भाजपा विरोधियों को सम्मान
मोदी-शाह से सीधे संपर्क में शिंदे

* सत्ताधारी होते हुए भी विपक्ष जैसी भूमिका
मुंबई/दि.26 – राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की जानकारी सामने आई है. एकनाथ शिंदे ने रविवार को दिल्ली जाकर गुप्त रूप से अमित शाह से मुलाकात की. अमित शाह और एकनाथ शिंदे की मुलाकात के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में फिर से महायुति के भीतर प्रतिस्पर्धा की चर्चा शुरू हो गई है. साथ ही एकनाथ शिंदे की हाल की राजनीति को देखने पर कुछ बातें स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं. सत्ता में रहते हुए विपक्ष की जगह लेना, भाजपा विरोधियों को पार्टी में प्रवेश देना और शिवसेना का विस्तार-ये शिंदे के नए राजनीतिक पैटर्न की विशेषताएं हैं.
* शिंदे की राजनीति का नया पैटर्न
एकनाथ शिंदे की शिवसेना सत्ता में रहते हुए भी विपक्ष की भूमिका निभाने की कोशिश कर रही है. शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के नेता समय-समय पर राज्य और केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना करने से पीछे नहीं हटते. इसी का एक हिस्सा के रूप में मंत्री योगेश कदम ने पुणे के एक कार्यक्रम में एमपीएससी छात्रों के सामने कॉकरोच पार्टी का समर्थन किया था. राज्य में भाजपा विरोधी राजनीति के लिए पहचाने जाने वाले नेताओं को शिंदे की शिवसेना में प्रवेश के लिए अवसर दिए जा रहे हैं. पूर्व विधायक रवींद्र धंगेकर और बच्चू कडू इसके प्रमुख उदाहरण हैं. पार्टी विस्तार की नीति के कारण कांग्रेस, शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस और उद्धव ठाकरे की शिवसेना जैसे विपक्षी दलों के कई नेता एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो रहे हैं.
इससे विपक्ष कमजोर होता दिखाई दे रहा है, लेकिन शिंदे की यह रणनीति भविष्य में भाजपा और उनके बीच संघर्ष को और तेज कर सकती है. 2014 में सत्ता में शामिल उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने भी ऐसी ही विपक्ष की भूमिका निभाने की कोशिश की थी, जिसका परिणाम 2019 में दोनों पार्टियों की गठबंधन टूटने के रूप में सामने आया था. सत्ता का लाभ लेने के लिए भाजपा के कई विरोधी फिलहाल शिंदे की पार्टी में शामिल हो रहे हैं, लेकिन चुनाव के समय ये नेता क्या करेंगे, यह कहना मुश्किल है. यदि ये नेता चुनाव के समय अपने मूल दल में लौटते हैं, तो यह भाजपा के लिए चुनौती बन सकता है.





