अमरावती में मजदूर-किसानों का जेल भरो आंदोलन

जिलाधिकारी कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन

* लेबर कोड रद्द करने से लेकर न्यूनतम मजदूरी
* पुरानी पेंशन और किसानों को गारंटीड दाम देने की मांग
अमरावती/दि.10 – मजदूरों और किसानों की विभिन्न मांगों को लेकर यूनाइटेड वर्कर्स यूनियन कृति समिति तथा यूनाइटेड किसान मोर्चा की ओर से सोमवार 10 अगस्त को देशव्यापी आह्वान के तहत अमरावती में जेल भरो आंदोलन किया गया. आंदोलन में मजदूर, किसान, खेतिहर मजदूर, स्कीम कर्मचारी, युवा, विद्यार्थी और महिलाओं ने हिस्सा लेकर अपनी विभिन्न मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया तथा गिरफ्तारी दी.
आंदोलनकर्ताओें के मुताबिक देश के केंद्रीय एवं राज्य स्तरीय मजदूर संगठनों, संयुक्त कामगार संघ मंच और संयुक्त किसान मोर्चा की दूसरी संयुक्त कॉन्फ्रेंस 29 जुलाई को दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में हुई थी. इस सम्मेलन में मजदूरों और किसानों की विभिन्न मांगों को लेकर 10 अगस्त को देशभर में जेल भरो आंदोलन करने का आह्वान किया गया था. अमरावती जिले में आयोजित आंदोलन को इसी राष्ट्रव्यापी आंदोलन का हिस्सा बताया गया. आंदोलनकर्ताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि मजदूरों, किसानों, खेतिहर मजदूरों, कर्मचारियों, बेरोजगार युवाओं, विद्यार्थियों और महिलाओं की समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है. उन्होंने रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा, कृषि उपज के उचित दाम और महंगाई जैसे मुद्दों पर सरकार से तत्काल कदम उठाने की मांग की.
आंदोलन में संगठना के सुभाष पांडे, अंकुश वाघ, ओमप्रकाश वाघमारे, रमेश सोनुले, चंदा वानखडे, रेखा वानखडे, रेहाना खान, नीलू मेश्राम, सुनीता भोवते, उज्वला लाड, मीना कापसे, वहीदा कलाम, क्षमा परवीन, लता मावदे, अरुणा मालवीय, मुकूंद काले, संगीता चौधरी, सारिका घोरपडे, संगीता दाभने, महादेव गारपवार, श्याम शिंदे, देविदास राउत, दिलीप शापमोहन, सुभाष खांडेकर, पद्मा गजभिये, आशा वैद्य, किशोर शिंदे, अब्दूल मोहसीन, विशाल शिंदे, वंदना बुरांडे, ज्योति नालट, वैशाली नेवारे, नलु बोरकर, ममता काले, संगीता वानखडे, प्रीति पानसे, संगीता अवकाले, फरहीन खान, वैशाली उके, बोरकर ताई, किरण रंगारी, पूजा तायडे, वर्षा कापसे, मीना गवई, सनोबर, अश्वीनी लोखंडे, दुर्गा वासनिक, नीताली पाटिल, श्वेता सावरकर, अर्चना जनबंधु, अनिता जगताप, करुले ताई, रंजना उपरीकर समेत अनेक लोगों का समावेश था.
* क्या हैं प्रमुख मांगें?
आंदोलनकर्ताओं ने चारों लेबर कोड रद्द करने तथा सभी मजदूरों के लिए आठ घंटे के काम के बदले 30 हजार रुपये न्यूनतम मजदूरी लागू करने की मांग की. आंगनवाड़ी, आशा, स्कूल पोषण तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के कर्मचारियों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देकर पेंशन, भविष्य निधि और ईएसआईसी जैसी सामाजिक सुरक्षा देने की मांग भी की गई. सरकारी एवं निजी उद्योगों में कार्यरत ठेका मजदूरों और अप्रेंटिस कर्मचारियों को नियमित करने, केंद्र एवं राज्य सरकारों तथा सार्वजनिक उपक्रमों में रिक्त पद तत्काल भरने और बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने की मांग आंदोलनकारियों ने की. रोजगार मिलने तक बेरोजगारी भत्ता देने की भी मांग रखी गई. किसानों के लिए सभी कृषि उपज का न्यूनतम गारंटीड मूल्य सी2+50 प्रतिशत लाभ के आधार पर तय करने, अमेरिका के साथ प्रस्तावित किसान विरोधी व्यापार समझौते को रद्द करने तथा किसानों से संबंधित वीबी ग्राम एक्ट को रद्द करने की मांग की गई. इसके अलावा गैस, पेट्रोल और आवश्यक वस्तुओं के दाम कम करने, बिजली क्षेत्र के निजीकरण से संबंधित बिजली संशोधन विधेयक रद्द करने तथा स्मार्ट और प्रीपेड मीटर योजना बंद करने की मांग की गई.
* ओपीएस, शिक्षा और आदिवासी मुद्दे भी उठाए
आंदोलनकारियों ने नई पेंशन योजना रद्द कर पुरानी पेंशन योजना लागू करने, खाद्य सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सरकार की नीति में बदलाव, एनटीए से संबंधित परीक्षाओं को रद्द करने तथा आदिवासी क्षेत्रों में पेसा मोबिलाइजर पदों को रद्द करने का निर्णय वापस लेने की मांग की. इसके साथ ही कॉरपोरेट और बड़े पूंजीपतियों पर अतिरिक्त कर लगाने, जीएसटी कम करने तथा मंदिरों और गिफ्ट की जमीनों से संबंधित किसानों के अधिकार सुनिश्चित करने की मांग भी रखी गई. बिना खेती की जमीन पर किए गए कब्जों को नियमित कर संबंधित लोगों को मालिकाना हक देने की मांग आंदोलनकारियों ने की. आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि मजदूरों, किसानों और अन्य मेहनतकश वर्गों की मांगों पर तत्काल निर्णय नहीं लिया गया, तो आने वाले समय में देशभर में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा.

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