जेल में बंद विधायक के भतीजे की हार्ट अटैक से मौत

भात खरीदी घोटाले में हुई थी हरीश दरोडा की गिरफ्तारी

ठाणे/दि.23 – राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजित पवार गुट) के विधायक दौलत दरोडा के भतीजे हरीश दरोडा की जेल में हृदयाघात से मौत हो गई. वह आदिवासी विकास महामंडल की भात खरीदी योजना में हुए करोड़ों रुपये के कथित घोटाले के मामले में गिरफ्तार थे. जेल में अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें ठाणे जिला शासकीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया. इस घटना से शहापुर तालुका सहित पूरे राजनीतिक गलियारों में सनसनी फैल गई है.
यह मामला खरीफ व रबी सीजन 2022-23 का है, जब केंद्र सरकार की न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना के तहत भात खरीदी की गई थी. जांच में सामने आया कि साकडबाव केंद्र के अंतर्गत 13,892 क्विंटल भात खरीदी दर्शाई गई थी. इसमें से 8,771 क्विंटल भात मिलों को भेजा गया, लेकिन शेष 5,120 क्विंटल भात वास्तविक रूप से उपलब्ध नहीं मिला. इस कथित गड़बड़ी से लगभग 1 करोड़ 60 लाख रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया है. इस प्रकरण में साकडबाव आदिवासी सेवा सहकारी संस्था के अध्यक्ष हरीश दरोडा, आदिवासी विकास महामंडल के तत्कालीन प्रादेशिक प्रबंधक विजय गांगुर्डे, शहापुर के तत्कालीन उपप्रादेशिक प्रबंधक अविनाश राठोड सहित कुल छह लोगों के खिलाफ किन्हवली पुलिस थाने में अपराध दर्ज किया गया था. शिकायत में आरोप लगाया गया कि किसानों के नाम पर फर्जी व बोगस रसीदें तैयार कर करीब पांच हजार क्विंटल भात खरीदी का झूठा रिकॉर्ड बनाया गया.
* आरोपों से किया था इनकार
गिरफ्तारी से पहले हरीश दरोडा ने अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार बताते हुए कहा था कि भात खरीदी में किसी भी प्रकार का गैरव्यवहार उन्होंने नहीं किया है. उनका दावा था कि संस्था के केंद्रप्रमुख जयराम सोगीर ने स्वयं यह लिखित जिम्मेदारी ली थी कि यदि कोई गड़बड़ी हुई तो उसकी पूरी जवाबदेही वही लेंगे. साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि महामंडल से सीधा अनुबंध सोगीर का था, न कि उनका.
* जेल में अचानक बिगड़ी तबीयत
गिरफ्तारी के बाद हरीश दरोडा को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था. जेल में रहते हुए अचानक उन्हें सीने में दर्द उठा और हार्ट अटैक आया. तत्काल उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. जेल में बंद आरोपी की मौत ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है. जहां एक ओर पुलिस व प्रशासन मामले की गहराई से जांच में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक हलकों में भी इस घटना को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है. विपक्षी दल मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, जबकि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मौत के कारणों की भी स्वतंत्र जांच की जाएगी. इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल भात खरीदी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि जेल में बंद कैदियों की स्वास्थ्य सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर चिंतन की आवश्यकता को उजागर कर दिया है.

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