300 करोड का कचरा घोटाला पहुंचा विधान भवन में
सफाई ठेकेदार पर मनपा के 2 करोड लूटने का लगा आरोप

* विधान परिषद सदस्य धिरज लिंगाडे का ध्यानाकर्षण प्रस्ताव स्वीकार
अमरावती/दि.1- अमरावती महानगरपालिका में प्रशासक राज के दौरान घर-घर जाकर कचरा संगठीत करने हेतू दिए गए ठेके में हुआ 300 करोड रूपयों का महाघोटाला अब विधान मंडल में पहुंच गया है. निविदा के नियमों व शर्तो की अनदेखी करते हुए ठेकेदार को करीब 2 करोड रूपयों का अतिरिक्त फायदा दिए जाने के मामले में विधान परिषद सदस्य धिरज लिंगाडे व्दारा प्रस्तुत ध्यानाकर्षण प्रस्ताव को राज्य सरकार ने स्वीकार किया है. जिसके चलते अब अमरावती मनपा के तत्कालिन संबंधित अधिकारियों पर फौजदारी कार्रवाई की तलवार लटक रही है.
जानकारी के मुताबिक विधायक धिरज लिंगाडे व्दारा ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पेश किए जाने के बाद अब नगरविकास मंत्रालय 300 करोड रूपये के घोटाले की उच्च स्तरीय जांच पडताल करते हुए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई करता है इस ओर सभी की निगाहे लगी हुई है.
क्या है 300 करोड का कचरा घोटाला?
नवंबर 2025 में जब अमरावती महानगरपालिका में प्रशासक राज लागु था तब शहर में घर-घर जाकर कचरा संकलित करने ओर संकलित हुए कचरे को कंपोस्ट डेपो तक पहुंचाने के लिए कोणार्क इन्फ्रास्टक्चर प्रा. लि. नामक कंपनी के साथ 300 करोड रूपयों का करार किया गया था. परंतु इस संपूर्ण निविदा प्रक्रिया और करारनामे में शुरू से अनियमितता होने की बात सामने आयी है.
* काम शुरू होते ही 10 माह पहले 5 फीसद की दर वृध्दि, 2 करोड का बोझ
सफाई ठेकेदार व्दारा जनवरी व मार्च 2026 में प्रत्यक्ष काम की शुरूवात की गई. परंतु काम शुरू किए हुए अभी 2-3 माह भी नहीं हुए थे कि, 1 अप्रैल 2026 को नियमबाह्य कृत्य करते हुए करीब 10 माह पहले ही ठेकेदार को 5 फीसद की दर वृध्दि मंजुर की गई. इस मेहरबानी के चलते महानगरपालिका की तिजोरी पर 2 करोड रूपयों का अतिरिक्त बोझ भी पडा.
* स्वच्छता देखरेख समिति की बैठक में फुटा भांडा
मनपा में नया सभागृह अस्तित्व में आने के बाद 6 अप्रैल व 13 अप्रैल 2026 को स्वच्छता देखरेख समिति की विशेष बैठकों का आयोजन किया गया था. इन बैठकों में ठेकेदार के धक्कादायक कारनामे उजागर हुए थे. ठेके की शर्तो के अनुसार ठेकेदार व्दारा अप्रैल 2025 के बाद उत्पादित नए वाहनों का प्रयोग करना बंधनकारक था. परंतु करारनामे में छेडछाड करते हुए अप्रैल 2023 में उत्पादित पुराने वाहनों का प्रयोग करने की अनुमती नियमबाह्य तरिके से दी गई. इसके साथ ही ठेकेदार ने अपने नाम पर रहनेवाले वाहनों का प्रयोग करने के वजह दूसरे किसी व्यक्ति के नाम पर रहनेवाले वाहनों का प्रयोग करते हुए कचरा संकलन करने का काम किया, ऐसा भी स्वच्छता समिति की बैठकों में स्पष्ट हुआ.