डफरिन से 150 से ज्यादा नवजातों को एसएनसीयू की जरूरत, करना पड़ा रेफर
24 अगस्त की आग के बाद अब तक पूरी तरह शुरू नहीं हुई सेवा

फायर और इलेक्ट्रिकल ऑडिट का इंतजार, 12 निजी अस्पतालों में 127 बेड की व्यवस्था
अमरावती/दि.29 – जिला महिला अस्पताल में नवजात शिशुओं के लिए स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट की सुविधा अभी पूरी क्षमता से शुरू नहीं हो पाई है. इसके चलते गंभीर हालत में जन्म लेने वाले नवजातों को उपचार के लिए दूसरे अस्पतालों में रेफर करना पड़ रहा है. अस्पताल प्रशासन के अनुसार, पिछले महीने एसएनसीयू की आवश्यकता वाले 150 से अधिक नवजात शिशुओं को रेफर किया गया.
24 अगस्त को डफरिन अस्पताल के डछउण में आग लगने की घटना में तीन नवजात शिशुओं की मौत हो गई थी. इस घटना के बाद डछउण की सेवा बंद कर दी गई थी. नवजातों के उपचार के लिए अस्पताल के ग्राउंड फ्लोर स्थित रिकवरी रूम में नए एसएनसीयू की व्यवस्था शुरू की गई, लेकिन आवश्यक सुरक्षा जांच पूरी नहीं होने के कारण यह सुविधा अभी पूरी तरह कार्यरत नहीं हुई है.
* चार बेड की व्यवस्था, जरूरत इससे कहीं अधिक
फिलहाल डफरिन में चार बेड का एसएनसीयू चल रहा है, लेकिन गंभीर नवजातों की संख्या इसकी क्षमता से अधिक है. सांस लेने में परेशानी, कम जन्म वजन, संक्रमण, समय से पहले जन्म या जन्म के बाद अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं वाले बच्चों को तत्काल विशेष निगरानी और उपचार की जरूरत होती है. ऐसे मामलों में समय पर उपचार बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. पर्याप्त एसएनसीयू क्षमता उपलब्ध नहीं होने के कारण इन बच्चों को दूसरे अस्पतालों में भेजना पड़ रहा है.
* फायर और इलेक्ट्रिकल ऑडिट के बाद ही पूरी सेवा
अस्पताल में नए एसएनसीयू के लिए आवश्यक चिकित्सा उपकरण लगाए जाने की जानकारी है. हालांकि, चिकित्सकों और अस्पताल प्रशासन ने नवजातों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए फायर और इलेक्ट्रिकल ऑडिट पूरा होने के बाद ही नई यूनिट को पूरी तरह शुरू करने का निर्णय लिया है. आग की पिछली घटना को देखते हुए सुरक्षा मानकों की जांच पूरी किए बिना यूनिट शुरू करने से प्रशासन बच रहा है.
* 12 निजी अस्पतालों में 127 बेड की व्यवस्था
डफरिन में आग की घटना के बाद जिला प्रशासन ने आपदा प्रबंधन के तहत एसएनसीयू की जरूरत वाले नवजातों के लिए जिले के 12 निजी अस्पतालों में करीब 127 बेड उपलब्ध कराए हैं. स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, डफरिन और अन्य सरकारी अस्पतालों से इन निजी अस्पतालों में रेफर किए जाने वाले नवजातों का आयुष्मान भारत योजना और मुख्यमंत्री राहत कोष के माध्यम से नि:शुल्क उपचार कराया जा रहा है.
* आग की घटना के बाद भी चुनौती बरकरार
24 अगस्त की आग के बाद डफरिन में नवजातों की सुरक्षा और उपचार व्यवस्था को लेकर प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हुई थी. अब नए एसएनसीयू की व्यवस्था तो तैयार कर ली गई है, लेकिन सुरक्षा ऑडिट के कारण पूरी सेवा शुरू नहीं हो सकी है. एक ओर रोजाना गंभीर नवजातों को एसएनसीयू की आवश्यकता पड़ रही है, तो दूसरी ओर डफरिन की अपनी सुविधा पूरी क्षमता से शुरू होने का इंतजार है. ऐसे में 150 से अधिक नवजातों का रेफरल अस्पताल की वर्तमान व्यवस्था पर दबाव और जरूरत, दोनों को सामने रखता है.





