वर्ना हमें बैंक फोड़नी पडेगी, फिर मत कहना!
पूर्व मंत्री यशोमति ठाकुर कर्जमाफी में देरी पर भडकी

* बैंक अधिकारियों को फोन पर लगाई फटकार
* लंबित प्रकरण तत्काल निपटाने की मांग
अमरावती/दि.25– कर्जमाफी के लिए पात्र होने के बावजूद किसानों को बैंकों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं और उनकी फाइलें लंबे समय से लंबित हैं, इस मुद्दे पर पूर्व मंत्री यशोमती ठाकुर ने बैंक अधिकारियों को फोन पर जमकर फटकार लगाई. उन्होंने तीखे अंदाज में कहा कि, यदि ऐसे ही चलता रहा, तो हमें बैंक फोड़कर रकम हासिल करनी पडेगी. अगर ऐसा कुछ हुआ तो इसके बाद हमें कुछ मत कहना. साथ ही उन्होंने कर्जमाफी से जुड़े लंबित प्रकरणों का तत्काल निपटारा करने की मांग की.
पूर्व मंत्री यशोमती ठाकुर ने कहा कि कर्जमाफी घोषित होने के बावजूद पात्र किसानों की फाइलें करीब दो महीने से बैंक में लंबित पड़ी हैं. इसके कारण किसानों को कभी उनके कार्यालय तो कभी बैंक के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं. उन्होंने बैंक अधिकारियों से सवाल किया कि जब कर्जमाफी हो चुकी है तो कर्ज खाते बंद करने की प्रक्रिया अब तक पूरी क्यों नहीं की गई. बैंक अधिकारियों से बातचीत के दौरान एड. ठाकुर ने कर्जमाफी की प्रक्रिया में हो रही देरी पर नाराजगी जताई. उन्होंने सवाल किया कि यदि सरकार की ओर से निधि उपलब्ध नहीं हुई है तो किसानों को उनका लाभ कब मिलेगा? उन्होंने कहा कि यह केवल एक किसान का मामला नहीं है, बल्कि अनेक किसान इसी समस्या का सामना कर रहे हैं.
कांग्रेस की तेजतर्रार नेत्री व पूर्व मंत्री यशोमती ठाकुर ने कर्जमाफी की लाभार्थी सूचियों को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने पूछा कि पहली और दूसरी सूची किस आधार पर तैयार की जा रही है और पात्र किसानों को लाभ देने की प्रक्रिया में पारदर्शिता क्यों नहीं दिखाई दे रही है. उन्होंने बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा कर कर्जमाफी से संबंधित लंबित मामलों को तत्काल निपटाने की मांग की. साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसानों की ऐसी शिकायतें लगातार उनके पास आती रहीं तो उन्हें और आक्रामक रुख अपनाना पड़ेगा.
महाराष्ट्र सरकार की पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर शेतकरी कर्जमुक्ती योजना-2026 के तहत पात्र किसानों की दूसरी सूची भी जारी की जा चुकी है. इसमें 3 लाख 55 हजार 614 किसानों को शामिल किया गया है और लाभ के लिए आधार प्रमाणीकरण की प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया है. जिसे आधार बनाते हुए पूर्व मंत्री यशोमती ठाकुर ने सवाल उठाया कि कर्जमाफी की घोषणा और लाभार्थी सूची जारी होने के बाद भी यदि पात्र किसान बैंक के चक्कर लगाने को मजबूर हैं, तो योजना का वास्तविक लाभ उन तक कब पहुंचेगा. उन्होंने कर्जमाफी की प्रभावी अमलदारी, पात्र किसानों के कर्ज खातों के निपटारे और सातबारा अभिलेखों से कर्ज का बोझ हटाने की प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने की मांग की.





