डफरिन में डिलीवरी का बढ़ता बोझ, नवजातों को ‘रेफर’ का सहारा

डेढ़ महीने में 797 प्रसव, 413 हाई-रिस्क माताएं

एनआईसीयू की सीमित क्षमता के चलते 170 नवजातों को दूसरे अस्पताल भेजा गया
अमरावती /दि.5– जिला महिला अस्पताल (डफरिन) में प्रसूति सेवाओं पर बढ़ता दबाव 24 अगस्त से 30 सितंबर तक के आंकड़ों से सामने आया है. इस डेढ़ महीने में अस्पताल में 797 प्रसव हुए, जिनमें 360 सामान्य और 437 सिजेरियन प्रसव शामिल हैं. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रसव के लिए भर्ती 413 महिलाओं को हाई-रिस्क श्रेणी में रखा गया था. यानी अस्पताल को सामान्य प्रसव के साथ-साथ गंभीर और जटिल मामलों का भी लगातार सामना करना पड़ा.
एसएनसीयू में आग लगने की घटना के बाद डफरिन की नवजात चिकित्सा व्यवस्था को लेकर सवाल उठे थे. इसके बावजूद अस्पताल में मरीजों की संख्या कम नहीं हुई है. आंकड़े बताते हैं कि डफरिन पर महिलाओं का इलाज और प्रसव के लिए भरोसा कायम है. वहीं, उपलब्ध मैनपावर और सुविधाओं की तुलना में मरीजों की संख्या अधिक होने से डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ पर काम का दबाव बढ़ रहा है.

* ओपीडी में 4,645 महिलाओं का उपचार
24 अगस्त से 30 सितंबर के बीच डफरिन की ओपीडी में 4,645 महिलाओं ने उपचार कराया. इसी अवधि में अस्पताल में 797 प्रसव हुए. करीब 400 बेड की क्षमता वाले इस अस्पताल में भर्ती मरीजों की संख्या के साथ प्रसूति सेवाओं, ऑपरेशन और गंभीर मरीजों की निगरानी की जिम्मेदारी भी अस्पताल के स्टाफ पर है. विशेष रूप से हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं के मामलों में लगातार निगरानी और तत्काल चिकित्सा सुविधा की जरूरत होती है. ऐसे में सीमित संसाधनों के बीच अस्पताल के लिए सामान्य मरीजों के साथ गंभीर मामलों को संभालना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है.

* 413 माताएं हाई-रिस्क श्रेणी में
डेढ़ महीने के दौरान डफरिन में 413 माताओं की स्थिति हाई-रिस्क थी. इनमें से 392 महिलाएं एंटीनेटल पीरियड के दौरान गंभीर स्थिति में थीं, जबकि 21 महिलाएं प्रसव के बाद क्रिटिकल हुईं. इससे अस्पताल पर केवल प्रसव कराने का ही नहीं, बल्कि गर्भावस्था के दौरान गंभीर स्थिति वाली महिलाओं की निगरानी और प्रसव के बाद जटिलताओं से निपटने का भी अतिरिक्त दबाव रहा.

* चार बेड के एनआईसीयू पर नवजातों का दबाव
एसएनसीयू में आग की घटना के बाद नवजातों के उपचार की व्यवस्था सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है. वर्तमान में अस्पताल के एनआईसीयू में केवल चार बेड उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है और नए एनआईसीयू का काम जारी है. 24 अगस्त से 30 सितंबर के बीच 204 नवजातों को एनआईसीयू उपचार की जरूरत पड़ी. सीमित क्षमता के कारण इनमें से 170 नवजातों को आगे के उपचार के लिए दूसरे अस्पतालों में रेफर करना पड़ा. रेफर किए गए 170 नवजातों में 146 बच्चे डफरिन में ही जन्मे थे, जबकि 24 नवजात बाहर से उपचार के लिए अस्पताल में लाए गए थे. गंभीर नवजातों के लिए तत्काल उपचार की आवश्यकता को देखते हुए रेफरल व्यवस्था पर अस्पताल की निर्भरता बढ़ी है.

* नए एनआईसीयू से राहत की उम्मीद
अस्पताल में नए एनआईसीयू का काम जारी है. इसके शुरू होने के बाद नवजातों के उपचार के लिए उपलब्ध क्षमता बढ़ने की उम्मीद है. फिलहाल सीमित बेड और बड़ी संख्या में जरूरतमंद नवजातों के कारण गंभीर बच्चों को दूसरे अस्पतालों में भेजना पड़ रहा है. डॉ. संध्या खराटे, इंचार्ज एमएस, जिला महिला अस्पताल ने बताया कि 24 अगस्त से 30 सितंबर के बीच डफरिन में 797 प्रसव हुए. इनमें 360 सामान्य और 437 सिजेरियन प्रसव शामिल हैं. इस अवधि में 204 नवजातों को एनआईसीयू उपचार की जरूरत पड़ी, जिनमें से 170 को आगे के उपचार के लिए दूसरे अस्पतालों में रेफर किया गया.

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