मनपा के जीएसटी रिटर्न में हुई 13 करोड की कटौती
दो माह के लिए 36.24 करोड रुपयों का अनुदान मिलना था अपेक्षित

* सरकार से मिलेगी केवल 23.27 करोड रुपयो की निधि
* पहले ही आर्थिक दुष्चक्र में फंसी मनपा के लिए अब और भी दिक्कते
* कर्मचारियों का वेतन अदा करने के भी वांदे, तिजोरी पहले ही पडी है खाली
अमरावती/दि.15- अमरावती महानगरपालिका की आर्थिक स्थिति पहले ही डांवाडोल है. क्योंकि आय का एकमात्र प्रमुख स्त्रोत रहनेवाले संपत्तीकर की किसी भी वर्ष अपेक्षीत व पर्याप्त वसूली नहीं हो पाती. जिसके चलते मनपा प्रशासन को राज्य सरकार की ओर से जिसटी रिटर्न के रूप में मिलनेवाले अनुदान व निधि पर निर्भर रहना पडता हैं. खास बात यह है कि इसमें भी शुरू से ‘गड्ढा’ बना हुआ है. क्योंकि मनपा प्रशासन के हिसाब से अमरावती महानगरपालिका को राज्य सरकार द्बारा प्रतिमाह 47 करोड रुपए दिए जाने चाहिए. परंतु हकिकत में राज्य सरकार द्बारा अमरावती महानगरपालिका को प्रतिमाह 16 करोड रुपए का अनुदान भी जीएसटी रिटर्न के तौर पर दिया जाता हैं और अब ‘दुबले पर दो आषाढ’ वाली स्थिति यह है कि विगत अप्रैल व जारी मई माह ऐसे दो माह के लिए राज्य सरकार की ओर से जीएसटी रिटर्न के तौर पर मंजूर की गई 36 करोड 24 लाख रुपयों की निधि में से अमरावती मनपा क्षेत्र अंतर्गत ठेका पध्दति से किए गए मुलभूत सुविधावाले कामों पर खर्च हुए 12 करोड 97 लाख 22 हजार 842 रुपए यानी लगभग 13 करोड रुपए की राज्य सरकार द्बारा अपने स्तर पर ही कटौती कर ली गई है और अब अमरावती महानगरपालिका को दो माह के जीएसटी रिटर्न के तौर पर 23 करोड 26 लाख 77 हजार 158 रुपए की निधि ही प्राप्त होगी. जिसके चलते पहले ही आर्थिक दिक्कतो से घिरी अमरावती महानगरपालिका के लिए अब आर्थिक मोर्चे पर और भी अधिक मुसिबते पैदा होनेवाली है. क्योंकि मनपा प्रशासन के लिए अपनी आस्थापना पर रहनेवाले कर्मचारियों का वेतन अदा करने के साथ ही विभिन्न बकाया देयकों का भुगतान करना मुश्किलभरा काम साबित हो सकता हैं.
बता दें कि किसी समय संपत्ती कर के साथ-साथ अमरावती महानगरपालिका की आय का प्रमुख स्त्रोत जकात यानी चुंगी कर हुआ करता था. जिसके बाद स्थानीय संस्था उपकर (एलबीटी) तथा वैट जैसे कर वसूले जाने लगे. जिनकी जीएसटी की व्यवस्था के आते ही बिदाई हो गई. चुंकि जीएसटी की वसुली राज्य एवं केंद्र सरकार द्बारा की जाती हैं. जिसकी एवज में स्थानीय स्वायत्त निकायों को मुआवजे के तौर पर एक तरह से अनुदान निधि दी जाती है. जिसे जीएसटी रिटर्न कहा जाता हैं. जिसके लिए बाकायदा एक फार्म्युला तय किया गया है. जिसके आधार अमरावती महानगरपालिका के लिए सरकार द्बारा प्रति माह 16 करोड रुपए के जीएसटी रिटर्न की अनुदान राशि तय की गई हैं. जिसमें प्रतिवर्ष कुछ प्रतिशत इजाफा होता हैं. हालांकि मनपा प्रशासन का दावा है कि चुंगीकर के बाद एलबीटी व वैट को लागू करने के समय से ही गणित में कुछ चुक हो गई थी. जिसे दुरूस्त करते हुए अमरावती मनपा को प्रतिमाह 47 करोड रुपए का जीएसटी रिटर्न मिलना चाहिए. जिसकी बजाय इस समय प्रति माह करीब 31 करोड रुपए का कम रिटर्न मिल रहा है. अभी जीएसटी रिटर्न की रकम को लेकर मनपा और सरकार के बीच माथापच्ची चल ही रही हैं कि सरकार द्बारा अमरावती मनपा क्षेत्र में सक्शन व जेटींग मशीन जैसी स्वच्छता यंत्र सामग्री के संचालन पर हुए खर्च की एवज में 7 लाख 65 हजार 216 रुपए तथा स्ट्रीट लाईट प्रकल्प के बकाया भुगतान की एवज में 12 करोड 89 लाख 57 हजार 626 रुपए ऐसे कुल 12 करोड 97 लाख 22 हजार 842 रुपए की कटौती जीएसटी रिटर्न की अनुदान निधि कर ली गई. जिसके चलते इस कटौती के बाद अब अमरावती मनपा को दो माह के जीएसटी रिटर्न के तौर पर 23 करोड 26 लाख 77 हजार 158 रुपए ही प्राप्त होंगे.
इस संदर्भ में दैनिक अमरावती मंडल द्बारा की गई पडताल व पूछताछ के बाद मनपा सूत्रों के जरिए पता चला कि केंद्र सरकार द्बारा वर्ष 2015-16 में चलाए गए विद्युत उर्जा बचत अभियान के तहत उस वक्त सभी स्ट्रीट लाईट पर लगे पिले व केसरी रंग वाले बल्बो को बदलकर उनके स्थान पर दुधिया रोशनी देनेवाले एलईडी बल्ब लगाए गए थे. जिसका ठेका ईईएसएल कंपनी को दिया गया था. खात बात यह थी कि उस वक्त अस्तित्व में रहनेवाले स्ट्रीट पोल पर बल्ब बदलने के साथ-साथ ईईएसएल कंपनी को निकाय क्षेत्रों के लगातार होते विकास व विस्तार को ध्यान में रखते हुए नए स्ट्रीटलाईट पोल लगाने का भी जिम्मा सौंपा गया था, खास बात यह थी कि इस काम की एवज में अमरावती मनपा अथवा सरकार द्बारा ईईएसएल कंपनी को तुरंत कोई भुगतान नहीं किया जाना था. बल्कि स्ट्रीट लाईट पोल पर लगे पुराने बल्बो को बदलकर बिजली की कम खपत वाले नए एलईडी बल्ब लगाने के बाद विद्युत बिलो की रकम में जितने रुपए की बचत होनेवाली थी, उतने रुपयो का भुगतान ईईएसएल कंपनी को किया जाना था. जिसका एक अनुमानित मूल्य उसी समय तय कर लिया गया था.
जानकारी के मुताबिक ईईएसएल कंपनी के साथ सरकार का करार सन 2022 तक ही था. जिसके चलते कंपनी ने सन 2022 तक पुराने स्ट्रीटपोल के बल्ब बदलने के साथ-साथ तत्कालीन मनपा पार्षदों द्बारा उनके प्रभागो में सुझाए गए स्थानों पर भी नए स्ट्रीट पोल लगा दिए. चूंकि पूरे शहर में अपेक्षा एंव निर्धारित से अधिक स्ट्रीट लाईट लगाए गए. इसके चलते स्ट्रीट लाईट पर खर्च होनेवाली बिजली और विद्युत बिल की रकम में कोई खास बचत नहीं हुई. जिसकी वजह से सन 2022 में कंपनी का ठेका करार खत्म होते समय अमरावती मनपा की ओर उक्त कंपनी का 12.79 करोड रुपयों का भुगतान बकाया था. इसके लिए कंपनी द्बारा बार-बार राज्य सरकार से संपर्क करते हुए तगादा लगाया जा रहा था, ऐसे में कंपनी को उक्त रकम का भुगतान अदा करने का निर्णय लेते हुए राज्य सरकार ने वह रकम अमरावती महानगरपालिका दी जानेवाली जीएसटी रिटर्न की रकम में से काट लिए.
मनपा सूत्रों ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया है कि इस संदर्भ में राज्य सरकार के नगर विकास विभाग द्बारा विगत 12 मई को ही एक शासनादेश जारी किया गया. जिसमें अमरावती महानगरपालिका सहित राज्य की कुल 15 महानगरपालिकाओं को दी जानेवाली जीएसटी रिटर्न की रकम में से ईईएसएल कंपनी को दिए जानेवाले भुगतान की रकम की कटौती की गई हैं. जिसके तहत चंद्रपुर मनपा के 5.39 करोड रुपए, अकोला मनपा के 1.42 करोड रुपए, परभणी मनपा के 3.65 करोड रुपए, लातुर मनपा के 2.78 करोड रुपए, जलगांव मनपा के 3.32 करोड रुपए, पुणे मनपा के 93.92 लाख रुपए, पिंपरी चिंचवड मनपा के 7.31 करोड रुपए, कोल्हापुर मनपा के 3.10 करोड रुपए, सोलापुर मनपा के 3.10 करोड रुपए, भिवंडी निजामपुर मनपा के 3.57 करोड रुपए, पनवेल मनपा के 62.76 लाख रुपए, जालना मनपा के 1.17 करोड रुपए, इचलकरंजी मनपा के 1.22 करोड रुपए तथा बृहन्मुंबई मनपा के 51.42 लाख रुपए की कटौती राज्य सरकार द्बारा जीएसटी रिटर्न की रकम में से की गई हैं.

* हमने अपना विरोध दर्ज कराया, मुंबई भी जाएंगे, शहर का नुकसान नहीं होने देंगे
इस संदर्भ में जानकारी एवं प्रतिक्रिया हेतु संपर्क किए जाने पर महापौर श्रीचंद तेजवानी तथा मनपा के सभागृह नेता चेतन गावंडे ने बताया कि राज्य सरकार द्बारा जीएसटी रिटर्न की रकम में कटौती किए जाने के फैसले को लेकर उन्होंने सरकार के समक्ष अपना विरोध दर्ज कराया है. साथ ही मनपा की खस्ताहाल आर्थिक स्थिति को देखते हुए पत्र भेजकर जीएसटी रिटर्न की रकम में परस्पर व एकमुश्त कोई कटौती नहीं करने की बात कहीं हैं. इसी विषय को लेकर जल्द ही मुंबई का दौरा भी किया जाएगा. इसके साथ ही अमरावती मनपा में सत्ता पक्ष से जुडे दोनों पदाधिकारियों ने यह भी कहा कि अमरावती महानगरपालिका का किसी भी सुरत में नुकसान नहीं होने दिया जाएगा. अत: अमरावतीवासियों ने शहर में मुलभूत सुविधाओं एवं विकास कामों को लेकर निश्चित रहना चाहिए.





