‘उन्हें’ हमने नहीं लाया था, ‘वो’ खुद आए थे!

कांग्रेस सांसद बलवंत वानखडे का दो टूक खुलासा

* हर्षजीत देशमुख की उम्मीदवारी को लेकर उठ रहे सवालों का दिया जवाब
अमरावती /दि.15- अमरावती स्थानीय स्वराज्य संस्था विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार हर्षजीत देशमुख की उम्मीदवारी को लेकर उठ रहे विवाद के बीच कांग्रेस सांसद बलवंत वानखड़े ने बड़ा दावा किया है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि हर्षजीत देशमुख को कांग्रेस का उम्मीदवार बनाने के लिए किसी भी स्थानीय नेता ने पहल नहीं की थी, बल्कि वे स्वयं उम्मीदवार बनने की इच्छा लेकर कांग्रेस नेताओं के पास पहुंचे थे. ऐसे में अब कांग्रेस प्रत्याशी हर्षजीत देशमुख द्बारा लिए गये ‘यू-टर्न’ का ठिकरा कांग्रेस के किसी भी स्थानीय नेता के सिर पर नहीं फोडा जा सकता.
कांग्रेस सांसद बलवंत वानखडे ने गत रोज दैनिक अमरावती मंडल के कार्यालय को सदिच्छा भेंट दी तथा उनकी शहर सहित जिले के विकास के साथ ही इस समय विधान परिषद के चुनाव को लेकर चल रही राजनीतिक उठापटक पर दैनिक अमरावती मंडल के संपादक अनिल अग्रवाल से काफी विस्तृत चर्चा हुई. इसी चर्चा के दौरान विधान परिषद के चुनाव के कांग्रेस की ओर से प्रत्याशी बनाए गये हर्षजीत देशमुख द्बारा ऐन चुनावी मुहाने पर कथित रूप से बीमार पडते हुए यू-टर्न मार लिए जाने के मुद्दे पर भी बातचीत भी साथ ही इस संदर्भ में कांग्रेस नेताओं व हर्षजीत देशमुख के बीच चल रहे आरोप प्रत्यारोप पर भी चर्चा हुई.
इस समय कांग्रेस सांसद बलवंत वानखडे ने पूरे मामले को लेकर जानकारी देेते हुए कहा कि हर्षजीत देशमुख ने सबसे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधायक डॉ. सुनील देशमुख से मुलाकात की थी और विधान परिषद चुनाव लड़ने की इच्छा व्यक्त की थी. इस पर डॉ. देशमुख ने उन्हें पूर्व मंत्री यशोमती ठाकुर, सांसद बलवंत वानखड़े, जिला कांग्रेस अध्यक्ष बबलू देशमुख तथा पूर्व विधायक धीरज जगताप से चर्चा करने की सलाह दी थी. इसके बाद हर्षजीत देशमुख ने जिला कांग्रेस अध्यक्ष बबलू देशमुख और पूर्व विधायक वीरेंद्र जगताप से मुलाकात कर अपनी दावेदारी रखी. उस समय यशोमती ठाकुर अस्वस्थ होने के कारण उनसे प्रत्यक्ष मुलाकात नहीं हो सकी, हालांकि फोन पर उनकी चर्चा हुई थी.
* आर्थिक क्षमता और चुनाव लड़ने की तैयारी देखकर दी गई सहमति
इसी बातचीत में सांसद वानखड़े ने बताया कि हर्षजीत देशमुख ने स्वयं सभी नेताओं से संपर्क किया था. बाद में कांग्रेस नेताओं ने उनकी आर्थिक क्षमता तथा चुनाव लड़ने की तैयारी को देखते हुए उनके नाम पर सहमति व्यक्त की और प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व को उनकी उम्मीदवारी की अनुशंसा की गई. उन्होंने कहा, हर्षजीत देशमुख हमारे पास स्वयं आए थे और उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर विधान परिषद का चुनाव लडने की इच्छा जताई थी. ऐसे में कहा जा सकता है कि किसी भी नेता ने उन्हें खोजकर उम्मीदवार नहीं बनाया. सभी नेताओं ने सामूहिक चर्चा के बाद उनके नाम पर सहमति जताई थी.
* उम्मीदवार की तबीयत बिगड़ने के बाद उठे सवाल
गौरतलब है कि कांग्रेस उम्मीदवार घोषित होने के बाद हर्षजीत देशमुख अचानक अस्पताल में भर्ती हो गए थे. उनकी तबीयत को लेकर विभिन्न प्रकार की चर्चाएं शुरू हो गईं, जिसके बाद राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठने लगा कि आखिर ऐसे उम्मीदवार को कांग्रेस में आगे किसने बढ़ाया था. इसी पृष्ठभूमि में सांसद बलवंत वानखड़े ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उम्मीदवार स्वयं कांग्रेस नेताओं के संपर्क में आए थे और स्थानीय नेतृत्व ने केवल उनकी दावेदारी पर विचार कर प्रदेश नेतृत्व को अपनी अनुशंसा भेजी थी.
* कांग्रेस में जारी है मंथन
हर्षजीत देशमुख प्रकरण के बाद कांग्रेस के भीतर भी इस पूरे घटनाक्रम को लेकर चर्चा जारी है. पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच उम्मीदवार चयन प्रक्रिया तथा चुनावी रणनीति को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं. वहीं सांसद वानखड़े के इस बयान के बाद इस मुद्दे पर नया राजनीतिक विवाद खड़ा होने की संभावना जताई जा रही है.

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