अग्निकांड के समय एनआयसीयू की नर्से सो रही थी
डफरीन अग्निकांड का सीसीटीवी फूटेज आया सामने, मचा हडकंप

* आग से पहले अलार्म व लाल लाईट के बावजूद नींद से नहीं जागी
* पूर्व मंत्री डॉ. सुनील देशमुख ने पत्रवार्ता में सामने रखा सीसीटीवी फूटेज
* जांच रिपोर्ट व फूटेज में घटनाक्रम अलग-अलग रहने की बात पर दिलाया ध्यान
* जिम्मेदारों को बचाने रिपोर्ट को पहले से स्क्रिप्टेड बताया, पूरी कार्रवाई को कहा लीपापोती
* सरकार एवं प्रशासन को जमकर लिया आडे हाथ, निष्पक्ष जांच व प्रभावी इंसाफ की मांग उठाई
अमरावती/दि.30- जिला महिला अस्पताल के नवजात शिशु गहन चिकित्सा कक्ष (एनआईसीयू) में 24 अगस्त को हुए अग्निकांड और तीन नवजातों की मौत के मामले में सामने आए एक सीसीटीवी फुटेज ने जांच की दिशा और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं. कांग्रेस नेता एवं पूर्व राज्यमंत्री डॉ. सुनील देशमुख ने आज यहां बुलाई गई पत्रकारवार्ता में फुटेज प्रस्तुत करते हुए दावा किया कि डफरीन अस्पताल में अग्निकांड वाली घटना के समय एनआईसीयू के बाहर लॉबी में ड्यूटी पर तैनात दो नर्सें सोती दिखाई दे रही हैं. उन्होंने कहा कि आग लगने से पहले करीब तीन-चार बार अलार्म बजने और लाल चेतावनी लाइट दिखाई देने के बावजूद दोनों नर्सें तत्काल सक्रिय होती नजर नहीं आतीं.
पत्रवार्ता में पूर्व मंत्री डॉ. सुनील देशमुख ने आरोप लगाया कि सीसीटीवी में दिखाई देने वाला घटनाक्रम और जांच रिपोर्ट में दर्ज घटनाक्रम एक-दूसरे से मेल नहीं खाते. उन्होंने जांच रिपोर्ट को जिम्मेदारों को बचाने के लिए पहले से तैयार ‘स्क्रिप्ट’ बताते हुए पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र एवं तकनीकी जांच की मांग की. साथ ही उन्होंने अधिकारियों और संबंधित ठेकेदारों के बीच कथित मिलीभगत की जांच कर वास्तविक जिम्मेदारी तय करने की मांग की.
पत्रकार परिषद में डफरीन अग्निकांड वाली घटना के समय का एक सीसीटीवी फुटेज प्रस्तुत करते हुए पूर्व मंत्री डॉ. सुनील देशमुख ने कहा कि, फुटेज में आग लगने से पहले एनआईसीयू क्षेत्र में चेतावनी संकेत दिखाई देते हैं और अलार्म सक्रिय होता है. इसके बावजूद लॉबी में मौजूद दोनों नर्सों की तत्काल प्रतिक्रिया दिखाई नहीं देती. बाद में वेंटीलेटर से विस्फोट जैसी आवाज आने पर उनके उठने और शोर मचाने का दावा किया गया है. इसके बाद अन्य कर्मचारी मौके पर पहुंचते और छोटे अग्निशमन यंत्रों से आग बुझाने का प्रयास करते दिखाई देते हैं. उन्होंने कहा कि यदि अलार्म और चेतावनी प्रणाली सक्रिय थी, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि ड्यूटी पर मौजूद कर्मचारियों को इसकी जानकारी कब हुई, नवजातों को सुरक्षित निकालने की प्रक्रिया कब शुरू हुई और दमकल विभाग को सूचना किस समय दी गई. इन सभी घटनाओं का सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी रिकॉर्ड से मिलान किया जाना चाहिए.
* अधिपरिचारिका की भूमिका को लेकर भी सवाल
पूर्व मंत्री डॉ. देशमुख ने जांच रिपोर्ट के एक कथित उल्लेख का हवाला देते हुए कहा कि घटना के समय अधिपरिचारिका एनआईसीयू के भीतर एक नवजात को दूध पिला रही थी. इसके विपरीत, उनके द्वारा प्रस्तुत फुटेज में वह किसी अन्य कक्ष से निकलकर आग लगने के बाद एनआईसीयू की ओर आती दिखाई देती हैं. उन्होंने इसी कथित अंतर को जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाने वाला महत्वपूर्ण बिंदु बताया. हालांकि, डॉ. देशमुख ने यह भी कहा कि आग के समय ड्यूटी पर मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों से लापरवाही हुई हो सकती है, लेकिन आग लगने के बाद डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर नवजातों को बचाने का प्रयास किया. इसलिए जांच में केवल दोष तय करने के बजाय घटनाक्रम के प्रत्येक पहलू का वस्तुनिष्ठ परीक्षण होना चाहिए.
* आग 2.50 बजे, दमकल 3.30 बजे पहुंचने का दावा
पूर्व मंत्री डॉ. देशमुख ने दावा किया कि 24 अगस्त को तड़के करीब 2.50 बजे वेंटीलेटर में विस्फोट के बाद आग लगी, जबकि दमकल की गाड़ियां करीब 3.30 बजे अस्पताल पहुंचीं. उन्होंने इस समय-अंतर को भी जांच का महत्वपूर्ण विषय बताया और कहा कि अस्पताल के रिकॉर्ड, दमकल विभाग की सूचना, कॉल लॉग तथा सीसीटीवी फुटेज के आधार पर घटनाक्रम की सटीक समयरेखा तैयार की जानी चाहिए.
* फायर सेफ्टी व्यवस्था और ठेकेदारी पर निशाना
पूर्व मंत्री डॉ. देशमुख ने अस्पताल की अग्निसुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए. उनका दावा है कि इलेक्ट्रिकल और फायर सेफ्टी से जुड़े काम मूल ठेकेदार के अलावा अन्य एजेंसियों से कराए गए. उन्होंने पूछा कि कथित सब-कॉन्ट्रैक्ट के लिए सक्षम स्तर से अनुमति ली गई थी या नहीं तथा फायर सेफ्टी एनओसी किस एजेंसी के नाम पर और किन मानकों के आधार पर जारी की गई. उन्होंने हाइड्रेंट, पाइपलाइन, फायर पंप और पानी के दबाव की व्यवस्था की स्वतंत्र तकनीकी जांच की मांग की. उनका दावा है कि दुर्घटना के बाद फायर सिस्टम में पानी का दबाव दिए जाने पर पाइपलाइन के कुछ हिस्सों में खराबी सामने आई. उन्होंने पूरे अग्निशमन तंत्र का तकनीकी ऑडिट कराने की मांग की.
* 39 नवजातों की क्षमता और भवन के मूल डिजाइन पर सवाल
पूर्व मंत्री डॉ. देशमुख ने बताया कि एनआईसीयू और एसएनसीयू में कुल 39 बेड-27 एसएनसीयू और 12 एनआईसीयू-की व्यवस्था है. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जिस स्थान पर बाद में एसएनसीयू बनाया गया, वहां मूल भवन योजना में तीन सेमिनार हॉल प्रस्तावित थे. भवन के उपयोग में परिवर्तन करते समय विद्युत एवं अग्निसुरक्षा मानकों की समीक्षा किस स्तर पर की गई, इसकी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग उन्होंने की. उन्होंने अस्पताल की स्ट्रेचर लिफ्ट, सौर ऊर्जा प्रणाली और ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट को लेकर भी सवाल उठाए. उनके अनुसार, इन व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति और उनके अनुमोदन संबंधी दस्तावेजों की जांच होनी चाहिए.
* तकनीकी मनुष्यबल और भर्ती प्रक्रिया भी जांच के दायरे में हो
पूर्व मंत्री डॉ. देशमुख ने एनआईसीयू के लिए समर्पित आईसीयू तकनीशियन की उपलब्धता का मुद्दा उठाते हुए कहा कि केवल ड्यूटी पर मौजूद कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त नहीं होगा. पदों की मंजूरी, भर्ती, नियुक्ति और प्रशिक्षण की पूरी प्रक्रिया की जांच आवश्यक है. उन्होंने 2022 और 2026 की भर्ती प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग करते हुए कहा कि तकनीकी मनुष्यबल की कमी के लिए जिन-जिन स्तरों पर जिम्मेदारी बनती है, उसे भी जांच में शामिल किया जाना चाहिए.
* वेंटीलेटर खरीद पर भी उठाए सवाल
पत्रकारवार्ता में पूर्व मंत्री डॉ. देशमुख ने जिला सामान्य अस्पताल में वेंटीलेटर खरीद का मुद्दा भी उठाया. उनके दावे के अनुसार, कुछ वेंटीलेटर अधिकृत वितरक के माध्यम से करीब 12-13 लाख रुपये की कीमत के थे, जबकि खरीद में प्रति मशीन करीब 22-23 लाख रुपये खर्च किए गए. उन्होंने इस अंतर के आधार पर करोड़ों रुपये की कथित अनियमितता का आरोप लगाते हुए खरीद प्रक्रिया, आपूर्तिकर्ता, तकनीकी मंजूरी और भुगतान की स्वतंत्र जांच की मांग की.
* जिम्मेदारी केवल अधिकारियों तक सीमित न रहे
पूर्व मंत्री डॉ. देशमुख ने कहा कि अग्निकांड के बाद यदि अधिकारियों पर कार्रवाई हुई है तो भवन निर्माण, विद्युत एवं फायर सेफ्टी, चिकित्सा उपकरणों की खरीद-रखरखाव तथा तकनीकी मनुष्यबल से जुड़े ठेकेदारों और एजेंसियों की भूमिका भी जांच के दायरे में होनी चाहिए. उन्होंने कुछ ठेकेदारों के सत्तारूढ़ दल के वरिष्ठ नेताओं से कथित संबंध होने का आरोप भी लगाया और इसकी स्वतंत्र जांच की मांग की. इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है. उन्होंने कहा कि जांच का उद्देश्य किसी कर्मचारी को ‘बलि का बकरा’ बनाना नहीं, बल्कि आग के वास्तविक कारण और उससे जुड़ी प्रत्येक प्रशासनिक, तकनीकी तथा प्रबंधकीय चूक सामने लाना होना चाहिए.
* पूरी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग
इस पत्रकार परिषद के जरीए पूर्व मंत्री डॉ. सुनील देशमुख ने कहा कि, घटना की जांच के लिए गठित 11 सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप चुकी है, लेकिन पूरी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं किए जाने से कई सवाल अनुत्तरित हैं. उन्होंने मांग की कि सीसीटीवी फुटेज, फायर अलार्म के तकनीकी रिकॉर्ड, वेंटीलेटर के रखरखाव, फायर ऑडिट, ड्यूटी चार्ट, अस्पताल के लॉगबुक, दमकल विभाग के रिकॉर्ड, ठेका एवं सब-कॉन्ट्रैक्ट, एनओसी, तकनीकी मनुष्यबल और उपकरण खरीद से जुड़े दस्तावेजों का एक साथ परीक्षण किया जाए. उन्होंने कहा कि तीन नवजातों की मौत जैसे गंभीर मामले में जांच केवल तत्काल ड्यूटी पर मौजूद कर्मचारियों की भूमिका तक सीमित नहीं रहनी चाहिए. घटनाक्रम की स्वतंत्र समयरेखा तैयार कर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि आग कैसे लगी, चेतावनी प्रणाली ने कब काम किया, बचाव अभियान कब शुरू हुआ और तकनीकी व प्रशासनिक व्यवस्थाओं में किस स्तर पर चूक हुई. उन्होंने सरकार और प्रशासन से निष्पक्ष तकनीकी जांच, पूरी रिपोर्ट सार्वजनिक करने तथा जांच में दोषी पाए जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति या एजेंसी के खिलाफ नियमानुसार प्रभावी कार्रवाई की मांग की.





