परीक्षा मूल्यांकन से शिक्षकों ने मुंह मोडा
दैनिक भत्ता बढाए जाने की उठाई मांग

* परीक्षा व मूल्यांकन संचालक को सौंपा ज्ञापन
अमरावती/दि.4- विद्यापीठ में परीक्षा मूल्यांकन का महत्वपूर्ण काम करनेवाले नियमित एवं तासिका तत्व पर नियुक्त शिक्षक कर्मचारियों में विद्यापीठ प्रशासन के उदासीन रवैये को लेकर जबर्दस्त असंतोष व्याप्त है. विगत कई वर्षो से दैनिक भत्ते यानी डीए में एक रूपए की भी वृध्दि नहीं हुई है. बढती महंगाई की तुलना में शिक्षकों को मिलनेवाला पारिश्रमिक व भत्ता बेहद अत्यल्प रहने के चलते शिक्षकों ने विद्यापीठ प्रशासन को निवेदन सौंपते हुए इसमें सुधार करने की मांग उठाई है. साथ ही दैनिक भत्तें में वृध्दि किए जाने तक मूल्यांकन का काम नहीं करने की भूमिका भी अपनाई है. जिसे लेकर शिक्षक कर्मचारियों के प्रतिनिधि मंडल ने हाल ही में परीक्षा व मूल्यांकन विभाग के संचालक डॉ. नितिन कोली से मुलाकात करते हुए उन्हें अपनी मांगों एवं व्यथा के संदर्भ में निवेदन ही सौंपा.
महंगाई आसमान पर, भत्ता केवल 130 रूपए
विद्यापीठ में मूल्यांकन का काम करनेवाले शिक्षक कर्मचारियों के मुताबिक इस समय मूल्यांकन के कार्य हेतु शिक्षकों को रोजाना केवल 130 रूपए का दैनिक भत्ता दिया जाता है. जबकि इस समय महंगाई आसमान छू रही है तथा दो वक्त के चाय नाश्ते व भोजन सहित अन्य मूलभूत जरूरतों के लिए रोजाना होनेवाला खर्च 240 से 300 रूपए के आसपास होता है. इसके साथ ही बाहर गांव से आनेवाले शिक्षकों को विद्यापीठ के छात्रावास में रहने हेतु अपनी जेब से शुल्क अदा करना पडता है.
* 60 अंकों की वजह को आगे कर पारिश्रमिक में कटौती
विद्यापीठ प्रशाासन ने कुछ समय पूर्व परीक्षा मूल्यांकन हेतु प्रति प्रश्नपत्र पारिश्रमिक यानी मानधन को कम किया है. प्रश्नपत्रिका 80 अकों की बजाय 60 अंकों की हो गई है, इस तकनीकी के कारण को आगे करते हुए पारिश्रमिक में कटौती की गई. परंतु यद्यपि अंकों की संख्या कम हुई है. लेकिन प्रत्येक उत्तरपुस्तिका को जांचने हेतु लगनेवाला समय, बौध्दिक श्रम व एकाग्रता पहले जितनी ही लगती है. इसके चलते इस कटौती को पूरी तररह से असंयुक्तित व अतार्किंक कहा जा सकता है, ऐसा भी शिक्षक कर्मचारियों का कहना रहा.
* विद्यार्थियों की ओर से लिए जानेवाले परीक्षा के आवेदन शुल्क मे लगातार वृध्दि हो रही है. वही दूसरी ओर परीक्षा की व्यवस्था को सुचारू रखनेवाले और उत्तरपुस्तिका का मूल्यांकन करनेवाले शिक्षकों के भत्ते और पारिश्रमिक में विगत लंबे समय से कोई वृध्दि नहीं की गई है. बल्कि पारिश्रमिक में कटौती का अन्यायपूर्ण निर्णय लिया गया है. जिसके चलते शिक्षकों ने परीक्षा मूल्यांकन का काम नहीं करने की भ्ाूमिका अपनाई है.
– प्रा. डॉ. प्रशांत विघे





