चिखलदरा में साकार होगी 1,500 मेगावाट की आडनदी परियोजना

अदाणी कंपनी को मिला है योजना का जिम्मा, योजना का काम अभी सर्वेक्षण चरण में

* अंतिम पर्यावरण मंजूरी और मुख्य निर्माण शुरू करने हेतु अभी अनुमति मिलना बाकी
* 8,250 करोड़ के प्रस्तावित निवेश वाली परियोजना को पर्यावरणीय अध्ययन के लिए टीओआर मंजूर
चिखलदरा /दि.29 – जिले की चिखलदरा तहसील में प्रस्तावित 1,500 मेगावाट की आडनदी पंप्ड स्टोरेज परियोजना साकार होने जा रही है. 8,250 करोड़ के प्रस्तावित निवेश वाली परियोजना को पर्यावरणीय अध्ययन के लिए टीओआर मंजूर हो चुके है. हालांकि योजना का काम अभी सर्वेक्षण चरण में है तथा इस परियोजना के लिए अंतिम पर्यावरण मंजूरी और मुख्य निर्माण की अभी पुष्टि नहीं हुई है.
यहां यह विशेष उल्लेखनीय है कि, इस परियोजना को लेकर एक ओर बड़े निवेश और रोजगार की संभावनाएं सामने रखी गई हैं, वहीं उपलब्ध ताजा सरकारी रिकॉर्ड बताते हैं कि परियोजना अभी निर्माण के चरण में नहीं पहुंची है. जुलाई 2026 में केंद्र सरकार द्वारा संसद में दी गई जानकारी के अनुसार देश में निर्माणाधीन 11 पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं की सूची में आडनदी का नाम नहीं है. परियोजना संबंधी उपलब्ध सूची में इसे फिलहाल सर्वेक्षण एवं जांच के चरण में दर्ज किया गया है.
ज्ञात रहे कि, आडनदी क्लोज्ड-लूप पंप्ड स्टोरेज परियोजना का प्रस्तावित विकास अदानी हाइड्रो एनर्जी टेन लिमिटेड द्वारा किया जाना है. परियोजना की क्षमता 1,500 मेगावाट तथा प्रस्तावित क्षेत्र लगभग 240.61 हेक्टेयर बताया गया है. पर्यावरणीय मूल्यांकन समिति के 31 अक्टूबर 2025 के निर्णय में चिखलदरा तहसील अंतर्गत आडनदी, भांडरी, जांभली आदि गांवों में परियोजना के लिए पर्यावरणीय अध्ययन संबंधी टर्म्स ऑफ रेफरेंस (टीओआर) मंजूर किए गए थे.
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, महाराष्ट्र सरकार के जल संसाधन विभाग और कंपनी के बीच 15 जुलाई 2025 को परियोजना को लेकर समझौता हुआ था. उस समय करीब 8,250 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश तथा लगभग 4,800 रोजगार अवसर पैदा होने का अनुमान सामने आया था. इन आंकड़ों को परियोजना के घोषित अनुमान के रूप में देखना होगा; इन्हें अब तक हुए वास्तविक निवेश या सृजित रोजगार का आंकड़ा नहीं माना जा सकता. ज्ञात रहे कि, परियोजना के लिए टीओआर मंजूर होना महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, लेकिन इसे अंतिम पर्यावरणीय मंजूरी नहीं माना जाता. टीओआर के माध्यम से परियोजना के पर्यावरणीय अध्ययन और प्रभाव आकलन में किन पहलुओं की जांच की जानी है, उसका दायरा निर्धारित होता है. उपलब्ध रिकॉर्ड में अक्तूबर 2025 में टीओआर मंजूर होने की जानकारी है, लेकिन सितंबर 2026 तक उपलब्ध सामग्री में अदनदी परियोजना को अंतिम पर्यावरणीय मंजूरी मिलने की पुष्ट जानकारी सामने नहीं आती. ऐसे में फिलहाल परियोजना को ‘पर्यावरण मंजूर’ बताने के बजाय ‘पर्यावरणीय अध्ययन के लिए टीओआर मंजूर’ कहना अधिक सटीक होगा.
* केंद्र की निर्माणाधीन परियोजनाओं में आडनदी नहीं
20 जुलाई 2026 को केंद्रीय विद्युत मंत्रालय ने राज्यसभा में देश की पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं की स्थिति बताई. इसके अनुसार 15,870 मेगावाट क्षमता वाली 11 परियोजनाएं निर्माणाधीन थीं. महाराष्ट्र में भावली 1,500 मेगावाट, भिवपुरी 1,000 मेगावाट, तराली 1,500 मेगावाट और सैदोंगर-1 करजत 3,000 मेगावाट सहित परियोजनाओं को निर्माणाधीन सूची में रखा गया था. आडनदी इस सूची में शामिल नहीं थी. इसी जानकारी में केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण द्वारा सहमति अथवा मूल्यांकन पूरी कर निर्माण के लिए लंबित छह परियोजनाओं की अलग सूची भी जारी की गई थी. इसमें महाराष्ट्र की पेन और शिरावटा परियोजनाएं शामिल थीं, लेकिन आडनदी का नाम वहां भी नहीं था.
* ‘पानी की बैटरी’ की तरह काम करेगी परियोजना
पंप्ड स्टोरेज परियोजना को सरल भाषा में बिजली की ‘पानी वाली बैटरी’ कहा जा सकता है. जब बिजली की मांग कम होती है और उपलब्धता अधिक होती है, तब बिजली का इस्तेमाल कर पानी को निचले जलाशय से ऊपरी जलाशय में पहुंचाया जाता है. मांग बढ़ने पर ऊपरी जलाशय से पानी नीचे छोड़ा जाता है और टरबाइन के माध्यम से बिजली पैदा की जाती है. क्लोज्ड-लूप परियोजना में मुख्य रूप से निर्धारित जलाशयों के बीच पानी का पुनर्चक्रण किया जाता है. इसका उद्देश्य बिजली उत्पादन के साथ-साथ बिजली व्यवस्था में भंडारण और मांग के चरम समय में आपूर्ति को संतुलित करना है.
* चिखलदरा क्षेत्र में पर्यावरण और जमीन का सवाल महत्वपूर्ण
परियोजना का प्रस्तावित क्षेत्र चिखलदरा तहसील में होने के कारण आगे की पर्यावरणीय प्रक्रिया में जमीन, वन क्षेत्र, वन्यजीव, जलस्रोत और स्थानीय आबादी से जुड़े पहलू महत्वपूर्ण होंगे. फिलहाल उपलब्ध दस्तावेजों से गांववार निजी, सरकारी और वन भूमि का अंतिम विभाजन स्पष्ट नहीं होता. इसलिए अभी यह दावा करना उचित नहीं होगा कि परियोजना के लिए कितनी वन भूमि काटी जाएगी या कितने परिवार विस्थापित होंगे. परियोजना की आगे की प्रक्रिया में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट, पर्यावरणीय प्रभाव आकलन, भूमि विवरण, वन एवं वन्यजीव संबंधी अनुमतियां और अन्य वैधानिक मंजूरियां सामने आने के बाद इन सवालों का अधिक स्पष्ट उत्तर मिल सकेगा.
* पुराने 400 मेगावाट प्रस्ताव से अलग है नई परियोजना
चिखलदरा में पंप्ड स्टोरेज परियोजना की अवधारणा पुरानी है. पुराने दस्तावेजों में करीब 400 मेगावाट की चिखलदरा पंप्ड स्टोरेज योजना का उल्लेख मिलता है. लेकिन वर्तमान आडनदी परियोजना की प्रस्तावित क्षमता 1,500 मेगावाट है और इसके लिए अलग परियोजना संरचना तथा विकास प्रक्रिया सामने आई है. इसलिए पुराने 400 मेगावाट प्रस्ताव के भूमि, लागत, जलाशय अथवा पर्यावरण संबंधी आंकड़ों को वर्तमान 1,500 मेगावाट अदनदी परियोजना का आंकड़ा मानना उचित नहीं होगा. इससे स्पष्ट है कि आडनदी परियोजना फिलहाल घोषणा से निर्माण तक पहुंचने की प्रक्रिया में है. आने वाले चरण में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट, पर्यावरणीय अध्ययन और अन्य वैधानिक मंजूरियां यह तय करेंगी कि परियोजना जमीन पर किस रूप में आगे बढ़ती है.

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