अमरावती संभाग में महज 61 प्रतिशत पानी

पिछले वर्ष संभाग के बांधों में था अधिक जलसंग्रह

* राज्य के जलसंग्रह में 19 प्रतिशत की गिरावट
* छ. संभाजीनगर विभाग की स्थिति सबसे चिंताजनक
* गर्मियों से पहले जल नियोजन की जबरदस्त चुनौती
अमरावती/दि.16 – महाराष्ट्र में मानसून की विदाई के साथ ही आगामी गर्मियों में जलसंकट की आशंका गहराने लगी है. राज्य के बांधों में पिछले वर्ष की तुलना में इस बार जलसंग्रह में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है. राज्य के कुल बांधों में फिलहाल 72 प्रतिशत उपयोगी जलसंग्रह उपलब्ध है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 91 प्रतिशत था. यानी सालाना तुलना में जलसंग्रह 19 प्रतिशत कम है. अमरावती संभाग में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है. यहां के बांधों में केवल 61 प्रतिशत जलसंग्रह उपलब्ध है. कम बारिश और घटते जलभंडार के बीच अगले मानसून तक पेयजल तथा सिंचाई की जरूरतें पूरी करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है.
राज्य में जलसंग्रह की विभागवार स्थिति पर नजर डालें तो छत्रपति संभाजीनगर विभाग सबसे पीछे है. यहां बांधों में केवल 43 प्रतिशत पानी उपलब्ध है. अमरावती विभाग में 61 प्रतिशत, नागपुर विभाग में 69 प्रतिशत, नाशिक विभाग में 80 प्रतिशत और कोंकण विभाग में 89 प्रतिशत जलसंग्रह दर्ज किया गया है. पिछले वर्ष की तुलना में सभी राजस्व विभागों में जलसंग्रह कम हुआ है.
* अप्पर वर्धा बांध पर बढ़ेगी दबाव की चुनौती
अमरावती जिले के लिए अप्पर वर्धा बांध का जलसंग्रह विशेष महत्व रखता है. जिले में कम बारिश के कारण बांध में उपलब्ध पानी का नियोजन पहले ही चिंता का विषय बना हुआ है. 13 अक्तूबर तक बांध में 306.10 दलघमी पानी उपलब्ध होने की जानकारी सामने आई है, जो इसकी कुल 564.05 दलघमी क्षमता का 54.27 प्रतिशत है. पिछले चार वर्षों में अक्तूबर तक बांध पूरी क्षमता से भरा रहता था, लेकिन इस बार स्थिति अलग है. ऐसे में अमरावती शहर की पेयजल आपूर्ति, ग्रामीण क्षेत्रों की जरूरतों और खेती की सिंचाई के लिए उपलब्ध पानी का सावधानीपूर्वक उपयोग करना जरूरी होगा. संभाग के समग्र जलसंग्रह का आंकड़ा 61 प्रतिशत होने के बावजूद अलग-अलग बांधों की स्थिति एक जैसी नहीं है. इसलिए जिले और तहसील स्तर पर उपलब्ध जलभंडार, पेयजल की अनुमानित मांग और सिंचाई की जरूरतों का स्वतंत्र आकलन करना आवश्यक है.
* बड़े बांधों में 80, मध्यम में 63 प्रतिशत पानी
राज्य के बड़े, मध्यम और लघु सिंचाई प्रकल्पों में भी पिछले वर्ष की तुलना में जलसंग्रह कम हुआ है. आंकड़े बताते हैं कि लघु प्रकल्पों में जलसंग्रह की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर है. इसका असर स्थानीय स्तर पर पेयजल उपलब्धता और कृषि सिंचाई पर पड़ सकता है. विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे बांधों, तालाबों और भूजल स्रोतों पर निर्भर आबादी के लिए आगामी महीनों में पानी की उपलब्धता पर नजर रखना जरूरी होगा.
* मुंबई-पुणे की स्थिति बेहतर, लेकिन राज्यव्यापी चिंता बरकरार
मुंबई और ठाणे महानगरपालिकाओं को पानी उपलब्ध कराने वाले छह प्रमुख बांधों में संयुक्त रूप से 95 प्रतिशत जलसंग्रह है. इन बांधों की कुल उपयोगी क्षमता 74.41 टीएमसी है, जिसमें फिलहाल 70.38 टीएमसी पानी उपलब्ध है. पिछले वर्ष इसी अवधि में इन बांधों में 99 प्रतिशत जलसंग्रह था. पुणे विभाग के बांधों में 83 प्रतिशत पानी उपलब्ध है, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 94 प्रतिशत था. यानी वहां भी 11 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. मुंबई और पुणे जैसे बड़े शहरी क्षेत्रों में जलसंग्रह की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर होने के बावजूद राज्य के अन्य हिस्सों में घटते जलभंडार को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
* गर्मियों से पहले जल नियोजन जरूरी
अमरावती संभाग में 61 प्रतिशत जलसंग्रह और अमरावती जिले के अप्पर वर्धा बांध में 54.27 प्रतिशत पानी उपलब्ध होने की स्थिति को देखते हुए जलसंपदा विभाग और जिला प्रशासन के सामने अगले मानसून तक जलापूर्ति बनाए रखने की चुनौती है. पेयजल को प्राथमिकता देते हुए सिंचाई तथा औद्योगिक उपयोग के लिए पानी के आवंटन की भी समीक्षा जरूरी है. प्रशासन को उपलब्ध जलसंग्रह, संभावित मांग और जलहानि का आकलन कर चरणबद्ध नियोजन करना चाहिए. साथ ही, जलस्रोतों के संरक्षण, भूजल के अनियंत्रित दोहन पर नियंत्रण और पानी की बचत के लिए अभी से प्रभावी कदम उठाने होंगे.
राज्य के कुल जलसंग्रह में 19 प्रतिशत की गिरावट और अमरावती संभाग में सीमित उपलब्धता का संकेत स्पष्ट है कि, इस बार गर्मियों की तैयारी सामान्य वर्षों की तरह नहीं की जा सकती. समय रहते नियोजन नहीं हुआ, तो आने वाले महीनों में ग्रामीण क्षेत्रों के साथ शहरी पेयजल आपूर्ति और कृषि सिंचाई पर भी दबाव बढ़ सकता है.

* राज्य के बांधों में जलसंग्रहण की स्थिती
प्रकल्पों का प्रकार              जारी वर्ष         पिछले वर्ष
बड़े प्रकल्प                           80%            98%
मध्यम प्रकल्प                       63%            82%
लघु प्रकल्प                          42%            64%

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