सत्ता किसकी बनेगी : माथापच्ची

अलग-अलग पर्यायों पर हो रहा विचार-विमर्श

* कांग्रेस एवं भाजपा के नेता जादुई आंकडे के लिए कर रहे जमा-जोड
* पक्षीय बलाबल की संख्या ने स्थिति को बनाया जबरदस्त पेचिदा
* अस्पष्ट जनादेश ने सभी प्रमुख पार्टियों के लिए पैदा किया सिरदर्द
अमरावती/दि.17 – अमरावती महानगर पालिका के चुनावी नतीजे घोषित होने के साथ ही अमरावती महानगर के मतदाताओं द्वारा दिया गया ‘खिचडी जनादेश’ अब सभी के सामने है. जिसमें किसी भी एक पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है, बल्कि हर पार्टी स्पष्ट बहुमत से कोसों दूर है. जिसके चलते अब मनपा में सत्ता स्थापित करने और स्थिर सरकार बनाने हेतु बहुमत के लिए आवश्यक जादुई आंकडे को हासिल करने के लिए सभी प्रमुख राजनीतिक दलों द्वारा अन्य दलों के सदस्यों को साधते हुए सत्ता हेतु समीकरण साधने का प्रयास किया जा रहा है. जिसके लिए अलग-अलग दलों के पार्षदों की संख्या को ध्यान में रखते हुए राजनीतिक नफे-नुकसान को ध्यान में रखकर जमा-जोड किया जा रहा है.
बता दें कि, अमरावती महानगर पालिका हेतु कराए गए चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के 25, कांग्रेस के 15, युवा स्वाभिमान पार्टी के 15, एआईएमआईएम के 12, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजीत पवार) के 11, शिवसेना (शिंदे गुट) के 3, बसपा के 3, शिवसेना (उबाठा) के 2, वंचित बहुजन आघाड़ी के 1 सदस्य निर्वाचित हुए है. जिसके चलते स्पष्ट बहुमत किसी भी पार्टी के पास नहीं है और 87 सदस्यीय सदन में सत्ता स्थापित करने के लिए अब राजनीतिक दलों को चुनाव पश्चात गठबंधन वाले पर्याय का सहारा लेना ही पडेगा. ऐसे में अब सभी राजनीतिक दलों द्वारा अपने समविचारी दलों के सदस्यों को अपने पाले में करने का प्रयास किया जा रहा है. ताकि बहुमत के लिए आवश्यक सदस्य संख्या जुटाने के साथ-साथ कुछ अतिरिक्त सदस्यों को भी साथ लिया जा सके, ताकि सत्ता में स्थिरता हो. जिसके चलते जिन पार्टियों के इक्का-दुक्का सदस्य निर्वाचित हुए है, इस समय उन पार्टियों व उनके सदस्यों को अच्छी-खासी ‘तवज्जो’ मिल रही है.
अमरावती महानगर पालिका में सत्ता समीकरण हेतु भाजपा की ओर से जिन पर्यायों पर विचार किया जा रहा है, उनमें सबसे पहला पर्याय यह है कि, भाजपा द्वारा महायुति का घटक दल रहनेवाले युवा स्वाभिमान पार्टी, राकांपा (अजीत पवार) व शिंदे सेना के सदस्यों को साथ लेकर गठबंधन बनाया जाए. यदि ऐसा होता है, तो भाजपा के 25, युवा स्वाभिमान पार्टी के 15, राकांपा अजीत पवार के 11 व शिंदे सेना के 3 को मिलाकर महायुति के 54 सदस्य हो सकते है और इतनी सदस्य संख्या के दम पर मनपा में बडी आसानी के साथ महायुति की सत्ता भी स्थापित हो सकती है. परंतु सबसे बडी दिक्कत यह है कि, अजीत पवार गुट वाली राकांपा का अमरावती शहर में नेतृत्व कर रहे विधायक संजय खोडके किसी भी ऐसे गठबंधन में शामिल होने की संभावना से पहले ही इंकार कर चुके है, जिस गठबंधन में विधायक रवि राणा और उनकी युवा स्वाभिमान पार्टी शामिल है. ऐसे में राकांपा के 11 सदस्यों को छोडकर भी भाजपा, वायएसपी व शिंदे सेना वाली युति में 44 सदस्य का आंकडा बनता है, जो अपने-आप में स्पष्ट बहुमत के लिहाज से जादुई आंकडा ही है. परंतु यह मामला एकदम ‘कांटे पे कांटा’ वाला हो जाएगा. जिसके चलते भाजपा द्वारा बसपा के 3, शिवसेना उबाठा के 2 व वंचित बहुजन आघाडी के 1 सदस्य को अपने पाले में करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि कम से कम 48 से 50 सदस्यों का समर्थन हासिल रहे और एक स्थिर सत्ता स्थापित की जा सके. वहीं यदि भाजपा द्वारा वायएसपी को छोडकर राकांपा, शिंदे सेना, बसपा, शिवसेना उबाठा व वंचित बहुजन आघाडी के साथ मिलकर आगे बढने के बारे में सोचती है. तो भी भाजपा के पास केवल 45 सदस्यों का समर्थन रहेगा. जिसके बलबूते पूरे पांच साल मनपा की सत्ता संभालना कुछ हद तक मुश्किल वाला काम हो सकता है. ऐसे में भाजपा द्वारा पहले दो पर्यायों पर ही विचार किया जा रहा है.
उधर दूसरी ओर इस बार के मनपा चुनाव में महज 11 सीटे जीतने में सफल रही कांग्रेस पार्टी भी अलग-अलग दलों का समर्थन प्राप्त करते हुए सत्ता के समीकरण को साधने का प्रयास कर रही है, ताकि भाजपा और युवा स्वाभिमान पार्टी को मनपा की सत्ता से दूर रखा जा सके. ऐसे में कांग्रेस द्वारा सबसे पहले तो विधायक खोडके के नेतृत्ववाली राकांपा के सदस्यों पर अपना पूरा फोकस रखा गया है. क्योंकि विधायक खोडके ने विधायक राणा के साथ होनेवाले किसी भी गठबंधन में शामिल होने से इंकार कर दिया है तथा भाजपा व विधायक राणा का गठबंधन होना लगभग तय है. उस सूरत में विधायक खोडके को सत्ता से बाहर रहना पड सकता है. जिसके चलते कांग्रेस द्वारा विधायक खोडके को अपने पाले में करते हुए एमआईएम, बसपा, शिवसेना उबाठा एवं वंचित बहुजन आघाडी के साथ मिलकर बहुमत का आंकडा हासिल करने का प्रयास किया जा सकता है. यदि यह फॉर्म्यूला काम करता है, तो कांग्रेस के 15, राकांपा के 11, एमआईएम के 12, बसपा के 3, शिवसेना उबाठा के 2 एवं वंचित बहुजन आघाडी के 1 सदस्यों को मिलाकर 44 के आंकडे तक यह गठबंधन पहुंच सकता है और सत्ता स्थापित करने के लिए काफी हद तक अनुकूल स्थिति बन सकती है. परंतु सबसे बडी दिक्कत यह है कि, अजीत पवार गुट वाली राकांपा इस समय राज्य की महायुति सरकार में शामिल है. जिसके चलते संभवत: राकांपा के वरिष्ठ नेताओं द्वारा कांग्रेस के साथ गठबंधन को स्वीकार नहीं किया जाएगा. जिसके चलते सत्ता समीकरण का सवाल अब भी काफी पेचिदा बना हुआ है और इसे लेकर चल रही तमाम उठापटक पर सभी की निगाहें लगी हुई है.
* पालकमंत्री बावनकुले ने राकांपा नेता प्रफुल पटेल से बात की
इसी बीच अब यह जानकारी भी सामने आई है कि, अमरावती महानगर पालिका में सत्ता समीकरण को साधने हेतु भाजपा नेता व राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने अजीत पवार गुट वाली राकांपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल पटेल के साथ विस्तृत बातचीत की. जिसका ब्यौरा फिलहाल सामने नहीं आया है. ऐसे में इस बातचीत के जरिए कौनसा नतीजा निकलकर सामने आता है, इस ओर सभी की निगाहें लगी हुई है.
* कांग्रेस ‘वेट एंड वॉच’ की भूमिका में
87 सदस्यीय अमरावती महानगर पालिका में महज 15 सीटों पर जीत दर्ज करने में सफल रही कांग्रेस पार्टी ने इस समय ‘वेट एंड वॉच’ की भूमिका को अपना रखा है तथा कांग्रेस द्वारा इस समय इस बात पर पूरी नजर रखी जा रही है कि, भाजपा की ओर से सत्ता के समीकरण को साधने हेतु कौनसे कदम उठाए जा रहे है और यदि भाजपा किसी भी सूरत में बहुमत के लिए जादुई आंकडा जुटाने में नाकाम रहती है, तो उस स्थिति में कांग्रेस के लिए सत्ता समीकरण के लिहाज से कौनसी संभावनाएं बन सकती है.

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