2.58 बजे भरा गया विप्लव बाजोरिया का फॉर्म
‘अमरावती मंडल’ इनसाइड स्टोरी

* पिता-पुत्र दोनों के फॉर्म भरकर तैयार थे
* परभणी से टिकट कटने पर दौडते-भागते अमरावती पहुंचे बाजोरिया
* बडनेरा रोड के होटल में बैठ 12 नगरसेवकों ने किया हस्ताक्षर
अमरावती/दि.1 – प्रतिष्ठापूर्ण विधान परिषद चुनाव के नामांकन की समय-सीमा में केवल दो मिनट शेष रहते निर्दलीय के रुप में पूर्व विधायक विप्लव गोपीकिसन बाजोरिया का नामांकन आज दोपहर जिलाधीश कार्यालय में बनाए गए चुनाव अधिकारी कार्यालय में प्रस्तुत किया गया. जिसे चुनाव अधिकारी और कलेक्टर आशीष येरेकर ने स्वीकार किया. ‘अमरावती मंडल’ को मिली जानकारी के अनुसार परभणी सीट से अंतिम क्षणों तक शिवसेना उम्मीदवारी की उम्मीद लगाए बैठे बाजोरिया पिता-पुत्र दौडते-भागते अमरावती पहुंचे. उनके नामांकन पश्चात राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि, अमरावती इलेक्शन की रंगत बढ गई है.
सूत्रों ने बताया कि, विप्लव बाजोरिया के साथ ही उनके पिता और दो बार विधान परिषद सदस्य रह चुके गोपीकिसन बाजोरिया का भी नामांकन तैयार था. उनके नामांकन पर 8 वोटर्स (नगरसेवक) के हस्ताक्षर हो गए थे. नियमानुसार 10 हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं. ऐसे में बडनेरा रोड की एक प्रसिद्ध निवासी होटल में बाजोरिया समर्थक डटे थे. उन्होंने नगरसेवकों को वहां बुलाकर आवश्यक सूचक और अनुमोदक के रुप में दस्तखत करवाए. यह नामांकन ऐन समय पर लेकर एक पार्टी के पदाधिकारी की कार से वे लोग जिलाधीश कार्यालय पहुंचे, जहां 15 मिनट पहले ही शिवसेना नेता और पूर्व विधायक बाजोरिया पिता-पुत्र पहुंच गए थे. उन्होंने 10-10 हजार रुपए की डिपॉजिट राशि भी जमा करा दी थी.
बाजोरिया के अनुरोध पर जो नामांकन पहले आएगा, उसे कबूल करने की बात अधिकारियों ने कही थी. बाजोरिया समर्थक समय से दो मिनट पहले जिलाधीश के कक्ष के बाहर पहुंच गए. जिससे फॉर्म स्वीकार किया गया.
उनके नामांकन पश्चात नाना प्रकार की चर्चा शुरु हो गई है. सबसे महत्वपूर्ण चर्चा बाजोरिया के नामांकन पर कौनसे नगरसेवकों के हस्ताक्षर है, यह उत्सुकता का विषय बना है. इस बारे में नियोजित कहें या गोपनीयता? अपनाई गई. नगरसेवकों के नाम तत्काल मीडिया को नहीं पता चल सके. एक प्रमुख पार्टी के पदाधिकारी अपनी कार से बाजोरिया समर्थकों को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे थे. अब कहा जा रहा है कि, अमरावती सीट का इलेक्शन रोचक हो गया है. पूर्व मंत्री प्रवीण पोटे की टक्कर कांग्रेस के हर्षजीत देशमुख से होती है, या शिवसेना के बंडखोर विप्लव बाजोरिया से, यह देखनेवाली बात होगी.





