अजगर और बाज के लिए वसा संस्था के रेस्क्यू ऑपरेशन

50 फीट उंचाई पर नायलोन मांजे में फंसा था बाज

* 60 फीट गहरे कुएं से बचाई अजगर की जान
अमरावती/दि.19– ‘वसा’ की एनिमल रेस्क्यू हॉटलाइन पर चांदूरी गांव से गौरव ठाकरे का दूसरा कॉल आया. उन्होंने जानकारी दी किस्थानीय श्री गोरक्षण वेटरनरी हॉस्पिटल और वसा एनिमल रेस्क्यू सेंटर की रेस्क्यू टीम ने एक ही दिन में दो बेहद कठिन और रोमांचक रेस्क्यू ऑपरेशन्स को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है. टीम ने एक तरफ जमीन से 50 फीट की ऊंचाई पर नायलॉन मांझे में फंसी एक चील को जीवनदान दिया, तो दूसरी तरफ जमीन से 60 फीट गहरे कुएं में गिरे एक अजगर को सुरक्षित बाहर निकाला. ‘एरियल’ और ‘डेप्थ’, दोनों ही तरह की कठिन परिस्थितियों में किए गए इस शानदार काम की वजह से दोनों बेजुबान जीवों की जान बच सकी है.

* नमूना गली की घटना
50 फीट ऊंचे पेड़ पर मधुमक्खी के छत्ते के पास बची बाज की जानकल सुबह ‘वसा’ संस्था की एनिमल रेस्क्यू हेल्पलाइन पर नमूना गली नंबर 1 के निवासी कृष्णा भेरडे का फोन आया. उन्होंने जानकारी दी कि उनके घर के पास ‘महारुख’ के पेड़ पर सुबह से एक चील नायलॉन मांझे में फंसी हुई है. जानकारी मिलते ही श्री गोरक्षण वेटरनरी हॉस्पिटल और वसा एनिमल रेस्क्यू सेंटर की टेक्निकल रेस्क्यू टीम तुरंत घटनास्थल के लिए रवाना हुई. पेड़ बेहद ऊंचा और कमजोर था, साथ ही जिस टहनी पर बाज फंसा था. उसके बिल्कुल पास वाली टहनी पर जहरीली मधुमक्खियों का बड़ा छत्ता था. सुबह का समय होने के कारण धूप कम थी, जिससे मधुमक्खियों से खतरा कम था, लेकिन पेड़ के कमजोर होने की वजह से रेस्क्यूअर्स की जान को बड़ा खतरा बना हुआ था. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दमकल विभाग को बुलाया गया. दमकल विभाग के जवानों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर लैडर (सीढ़ी) की व्यवस्था की. इसके बाद वसा संस्था के एनिमल रेस्क्यूअर सिद्धांत मते ने क्लाइंबिंग किट पहनकर बेहद हिम्मत के साथ पेड़ पर चढ़ना शुरू किया. अपने जान की परवाह न करते हुए और मधुमक्खियों के खतरे को मोल लेकर, उन्होंने करीब डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद उस चील को नायलॉन मांझे से सफलतापूर्वक छुड़ा लिया.
इस मुहिम में वसा संस्था के सहायक पशुचिकित्सक गणेश अकर्ते, राजेश्वर वंजारे, दीपक लकरा, शुभमनाथ सायंके, प्रज्वल माकडे और दमकल विभाग के जवानों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इस रोमांचक रेस्क्यू को देखने के लिए स्थानीय नागरिकों की भारी भीड़ जमा हो गई थी. सुरक्षित निकालने के बाद इस चील को वडाली वन परिक्षेत्र कार्यालय को सौंप दिया गया.

* चांदूरी के गहरे कुएं से अजगर रेस्क्यू खेत के 60 फीट गहरे कुएं में एक बड़ा अजगर गिर गया है. कई प्रयासों के बाद भी अजगर ऊपर नहीं आ पा रहा था. वसा टीम ने बिना समय गंवाए चांदूरी पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया. कुआं 60 फीट गहरा था, जिसमें पानी भरा हुआ था और अजगर पानी के किनारे एक दरार की ओट में बैठा था. टीम ने तुरंत वहां ‘डीप रेस्क्यू’ का सेटअप लगाया. रेस्क्यूअर सिद्धांत मते ने ’रैपल डाउन’ करते हुए कुएं में प्रवेश किया. उन्होंने बेहद कुशलता से अजगर का रेस्क्यू किया और नेट की मदद से उसे कुएं से बाहर सुरक्षित भेजा. इसके बाद वे खुद भी सुरक्षित बाहर आ गए. इस अजगर को वन अधिकारियों के मार्गदर्शन में जंगल में प्राकृतिक आवास में सुरक्षित छोड़ दिया गया.एक ही दिन में जमीन से 50 फीट ऊपर और 60 फीट नीचे जाकर रेस्क्यू करना मेरे लिए बेहद रोमांचक और चुनौतीपूर्ण अनुभव था.

* टीम पर गर्व
– अलग-अलग कठिन परिस्थितियों में काम करके हम चील और अजगर, इन दोनों जीवों की जान बचा सके, इस पर पूरी वसा टीम को गर्व है.
– सिद्धांत मते, एनिमल रेस्क्यूअर, टीम वसा, अमरावती.

* जान जोखिम में डालकर
हम हर हफ्ते 3 से 5 ऐसे टेक्निकल रेस्क्यू ऑपरेशन्स करते हैं. लेकिन हमारे पास पर्याप्त आधुनिक रेस्क्यू इक्विपमेंट्स (उपकरण) नहीं हैं. साधनों की कमी के कारण, उपलब्ध सामग्रियों का उपयोग करके रेस्क्यूअर्स को अपनी जान जोखिम में डालकर काम करना पड़ता है. ये टेक्निकल इक्विपमेंट्स बहुत महंगे हैं. अगर दानवीर दाताओं ने इस काम के लिए मदद की, तो इक्विपमेंट्स का यह सेट पूरा हो सकेगा और जानवरों के साथ-साथ रेस्क्यूअर्स की जान भी अधिक सुरक्षित हो जाएगी.
– गणेश अकर्ते, सहायक पशुचिकित्सक, वसा संस्था, अमरावती.

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