नई दोपहिया की पूजा के दौरान बाघ का हमला, शंकर की दर्दनाक मौत
चंद्रपुर में खेत किनारे नई बाइक की पूजा कर रहे व्यक्ति पर बाघ ने किया हमला, क्षत-विक्षत अवस्था में मिला शव

चंद्रपुर /दि.25- चंद्रपुर जिले में एक बेहद दर्दनाक और हृदयविदारक घटना सामने आई है. नई खरीदी गई दोपहिया वाहन की पूजा करने खेत किनारे गए एक व्यक्ति पर बाघ ने हमला कर दिया, जिसमें उसकी मौके पर ही मौत हो गई. मृतक का शव अगले दिन श्मशानभूमि के पास नाले में क्षत-विक्षत अवस्था में मिलने से पूरे इलाके में दहशत फैल गई. मृतक की पहचान 48 वर्षीय शंकर दादाजी मसराम के रूप में हुई है.
जानकारी के मुताबिक शंकर मूल रूप से वाहनगांव के निवासी थे और वर्तमान में वरोरा तहसील के खांबाडा क्षेत्र में रह रहे थे. बताया जा रहा है कि वे गांव में एक धार्मिक कार्यक्रम के सिलसिले में आए हुए थे. शंकर मसराम हाल ही में खरीदी गई नई दोपहिया वाहन की पूजा करने गुरुवार सुबह अपने खेत के पास स्थित मोह के पेड़ के नीचे गए थे. पूजा के दौरान समीप बहने वाले नाले में छिपे बैठे बाघ ने अचानक उन पर हमला कर दिया. हमला इतना अचानक और घातक था कि शंकर को संभलने तक का मौका नहीं मिला. शाम तक शंकर के घर वापस नहीं लौटने पर परिजनों को चिंता हुई. इसके बाद परिवार और ग्रामीणों ने उनकी तलाश शुरू की. देर शाम तक उनका कोई पता नहीं चला. अगले दिन शुक्रवार शाम करीब 5 बजे श्मशानभूमि के पास एक नाले में उनका चश्मा और गमछा पड़ा मिला. इसके बाद आसपास तलाश करने पर कुछ दूरी पर शंकर का शव बुरी तरह क्षत-विक्षत अवस्था में मिला.
घटना की जानकारी मिलते ही गांव में सनसनी फैल गई. ग्रामीणों में भय का माहौल है और क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी को लेकर चिंता बढ़ गई है. शंकर मसराम अपने पीछे पत्नी और दो बेटियों का परिवार छोड़ गए हैं. घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची. खडसंगी (बफर) क्षेत्र की वनपरिक्षेत्र अधिकारी भारती राऊत अपने सहयोगियों के साथ घटनास्थल पर पहुंचीं और पंचनामा किया. वन विभाग की ओर से मृतक की पत्नी संगीता मसराम को तत्काल 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई. साथ ही शासन के नियमानुसार शेष मुआवजा भी दिए जाने का आश्वासन दिया गया है.
इस घटना के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग से क्षेत्र में गश्त बढ़ाने, बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग की है. चंद्रपुर जिले में बाघों की बढ़ती आवाजाही के बीच यह घटना एक बार फिर मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीरता को उजागर करती है.





