अभिजीत ढेपे, बबलू देशमुख, सुधाकर भारसाकले, नरेशचंद्र ठाकरे नहीं लड सकेंगे चुनाव
जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक में वारिसों को मौका!

* नए नियमों की आंच, सितंबर में हो सकते हैं इलेक्शन
अमरावती/दि.30 – नए सहकारिता नियमों के कारण गत 10 वर्षों से जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के संचालक रहे प्रमुख नेताओं पर इस बार इलेक्शन से दूर रहने की नौबत आनेवाली है. ऐसे में चर्चा है कि, यह सभी प्रमुख नेता अपने वारिसों को अवसर दे सकती है. उन्हें मैदान में उतारने की तैयारी चलने की जानकारी देते हुए बताया गया कि, बैंक चुनाव में परिवार वाद की परंपरा शुरु हो सकती है.
जिन प्रमुख लीडर्स में चुनाव से दूर रहने की नौबत आने का अंदेशा है, उनमें पूर्व अध्यक्ष बबलू उर्फ अनिरुद्ध देशमुख, उपाध्यक्ष अभिजीत ढेपे, सुधाकर भारसाकले, नरेशचंद्र ठाकरे, प्रकाश कालबांडे, दयाराम काले, जयप्रकाश पटेल, सुरेश साबले, बालासाहेब अलोणे का समावेश है. साथ ही नए कानूनों को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही है. प्रमुख चर्चा यह सुनने मिल रही है कि, सहकारी बैंकों पर कांग्रेस और राष्ट्रवादी के वर्चस्व को कम करने के लिए ही ऐसे नियम-कानूनों का उपयोग किया जा रहा है. अनेक वर्षों से संचालक पद पर रहे लीडर्स ने इसीलिए अपने उत्तराधिकारी तैयार किए है. फलस्वरुप संचालकों के पुत्र, पुत्री अथवा भाई या पत्नी आगामी सितंबर में संभावित इलेक्शन में मैदान में आ सकते हैं.
उल्लेखनीय है कि, जिला बैंक चुनाव की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है. 1100 नए सभासदों के वोटिंग पॉवर को लेकर पक्ष-विपक्ष में कानूनी लडाई चल रही है. इस बारे में हाईकोर्ट का निर्णय आज-कल में आने की संभावना है. इस बीच बताया गया कि, वर्तमान संचालक मंडल का कार्यकाल आगामी अक्तूबर में पूर्ण होनेवाला है. उससे पहले नए संचालक मंडल का चुनाव कराया जाना है. जिला उपनिबंधक कार्यालय ने इस संदर्भ में प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है. सबसे पहले वोटर लिस्ट फाइनल की जानी है. उससे पहले सहकारिता आयुक्त और निबंधक ने स्पष्ट कर दिया कि, नया अधिनियम विगत 9 मार्च 2026 को लागू किया गया है. जिसे आवश्यक रिझर्व बैंक की अनुमति प्राप्त हो गई है. इस नियम के कारण ही सतत 10 वर्षों तक संचालक रहे लीडर्स इस बार चुनाव नहीं लड सकेंगे, ऐसी संभावना है.





