श्री शिवाजी महाविद्यालय में उत्साहपूर्वक मनाया गया वाचन प्रेरणा दिवस
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती पर विद्यार्थियों को नियमित पुस्तकें पढ़ने के लिए किया प्रेरित

अमरावती/दि.16 – श्री शिवाजी कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय के मराठी विभाग की ओर से भारतरत्न, देश के पूर्व राष्ट्रपति एवं महान वैज्ञानिक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती के अवसर पर वाचन प्रेरणा दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया. विद्यार्थियों में पढ़ने की रुचि विकसित करने, साहित्य के प्रति अभिरुचि बढ़ाने तथा पुस्तकों के माध्यम से उनके विचारों के दायरे का विस्तार करने के उद्देश्य से इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया.
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. महेंद्र मेटे ने की. राष्ट्रीय सेवा योजना विभाग के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. प्रशांत हरमकर प्रमुख वक्ता के रूप में उपस्थित थे. इस अवसर पर हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज जोशी, मराठी विभागाध्यक्ष डॉ. सुवर्णा गाडगे तथा डॉ. राजेश मिरगे की प्रमुख उपस्थिति रही. कार्यक्रम की प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए मराठी विभागाध्यक्ष डॉ. सुवर्णा गाडगे ने वाचन प्रेरणा दिवस के महत्व को स्पष्ट किया. प्रमुख वक्ता डॉ. प्रशांत हरमकर ने अपने संबोधन में डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के प्रेरणादायी जीवन पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि सामान्य परिस्थितियों से निकलकर शिक्षा, कठोर परिश्रम, दृढ़ संकल्प और ज्ञान के बल पर सर्वोच्च स्थान तक पहुंचने वाले डॉ. कलाम का जीवन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत है. विद्यार्थियों को उनके जीवन से प्रेरणा लेकर अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए. इस अवसर पर हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज जोशी ने चुनिंदा कविताओं का प्रेरणादायी वाचन किया. अध्यक्षीय संबोधन में प्राचार्य डॉ. महेंद्र मेटे ने डॉ. कलाम की आत्मकथा ‘अग्निपंख’ का उल्लेख करते हुए कहा कि पुस्तकें मनुष्य की विश्वसनीय मित्र होती हैं और वाचन जीवनभर चलने वाली ज्ञान-साधना है. विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम की पुस्तकों तक सीमित न रहते हुए जीवनियां, आत्मकथाएं, कहानियां, उपन्यास, कविताएं, वैचारिक साहित्य तथा ऐतिहासिक ग्रंथों का भी नियमित अध्ययन करना चाहिए. उन्होंने डॉ. कलाम जैसे महान व्यक्तित्वों के जीवन का अध्ययन कर उनके विचारों में निहित सकारात्मकता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और देशसेवा की भावना को आत्मसात करने का आह्वान किया.
* ‘पुस्तकालय से परिचय’ उपक्रम बना आकर्षण
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण आकर्षण विद्यार्थियों के लिए आयोजित ‘ओळख ग्रंथालयाची’ यानी ‘पुस्तकालय से परिचय’ उपक्रम रहा. इसके माध्यम से विद्यार्थियों को महाविद्यालय के पुस्तकालय, वहां उपलब्ध पुस्तकों तथा अध्ययन के लिए उपयोगी विभिन्न संदर्भ ग्रंथों की जानकारी दी गई. इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को पुस्तकालय की सुविधाओं से परिचित कराना और उन्हें नियमित रूप से पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना था. कार्यक्रम के दौरान चुनिंदा विद्यार्थियों ने अपने विचार व्यक्त करते हुए वाचन के महत्व, पुस्तकों से मिलने वाली प्रेरणा तथा पढ़ने से हुए वैचारिक विकास के बारे में अपने अनुभव साझा किए. विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी से कार्यक्रम को अच्छा प्रतिसाद मिला. कार्यक्रम के प्रारंभ में डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई. मराठी विभाग की ओर से उपस्थित अतिथियों का स्वागत किया गया. कार्यक्रम का संचालन प्रा. अमृता राऊत ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन प्रा. प्रीति पायघन ने किया. इस अवसर पर महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के प्राध्यापक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे.





