8 साल से अटका मनपा के कमर्शियल कॉम्प्लेक्स का किराया

करोड़ों की आय पर लालफीताशाही

* आर्थिक संकट से जूझ रही मनपा को आय का बड़ा स्रोत मिलने के बावजूद फैसला लंबित
अमरावती/दि.26– अमरावती मनपा की आर्थिक स्थिति लगातार चुनौतीपूर्ण बनी हुई है. एक ओर मनपा पर करीब 450 से 500 करोड़ रुपये की देनदारी है, वहीं दूसरी ओर आय के नए और मजबूत स्रोत विकसित करने की दिशा में अपेक्षित गति दिखाई नहीं दे रही है. प्रॉपर्टी टैक्स मनपा की आय का प्रमुख स्रोत है, लेकिन अन्य विभागों से होने वाली आय अपेक्षाकृत कम है. इसका सीधा असर शहर के विकास कार्यों पर पड़ रहा है.
ऐसे समय में मनपा के स्वामित्व वाले पांच कमर्शियल कॉम्प्लेक्स आय का बड़ा स्रोत बन सकते हैं, लेकिन इनसे किराया वसूली और नई दर तय करने का मामला पिछले आठ वर्षों से लंबित है. शहर के प्रमुख स्थानों पर स्थित इन कमर्शियल कॉम्प्लेक्स की जमीन बीओटी आधार पर महज एक रुपये प्रति वर्गफुट की दर से लीज पर दी गई थी. लीज अवधि समाप्त हुए करीब आठ वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन अब तक न तो संबंधित जगहें खाली कराई गईं और न ही अपेक्षित दर से किराया वसूला जा सका है.
* रेडी रेकनर के 0.7 प्रतिशत पर किराया तय करने का प्रस्ताव
कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के किराए को लेकर मामला सरकारी स्तर पर अटका हुआ है. इसके बाद सरकार ने रेडी रेकनर के 0.7 प्रतिशत की दर से किराया वसूलने का निर्णय लिया था. वर्ष 2019 में इस संबंध में स्थायी समिति के माध्यम से सरकार को प्रस्ताव भी भेजा गया था. हालांकि, जमीन धारकों ने इस दर को अधिक बताते हुए पुनर्विचार की मांग की थी. इसके बाद मनपा में जनरल बॉडी हॉल उपलब्ध नहीं होने के कारण यह मामला करीब चार वर्षों तक लंबित रहा. अब नया सभागृह बनने के बाद पहली महासभा में कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई.
* मनपा की आय बढ़ाने पर जोर
मनपा की मौजूदा आर्थिक स्थिति को देखते हुए पदाधिकारियों ने माना कि कमर्शियल कॉम्प्लेक्स से मिलने वाला किराया आय का महत्वपूर्ण स्रोत बन सकता है. इसलिए डबल रेट से किराया वसूलने के बजाय रेडी रेकनर के 0.7 प्रतिशत के आधार पर दर तय कर सरकार से मार्गदर्शन लेने का रुख सामने आया है.
* पालकमंत्री ने दिए थे तीन विकल्प
इस बीच पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने मनपा में आयोजित मैराथन बैठक के दौरान कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के मुद्दे पर भी चर्चा की थी. उन्होंने मनपा के सामने तीन विकल्प रखे थे. इनमें रेडी रेकनर के 0.7 प्रतिशत के आधार पर किराया तय करना, 30 वर्ष से अधिक पुराने कमर्शियल कॉम्प्लेक्स को तोड़कर नए कॉम्प्लेक्स बनाना तथा मौजूदा कमर्शियल कॉम्प्लेक्स की नीलामी करना शामिल था. बैठक में मौजूद पदाधिकारियों ने मनपा की आय के लिहाज से नीलामी को अधिक फायदेमंद विकल्प बताया था. व्यापारियों के साथ हुई चर्चा में भी नीलामी के विकल्प को अच्छा प्रतिसाद मिलने की बात कही गई थी. पालकमंत्री ने इस मामले में जल्द ही सरकार स्तर पर बैठक आयोजित करने का आश्वासन दिया था. मनपा की कमर्शियल कॉम्प्लेक्स समिति की ओर से सरकार को पत्र भी भेजा गया. हालांकि, नया सभागृह बने करीब चार महीने बीत जाने के बावजूद सरकार की ओर से प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है.
* प्रॉपर्टी टैक्स की वसूली में सख्ती
मनपा प्रॉपर्टी टैक्स बकायेदारों से वसूली के लिए लगातार सख्ती बरत रही है. टैक्स जमा नहीं करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी जा रही है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब मनपा आम नागरिकों और संपत्ति धारकों से बकाया टैक्स वसूलने पर जोर दे रही है, तो उसके अपने कमर्शियल कॉम्प्लेक्स का आठ साल का किराया क्यों नहीं वसूला जा रहा? किराए की दर तय होने और पुराने-नए रेट को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण मामला लगातार उलझता जा रहा है. आर्थिक संकट से जूझ रही मनपा के लिए इन कॉम्प्लेक्स से करोड़ों रुपये की संभावित आय महत्वपूर्ण साबित हो सकती है. अब निगाहें सरकार के फैसले पर टिकी हैं. यदि सरकार इस मामले में जल्द निर्णय लेती है, तो मनपा को बड़ी आर्थिक राहत मिल सकती है. अन्यथा ‘आय का स्रोत सामने, लेकिन फैसला लालफीताशाही में’ वाली स्थिति आगे भी जारी रहने की आशंका है.

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