शमशेरसिंह ने ’मेरिट हैट्रिक’ से बनाया कीर्तिमान

मेन्सा नार्वे आईक्यू टेस्ट भी की उत्तीर्ण

अमरावती/दि.14- ज्ञानमाता हाई स्कूल के छात्र शमशेरसिंह पचलोरे ने अपनी अनुकरणीय और असाधारण उपलब्धियों से न केवल अपने स्कूल, शहर और राज्य का, बल्कि पूरे देश का गौरव बढ़ाकर नया कीर्तिमान स्थापित किया है. मैट्रिक परीक्षा में 94% अंक लाकर मेधावी साबित होने के साथ-साथ, शमशेरसिंह पचलोरे ने दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक, ’इंटरनेशनल मेन्सा नॉर्वे आई.क्यू.टेस्ट’ भी 98.5% अंकों के साथ उत्तीर्ण किया, जिससे उन्हें दुनिया के चुनिंदा बुद्धिजीवियों के समूह में सदस्यता प्राप्त हुई.
उनकी उपलब्धियों की सूची में एक और कड़ी जोड़ते हुए, उन्हें ’सर्विस प्रिपरेटरी इंस्टीट्यूट’ और ’राष्ट्रीय मिलिट्री कॉलेज’ में भी रैंक मिली और उनका चयन हुआ. इस बहुआयामी प्रतिभाशाली बालक की उपलब्धियों और सफलताओं की इस ’हैट्रिक’ ने युवा पीढ़ी के मन में प्रेरणा की एक नई लहर जगा दी है. वह महाराष्ट्र से एकमात्र ऐसे उम्मीदवार हैं, जिन्होंने इन सभी अंतरराष्ट्रीय परीक्षाओं के हर चरण को अत्यंत शानदार अंकों के साथ उत्तीर्ण किया है.
ज्ञानमाता हाई स्कूल के मुख्याध्यापक फादर अरोकिया सैमी ने शमशेरसिंह को अत्यंत हर्ष और आशीर्वाद के साथ बधाई देते हुए कहा कि वह हमेशा से हमारे स्कूल के एक लोकप्रिय बहुमुखी प्रतिभा के धनी और बेहतरीन वक्ता व कलाकार रहे हैं. इन उपलब्धियों को छात्रों, समर्पित कर्मचारियों और सहयोगी माता-पिता के संयुक्त प्रयासों का परिणाम माना जाता है, जिससे हमारी संस्था की प्रतिष्ठा और भी बढ़ गई है. हम उनके भविष्य के सभी प्रयासों और उज्ज्वल भविष्य के लिए उन्हें शुभकामनाएँ देते हैं
प्रख्यात न्यूरो-एनालिस्ट और व्यवहार वैज्ञानिक डॉ. विक्रमसिंह पचलोरे और डॉ. संजीवनी पचलोरे के सुपुत्र को बहुआयामी गतिविधियों के लिए प्रशिक्षित और प्रेरित किया गया है, जिसमें पढ़ाई और खेल के साथ-साथ व्यावहारिक सामाजिक कौशल का भी संतुलन बनाए रखा गया है. उनकी उपलब्धियों में राष्ट्रीय खेल चैंपियनशिप और अंतर्राष्ट्रीय ओलंपियाड में पदक जीतना, तथा कई प्रतिष्ठित परीक्षाओं में उच्च रैंक प्राप्त करना शामिल है. वह समर्पण, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के साथ ’जीत को आदत बनाने’ और ’सफलता की संस्कृति’ विकसित करने के सिद्धांत का पालन करते हैं. समशेरसिंह पचलोरे अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता डॉ. विक्रमसिंह और डॉ. संजीवनी पचलोरे, दादा-दादी श्रीमती शीलादेवी पचलोरे, प्यारे भाई हुकुमसिंह, प्रिंसिपल फादर ए. सैमी और ज्ञानमाता हाई स्कूल के शिक्षकों, तथा क.त.झ.च. अमरावती के स्पोर्ट्स कोच और मार्गदर्शकों को देते हैं. उनकी आकांक्षा एक न्यूरो और कॉग्निटिव वैज्ञानिक बनने की है, और वह एक नीति-निर्माता तथा नौकरशाह के रूप में समाज की सेवा करना चाहते हैं.

Back to top button