‘उद्धव ठाकरे को देर से ही सही, अच्छी बुद्धि आई, लेकिन’
राजस्व मंत्री बावनकुले ने कसा तंज, उबाठा के हिंदुत्व पर भी उठाए सवाल

* रामरक्षा पाठ आंदोलन को बताया राजनीतिक लाभ का प्रयास
नागपुर/दि.4- महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री एवं नागपुर-अमरावती के पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने शिवसेना (उद्धव गुट) प्रमुख उध्दव ठाकरे द्वारा रामरक्षा पाठ आंदोलन को लेकर अपनाए गए रुख पर तीखी टिप्पणी की है. उन्होंने कहा कि ठाकरे को देर से ही सही, अच्छी बुद्धि आई है, लेकिन उनकी यह भूमिका केवल राजनीतिक लाभ हासिल करने के उद्देश्य से प्रेरित दिखाई देती है.
शनिवार को नागपुर विमानतल पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए मंत्री बावनकुले ने कहा कि भगवान श्रीराम और रामरक्षा पाठ का विषय आस्था से जुड़ा है, इसे राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर के लोकार्पण के समय पूरा महाराष्ट्र उद्धव ठाकरे के वहां जाने की प्रतीक्षा कर रहा था, लेकिन उन्होंने अयोध्या जाने से परहेज किया. कांग्रेस के साथ गठबंधन और वोट बैंक की राजनीति के कारण उन्होंने हिंदुत्व की मूल भूमिका से दूरी बनाई थी.
* नवनीत राणा प्रकरण का भी किया उल्लेख
मंत्री बावनकुले ने कहा कि हनुमान चालीसा पाठ को लेकर पूर्व सांसद नवनीत राणा और उनके पति व विधायक रवि राणा को जेल तक जाना पड़ा था. उस समय उद्धव ठाकरे सरकार की भूमिका सभी ने देखी थी. ऐसे में आज रामरक्षा पाठ के माध्यम से हिंदुत्व की बात करना राजनीतिक विरोधाभास को दर्शाता है.
* ‘हिंदुत्व भाजपा के लिए आस्था, ठाकरे के लिए राजनीति’
राजस्व मंत्री बावनकुले ने कहा कि हिंदुत्व भारतीय जनता पार्टी के लिए केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि आस्था और विचारधारा का विषय है. उनके अनुसार, वर्तमान में हिंदुत्ववादी कार्यकर्ताओं के दूर जाने से चिंतित होकर उद्धव ठाकरे उन्हें वापस अपने पक्ष में लाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन यह प्रयोग लंबे समय तक सफल नहीं होगा. उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस की विचारधारा के साथ समझौता करने के कारण उद्धव ठाकरे की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा है और जनता राजनीतिक सुविधा के अनुसार बदलते रुख को भलीभांति समझ रही है.
मंत्री बावनकुले ने कहा कि केवल धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेने से हिंदुत्व की पहचान नहीं बनती, बल्कि उसके प्रति निरंतर और स्पष्ट प्रतिबद्धता आवश्यक होती है. उन्होंने विश्वास जताया कि महाराष्ट्र की जनता वास्तविक और अवसरवादी हिंदुत्व के बीच का अंतर अच्छी तरह समझती है.





