हाईकोर्ट के फैसले ने हमारी आपत्तियों पर लगाई मुहर, अब जिम्मेदारों पर हो कार्रवाई

कोणार्क ठेका रद्द होने पर पार्षद अनिल अग्रवाल का हमला

* पहली आमसभा में ही उठाए थे सवाल, निविदा प्रक्रिया में बड़े भ्रष्टाचार का लगाया आरोप
अमरावती/दि.2 – अमरावती महानगरपालिका द्वारा कोणार्क इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनी को दिए गए बहुचर्चित सात वर्षीय एकल एवं संयुक्त सफाई ठेके को नागपुर हाईकोर्ट द्वारा रद्द कर निविदा प्रक्रिया को पुनः शुरू करने के निर्देश दिए जाने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं. कांग्रेस पार्षद अनिल अग्रवाल ने न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह निर्णय मनपा की पहली आमसभा में उनके द्वारा उठाए गए सवालों और लगाए गए आरोपों पर न्यायिक मुहर लगाने जैसा है. उन्होंने मांग की कि अब इस पूरे प्रकरण के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए.
पार्षद अनिल अग्रवाल ने कहा कि जनवरी माह के अंतिम सप्ताह में तत्कालीन मनपा आयुक्त एवं प्रशासक सौम्या शर्मा चांडक ने अत्यंत जल्दबाजी में कोणार्क कंपनी को सात वर्षों के लिए शहर की साफ-सफाई, घर-घर कचरा संकलन और कचरा परिवहन का ठेका प्रदान कर दिया था. उस समय मनपा चुनाव संपन्न हो चुके थे और नया सभागृह अस्तित्व में आने वाला था, फिर भी निर्वाचित प्रतिनिधियों के आने से पहले ही पूरी प्रक्रिया को अंतिम रूप दे दिया गया. उन्होंने कहा कि यह पूरा घटनाक्रम शुरू से ही संदेह के घेरे में था.
पार्षद अनिल अग्रवाल ने बताया कि 28 फरवरी को आयोजित मनपा की पहली विशेष आमसभा में उन्होंने कोणार्क कंपनी को दिए गए ठेके की प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि निविदा प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं और भ्रष्टाचार हुआ है. उन्होंने उस समय यह सवाल भी उठाया था कि आखिर एक ही कंपनी को सात वर्षों के लिए इतना बड़ा संयुक्त ठेका क्यों दिया गया. पार्षद अनिल अग्रवाल के अनुसार, उस समय प्रशासन के पास इस प्रश्न का कोई संतोषजनक उत्तर नहीं था. उन्होंने कहा कि इसी मुद्दे को लेकर सभागृह में हुए तीव्र विरोध के बाद सर्वदलीय स्वच्छता अभ्यास समिति गठित करने का निर्णय लिया गया था.
विशेष उल्लेखनीय है कि, पार्षद अनिल अग्रवाल स्वयं इस अभ्यास समिति के सदस्य थे. उन्होंने दावा किया कि समिति के अध्ययन में यह स्पष्ट रूप से सामने आया था कि मनपा द्वारा जारी निविदा की शर्तों और बाद में कोणार्क कंपनी के साथ किए गए करार की शर्तों में भारी अंतर था. कई महत्वपूर्ण नियमों और दायित्वों को अंतिम करार से बाहर रखा गया, जिससे कंपनी को सीधा लाभ पहुंचा. पार्षद अनिल अग्रवाल ने आरोप लगाया कि कंपनी के पक्ष में नियमों में बदलाव और शर्तों में नरमी कोई सामान्य प्रशासनिक भूल नहीं थी, बल्कि इसके पीछे सुनियोजित तरीके से लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई. समिति ने अपनी रिपोर्ट में इस मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश भी की थी.
पार्षद अनिल अग्रवाल ने कहा कि अभ्यास समिति की रिपोर्ट को आमसभा ने स्वीकार किया था और प्रशासन को कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए थे, लेकिन किसी भी अधिकारी या जिम्मेदार व्यक्ति पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. इसके विपरीत बाद में स्थायी समिति ने विवादों और विरोध के बावजूद सफाई ठेके के पार्ट-बी को भी मंजूरी दे दी, जिससे कोणार्क कंपनी के लंबित भुगतान का रास्ता साफ हो गया. उन्होंने कहा कि उस समय भी उन्होंने और अन्य पार्षदों ने इस निर्णय का विरोध किया था, लेकिन उनकी बातों को नजरअंदाज किया गया.
हाईकोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए पार्षद अनिल अग्रवाल ने कहा कि यह मामला किसी तकनीकी त्रुटि का नहीं, बल्कि जानबूझकर किए गए निर्णयों का है. उन्होंने आरोप लगाया कि सफाई ठेके की आड़ में करोड़ों रुपये के हित साधे गए और कुछ लोगों ने इसका लाभ उठाया. उन्होंने कहा, अब जबकि हाईकोर्ट ने निविदा प्रक्रिया को ही सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है, तो उन सभी लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए जिन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया. केवल ठेका रद्द कर देना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि दोषियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए.
पार्षद अनिल अग्रवाल ने वर्तमान मनपा आयुक्त डॉ. मंगेश गोंदावले की कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि वे प्रशासन में पारदर्शिता लाने और व्यवस्था को सुधारने का प्रयास कर रहे हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि आयुक्त गोंदावले न्यायालय के निर्णय के बाद पूरे मामले की निष्पक्ष समीक्षा कर दोषियों के खिलाफ कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे. उन्होंने कहा कि शहर की सफाई व्यवस्था को राजनीतिक और आर्थिक हितों का माध्यम बनाने वालों को जवाबदेह ठहराना समय की मांग है, ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियां दोबारा उत्पन्न न हों.

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