अब इंतजार महापौर के आरक्षण का

मंत्रालय की चिट्ठी से तय होंगे 29 शहरों के कर्णधार

* रोटेशन पध्दति के कारण बढा है सस्पेंस
मुंबई/दि.17- महापालिका चुनाव की मतगणना होने के साथ परिणाम घोषित हो गए. अमरावती, नागपुर, अकोला सहित 29 मनपा चुनाव की धामधूम अब जाकर शांत हो गई हैं. दलीय स्थिती साफ होने के बाद अब सत्ता समीकरण की चर्चा हो रही हैं. महापौर पद के आरक्षण को लेकर अब धडकने बढी हैं. मतदान से पहले रोका गया आरक्षण अब किसी भी वक्त मंत्रालय में ड्रॉ निकालकर घोषित किया जा सकता हैं. जिससे आरक्षण के कारण किसके राजयोग चमक उठते हैं, इसकी उत्कंठा तेज हो गई हैं.
बरती गई सावधानी
महापौर पद का आरक्षण आम तौर पर मनपा चुनाव के मतदान से पहले घोषित किया जाता है. किंतु राजकीय समीकरण और जातीय आरक्षण के पेच को ध्यान में रख राज्य शासन ने प्रक्रिया परिणामों के पश्चात करने का निर्णय किया. जिससे अनुुमान लगाया गया कि राजनीतिक सावधानी बरती जा रही है. मतदान से पहले मेयर पद का आरक्षण घोषित करने से उसका वोटिंग पर असर हो सकता है. इस डर के मारे सरकार ने परिणामों के बाद महापौर लॉटरी का निर्णय किया. ऐसे में कई दिग्गज भावी महापौर के रूप में अखाडे में उतरे थे. अब सभी ने अवसर मिलने की चाह में अपने ईष्ट से गुहार लगा रखी है. आरक्षण ड्रॉ के कारण कई बार नये चेहरे को भी अवसर मिलते देखा गया है.
8 दिनों में होगा तय
महापौर पद आरक्षण लॉटरी मनपा चुनाव रिजल्ट घोषित होने से अब अगले सप्ताह के अंदर शहरी विकास मंत्रालय को निकालनी ही पडेगी. अंदाज है कि मंत्रालय या संह्याद्री अतिथिगृह पर ड्रॉ निकाला जायेगा. जनवरी के अंतिम सप्ताह में यह ड्रॉ हो सकता है.
* महिला आरक्षण का निर्णय
90 के दशक तक महापौर पद का महिला आरक्षण नगण्य था. 73 और 74 वें संविधान संशोधन पश्चात महाराष्ट्र में स्थानीय निकायों में पहले 33% एवं बाद में 50% आरक्षण देकर मिसाल रखी गई थी. जिससे मुंंबई, पुणे, नागपुर, नाशिक जैसे बडे शहरों को कई कर्तव्यदक्ष महिला महापौर मिली.
इच्छुकों की बढी धडकनें
चुनाव जीतने के बाद अनेक नेताओं ने महापौर पद हेतु फिल्डिंग शुरू की है. किंतु संबंधित मनपा में आरक्षण ड्रॉ उस नेता या नेत्री के प्रवर्ग का न रहा तो बहुमत रहने पर भी उन्हें महापौर पद से वंचित रहना पडेगा. आरक्षण की चिट्ठी अपने फेवर में रहेगी, क्या इस बात पर शहर का भावी महापौर तय होगा. अभी तो इच्छुकों की धडकनें तेज होती दिखाई पड रही है.
यह भी उल्लेखनीय है कि
महाराष्ट्र में महापौर पद महत्वपूर्ण तथा प्रतिष्ठा का माना गया है. वर्तमान मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस उप राजधानी नागपुर के सबसे युवा मेयर बने थे. उसी प्रकार विलासराव देशमुख और छगन भुजबल जैसे नेता भी महापौर पद से आगे बढकर मंत्री, मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री बने. इसलिए आरक्षण ड्रॉ को लेकर समस्त प्रदेश में भारी उत्सुकता है.
अमरावती में भारी उत्सुकता
अमरावती महापालिका में त्रिशंकु स्थिति के कारण पहले ही काफी खींचतान देखी जा रही है. ऐसे में महापौर पद का आरक्षण भी बडी उत्सुकता का विषय बना है. पिछली बार दोनों महापौर पद पिछडा वर्ग के लिए आरक्षित थे. संजय नरवणे और चेतन गावंडे को शहर का प्रथम नागरिक बनने का अवसर मिला था. अत: इस बार चर्चा है कि पहला ढाई वर्ष का कार्यकाल महिला महापौर का रह सकता है. रोटेशन पध्दति अपनाने पर भी अमरावती में महिला को ही मौका मिलने की चर्चा यहां तेज है.

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