पुलिस पाटील महासंघ की मांगों पर सरकार तीन माह में ले निर्णय

महाराष्ट्र प्रशासनिक न्यायाधिकरण का राज्य सरकार को निर्देश

अमरावती/दि.15– महाराष्ट्र राज्य पुलिस पाटील महासंघ की विभिन्न लंबित मांगों को लेकर दायर मूल आवेदन पर महाराष्ट्र प्रशासनिक न्यायाधिकरण ने महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं. न्यायाधिकरण ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि पुलिस पाटील महासंघ की मांगों पर उच्चस्तरीय समिति द्वारा गंभीरता से विचार करने के बाद अगले तीन माह के भीतर उचित अंतिम निर्णय लिया जाए.
गृह विभाग के 20 अगस्त 2019 के शासन निर्णय के तहत पुलिस पाटील महासंघ की विभिन्न मांगों पर विचार करने के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित की गई थी. हालांकि, महासंघ की कुछ मांगें अब भी समिति के समक्ष लंबित होने की जानकारी सुनवाई के दौरान न्यायाधिकरण के सामने रखी गई. इस मामले में महाराष्ट्र राज्य पुलिस पाटील महासंघ एवं अन्य आवेदकों की ओर से अधिवक्ता एम. वी. भोसले ने पक्ष रखा. वहीं राज्य सरकार की ओर से प्रस्तुतकर्ता अधिकारी के. एस. गायकवाड़ ने अपना पक्ष रखा. आवेदकों के अधिवक्ता ने मुंबई उच्च न्यायालय द्वारा रिट याचिका में 4 अक्टूबर 2022 को दिए गए आदेश का हवाला देते हुए महासंघ की मांगों पर निर्णय लेने की आवश्यकता न्यायाधिकरण के समक्ष रखी. न्यायाधिकरण ने गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव द्वारा 25 नवंबर 2024 को दाखिल किए गए जवाबी शपथपत्र का भी संज्ञान लिया. इसमें बताया गया था कि मुंबई उच्च न्यायालय के निर्देश के अनुसार गृह विभाग ने 15 मार्च 2024 को शासन निर्णय जारी कर पुलिस पाटीलों का मासिक मानधन 6,500 रुपये से बढ़ाकर 15 हजार रुपये कर दिया है.
शासन के जवाब में यह भी कहा गया था कि महासंघ की अन्य मांगों पर सरकार द्वारा उचित विचार किया जा रहा है. अब महाराष्ट्र प्रशासनिक न्यायाधिकरण के निर्देश के बाद पुलिस पाटीलों की विभिन्न लंबित मांगों पर सरकार द्वारा तीन माह के भीतर निर्णय लिए जाने का रास्ता साफ हो गया है. न्यायाधिकरण के इस निर्णय का महाराष्ट्र राज्य पुलिस पाटील महासंघ के पदाधिकारियों ने स्वागत किया है. महासंघ ने उम्मीद जताई है कि राज्य सरकार लंबित मांगों पर सकारात्मक और जल्द निर्णय लेगी. महाराष्ट्र राज्य पुलिस पाटील महासंघ के अध्यक्ष मोहनराव शिंगटे तथा विभागीय अध्यक्ष किशोर सावंत पाटील ने निर्णय का स्वागत किया.

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