चिखलदरा तहसील को पानी पिलाने वाले विभाग खुद प्यासे!

लघु पाटबंधारे उपविभाग में पांच में से चार पद रिक्त

* जलापूर्ति विभाग को 2023 से नहीं मिला निधि
* कार्यालय में न बिजली, न बैठने की व्यवस्था
चिखलदरा /दि.12– मेलघाट के चिखलदरा तहसील के लगभग 140 गांवों की जलसमस्या दूर करने और भविष्य में पानी की किल्लत रोकने की जिम्मेदारी जिन सरकारी विभागों पर है, उनकी हालत खुद दयनीय बनी हुई है. जिला परिषद के लघु पाटबंधारे उपविभाग में पांच में से चार पद रिक्त हैं, जबकि जिला परिषद के जलापूर्ति उपविभाग को वर्ष 2023 से अब तक निधि ही उपलब्ध नहीं हुई है. कार्यालय में बिजली, टेबल-कुर्सियों और बैठने तक की समुचित व्यवस्था नहीं है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जो विभाग पूरे तहसील की प्यास बुझाने के लिए जिम्मेदार हैं, वे अपनी बुनियादी समस्याएं कब दूर करेंगे?
हाल ही में जिलाधिकारी ने चिखलदरा में आयोजित बैठक के दौरान तहसील के गांव-गांव तक पानी पहुंचाने, जलसंकट का स्थायी समाधान करने और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जलसंधारण के काम करने के निर्देश दिए थे. ‘पानी रोको, पानी सहेजो’ की अवधारणा के तहत मिट्टी के बांध, सीमेंट बांध और पत्थर के बांध जैसे कार्य करने के साथ ही अधिकारियों को मुख्यालय नहीं छोड़ने की हिदायत भी दी गई थी. लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इन निर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू करने वाले विभाग ही संसाधनों और कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे हैं.
* लघु पाटबंधारे विभाग में चार पद खाली
चिखलदरा तहसील का भौगोलिक क्षेत्र काफी विस्तृत है. दुर्गम रास्तों और जंगलों से घिरे इस इलाके में जलसंधारण के कार्यों की निगरानी और क्रियान्वयन के लिए पर्याप्त अधिकारी-कर्मचारी होना जरूरी है. इसके विपरीत, जिला परिषद के लघु पाटबंधारे उपविभाग में पांच स्वीकृत पदों में से चार पद रिक्त बताए जा रहे हैं. यहां केवल एक उपअभियंता कार्यरत हैं, जबकि दो कनिष्ठ अभियंता, एक सहायक अभियंता और एक स्थापत्य अभियंता के पद खाली हैं. कर्मचारियों की इतनी कमी के बीच लगभग 140 गांवों की जलसमस्या, जलसंधारण के कार्यों और भविष्य में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन किस तरह किया जाएगा, यह बड़ा सवाल है.
* 2023 से जलापूर्ति विभाग को निधि नहीं
जिला परिषद का जलापूर्ति उपविभाग चिखलदरा में वर्ष 2023 में शुरू किया गया था. इससे पहले यह विभाग धारणी में स्थित था. हालांकि, चिखलदरा में उपविभाग शुरू होने के बाद से अब तक इसे निधि उपलब्ध नहीं होने की जानकारी सामने आई है. विभाग में छह कनिष्ठ अभियंताओं की तैनाती बताई गई है, लेकिन आवश्यक संसाधनों के अभाव में कामकाज प्रभावित होने की आशंका है. कार्यालय की स्थिति भी चिंताजनक बताई जा रही है. यहां बिजली की व्यवस्था नहीं है और कर्मचारियों के बैठने के लिए पर्याप्त टेबल-कुर्सियां तक उपलब्ध नहीं हैं. कार्यालय में मौजूद एक लिपिक को सुबह से शाम तक बुनियादी सुविधाओं के अभाव में काम करना पड़ता है. कर्मचारियों के लिए आवासीय क्वार्टर की सुविधा तो दूर, कार्यालय की इमारतों की हालत भी जर्जर बताई जा रही है.
* कुपोषण के साथ विभागों की बदहाली भी चुनौती
मेलघाट कुपोषण की समस्या के लिए जाना जाता है, लेकिन यहां केवल बच्चे ही नहीं, बल्कि कई सरकारी विभाग भी संसाधनों की कमी से जूझते दिखाई दे रहे हैं. कुछ विभागों की हालत ऐसी है कि वे बुनियादी सुविधाओं के सहारे ही किसी तरह कामकाज चला रहे हैं. चिखलदरा जैसे दुर्गम क्षेत्र में जलापूर्ति और जलसंधारण का काम केवल कागजों पर योजनाएं बनाने से पूरा नहीं हो सकता. इसके लिए पर्याप्त अधिकारी-कर्मचारी, नियमित निधि, सुविधायुक्त कार्यालय और क्षेत्र में सक्रिय निगरानी आवश्यक है.
जिलाधिकारी द्वारा दिए गए निर्देशों के बाद अब वरिष्ठ अधिकारियों और संबंधित पदाधिकारियों के सामने इन विभागों की वास्तविक स्थिति की समीक्षा करने की चुनौती है. यदि समय रहते रिक्त पदों को भरा नहीं गया, निधि उपलब्ध नहीं कराई गई और कार्यालयों की बुनियादी सुविधाएं दुरुस्त नहीं की गईं, तो आने वाले समय में चिखलदरा तहसील के गांवों में जलसमस्या का समाधान करना कठिन हो सकता है. ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित प्रशासन इन विभागों की बदहाली दूर करने के लिए कब ठोस कदम उठाता है.

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