बदहाल मिलते हैं तो जिम्मेदारी तय कौन करेगा? ठेकेदारों के काम की नियमित जांच होगी या फिर निरीक्षण के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति होती रहेगी?
* ओपन जिम में उमड़ते हैं नागरिक, सफाई व्यवस्था पर सवाल
शहर के अनेक उद्यानों में ओपन जिम की सुविधा उपलब्ध है. सुबह और शाम बड़ी संख्या में नागरिक यहां मॉर्निंग वॉक और व्यायाम के लिए पहुंचते हैं. ऐसे में इन स्थानों पर स्वच्छता, हरियाली और मूलभूत सुविधाओं का बेहतर होना बेहद जरूरी है. मनपा का दावा है कि उद्यानों को स्वच्छ और सुंदर बनाकर शहरवासियों के लिए बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया जाएगा. लेकिन 227 उद्यानों के रखरखाव और करोड़ों रुपए के खर्च के बीच जमीन पर कितना बदलाव आता है, इसका असली फैसला शहरवासी ही करेंगे. अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि दो वर्ष के ठेके और ई-टेंडरिंग की नई व्यवस्था के बाद शहर के उद्यान वास्तव में चमकते हैं या फिर करोड़ों का खर्च और बदहाल उद्यान-यही पुरानी कहानी दोहराई जाती है.





