पी. गोपीनाथ रेड्डी कंपनी को मिल सकता है अमरावती मनपा का सफाई ठेका!
हाईकोर्ट ने कोणार्क कंपनी के साथ हुआ करार किया रद्द

* कोणार्क कंपनी को निविदा के लिए बताया अपात्र
* रेड्डी के निविदा प्रस्ताव पर तीन सप्ताह में फैसला लेने का निर्देश
* किसी कारण रेड्डी कंपनी को काम नहीं मिलने पर नए सिरे से निकलेगी निविदा
* नई व्यवस्था होने तक कोणार्क के जरीए ही जारी रहेगा कचरा संकलन व ढुलाई का काम
अमरावती/नागपुर/दि.8 – अमरावती महानगरपालिका के बहुचर्चित सफाई ठेके को लेकर चल रहे विवाद में अब बड़ा कानूनी मोड़ सामने आया है. जिसके चलते मनपा की सफाई ठेका निविदा प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धी के तौर पर शामिल रही पी. गोपीनाथ रेड्डी कंपनी को अमरावती शहर का सफाई एवं कचरा परिवहन ठेका मिलने की संभावना बन गई है. मुंबई हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने 8 अक्टूबर 2025 को जारी कचरा संकलन एवं परिवहन की निविदा प्रक्रिया से संबंधित याचिका पर फैसला सुनाते हुए कोणार्क कंपनी के साथ महानगरपालिका द्वारा किया गया करार रद्द कर दिया है. अदालत ने कोणार्क सहित निविदा प्रक्रिया में शामिल दो पक्षों को पात्र नहीं माना है.
न्यायमूर्ति अनिल एस. किलोर और न्यायमूर्ति रजनीश आर. व्यास की खंडपीठ ने पी. गोपीनाथ रेड्डी की रिट याचिका मंजूर करते हुए मनपा को उसकी निविदा पर नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया है. अदालत ने कहा है कि यदि रेड्डी कंपनी निविदा की शर्तों के अनुसार पात्र है और उसे ठेका देने में कोई कानूनी बाधा नहीं है, तो मनपा इस संबंध में निर्णय ले. यह निर्णय हाईकोर्ट के आदेश की प्रति मिलने की तारीख से तीन सप्ताह के भीतर लेना होगा. हालांकि, अदालत के आदेश के चलते शहर की सफाई व्यवस्था को तत्काल प्रभावित नहीं होने दिया गया है. नई व्यवस्था अथवा नए ठेकेदार का निर्णय होने तक कोणार्क कंपनी के माध्यम से ही कचरा संकलन एवं उसकी ढुलाई का काम जारी रहेगा.
* ऑपरेटिव ऑर्डर आया सामने, विस्तृत आदेश का इंतजार
हाईकोर्ट के फैसले का ऑपरेटिव ऑर्डर सामने आ गया है, जिससे कोणार्क के साथ किए गए करार को रद्द किए जाने और पी. गोपीनाथ रेड्डी की निविदा पर विचार किए जाने की स्थिति स्पष्ट हुई है. हालांकि, आदेश की विस्तृत प्रतिलिपि उपलब्ध होने के बाद ही अदालत ने किन आधारों पर दोनों पक्षों को अपात्र माना और निविदा प्रक्रिया के संबंध में कौन-कौन से विस्तृत निर्देश दिए हैं, इसकी पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी. इसी वजह से मनपा प्रशासन भी अब हाईकोर्ट के विस्तृत आदेश की प्रतीक्षा कर रहा है. आदेश का अध्ययन करने के बाद ही आगे की प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई तय होने की संभावना है.
* कोणार्क को ठेका देने के फैसले पर रेड्डी ने उठाई थी आपत्ति
ज्ञात रहे कि, अमरावती मनपा के सफाई ठेके के लिए जारी निविदा में पी. गोपीनाथ रेड्डी कंपनी और कोणार्क कंपनी दोनों प्रतिस्पर्धी बोलीदाता थे. निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद मनपा ने कोणार्क कंपनी को ठेका देने का निर्णय लिया था. इसी निर्णय को पी. गोपीनाथ रेड्डी कंपनी ने चुनौती दी और अपनी पात्रता तथा निविदा प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर नागपुर खंडपीठ में रिट पिटीशन दायर की. अब हाईकोर्ट के फैसले से कोणार्क के पक्ष में हुआ करार रद्द हो गया है और रेड्डी कंपनी की निविदा को फिर से विचार के दायरे में लाया गया है.
* रेड्डी को काम नहीं मिला, तो फिर से निकलेगी निविदा
हाईकोर्ट के आदेश में एक महत्वपूर्ण स्थिति यह भी है कि रेड्डी कंपनी को स्वत: ठेका मिलने का आदेश नहीं दिया गया है. मनपा को पहले उसकी निविदा की पात्रता और अन्य कानूनी पहलुओं की जांच करनी होगी. यदि जांच में रेड्डी कंपनी निविदा की सभी शर्तें पूरी करती पाई जाती है और उसके पक्ष में ठेका देने में कोई कानूनी अड़चन नहीं रहती, तो मनपा को उसके पक्ष में निर्णय लेना होगा. लेकिन यदि किसी कारणवश रेड्डी कंपनी को ठेका देना संभव नहीं होता, तो नई निविदा प्रक्रिया शुरू करनी पड़ सकती है. इस स्थिति में तब तक शहर की सफाई और कचरा परिवहन व्यवस्था को बनाए रखने के लिए कोणार्क के माध्यम से वर्तमान कामकाज जारी रहने की व्यवस्था रहेगी.
* सात साल के ठेके को लेकर शुरू से रहा विवाद
बता दे कि, अमरावती शहर की सफाई, घर-घर कचरा संकलन और कचरा परिवहन से जुड़ा कोणार्क का ठेका शुरुआत से ही विवादों में रहा है. यह पूरी निविदा प्रक्रिया अक्टूबर 2025 में शुरू हुई थी. 8 अक्टूबर 2025 को मनपा ने कचरा संकलन एवं परिवहन के लिए निविदा जारी की थी. निविदा में पी. गोपीनाथ रेड्डी सहित कई कंपनियों ने भाग लिया था. बाद में कोणार्क कंपनी के पक्ष में प्रक्रिया आगे बढ़ी और 28 नवंबर 2025 को मनपा तथा कोणार्क के बीच करार किया गया. यही करार अब हाईकोर्ट के आदेश से रद्द हो गया है.
* आमसभाओं में भी उठा था कोणार्क का मुद्दा
कोणार्क को सफाई ठेका दिए जाने के बाद यह मुद्दा मनपा की विभिन्न आमसभाओं और समितियों की बैठकों में भी लगातार उठता रहा. पार्षदों की ओर से ठेके की शर्तों, कामकाज की गुणवत्ता, वाहनों और कर्मचारियों की उपलब्धता तथा कचरा संकलन की व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए जाते रहे. विशेष रूप से स्वच्छता अभ्यास गट द्वारा भी कोणार्क के साथ किए गए ठेका करार का अध्ययन कर आपत्तियां उठाए जाने की बात सामने आई थी. समिति में शामिल पार्षदों ने निविदा की मूल शर्तों और अंतिम करार के बीच कथित अंतर का मुद्दा उठाया था तथा जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की थी.
* कामकाज को लेकर भी लगते रहे आरोप
कोणार्क के कामकाज को लेकर शहर में समय-समय पर शिकायतें सामने आती रही हैं. कचरा उठाने वाले वाहनों की उपलब्धता, कर्मचारियों की संख्या, नियमित सफाई तथा कचरा संकलन व्यवस्था को लेकर पार्षदों और नागरिकों की ओर से सवाल उठाए गए. मनपा प्रशासन की ओर से ठेका शर्तों के उल्लंघन को लेकर कंपनी पर दंडात्मक कार्रवाई किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी. इसी बीच ठेके की प्रक्रिया और कंपनी के कामकाज को लेकर जांच की मांग ने विवाद को और गहरा कर दिया था.
* पार्ट-ए और पार्ट-बी को लेकर भी रहा घमासान
सबसे उल्लेखनीय यह है कि, मनपा के इस बड़े सफाई ठेके को लेकर पार्ट-ए और पार्ट-बी के स्तर पर भी विवाद सामने आया. कचरा परिवहन से संबंधित काम पहले शुरू हो गया था, जबकि घर-घर कचरा संकलन एवं संबंधित सफाई कार्यों को लेकर मनपा की समितियों में लंबे समय तक चर्चा और आपत्तियां चलती रहीं. स्थायी समिति की बैठकों में भी कोणार्क के कामकाज, वाहनों, मनुष्यबल, निगरानी व्यवस्था, जीपीएस, सीसीटीवी तथा अन्य ठेका शर्तों के अनुपालन को लेकर सवाल उठाए गए थे.
* जांच और राजनीतिक विरोध ने भी बढ़ाई थी मुश्किलें
कोणार्क के ठेके को लेकर निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की ओर से लगातार सवाल उठाए जाने के बीच मामले की जांच की मांग भी तेज हुई. विधायक स्तर पर शिकायतों और विभागीय जांच की प्रक्रिया शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई थी. इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच तथा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठती रही. ऐसे माहौल में पी. गोपीनाथ रेड्डी कंपनी की हाईकोर्ट याचिका पर आया फैसला मनपा के सफाई ठेके के पूरे घटनाक्रम को एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर ले आया है.
* अब मनपा के अगले कदम पर नजर
हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण भूमिका अमरावती मनपा प्रशासन की होगी. मनपा को तीन सप्ताह के भीतर पी. गोपीनाथ रेड्डी की निविदा पर निर्णय लेना है. इसके लिए निविदा की पात्रता, शर्तों और अदालत के विस्तृत आदेश का अध्ययन किया जाएगा. साथ ही मनपा के पास आदेश के विस्तृत कानूनी परीक्षण के बाद अन्य कानूनी विकल्पों पर विचार करने की संभावना भी बनी हुई है. इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि अगला सफाई ठेका निश्चित रूप से रेड्डी कंपनी को ही मिलेगा. फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश ने इतना जरूर स्पष्ट कर दिया है कि कोणार्क के साथ 28 नवंबर 2025 को हुआ करार कायम नहीं रहेगा और रेड्डी कंपनी की निविदा पर मनपा को अब नए सिरे से निर्णय लेना होगा. शहरवासियों के लिए राहत की बात यह है कि नई व्यवस्था लागू होने तक कचरा संकलन और ढुलाई का काम बाधित नहीं होगा. लेकिन आने वाले तीन सप्ताह में मनपा कौन-सा फैसला लेती है, रेड्डी को ठेका, नई निविदा या कोई अन्य कानूनी रास्ता. इस पर अब पूरे शहर की निगाहें टिकी हैं.





