महाविकास आघाड़ी की बैठक से 23 विधायक गैरहाजिर

विपक्ष की एकजुटता पर उठे सवाल

मुंबई /दि.25- महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र के बीच महाविकास आघाड़ी (एमवीए) की महत्वपूर्ण रणनीतिक बैठक में 23 विधायकों की अनुपस्थिति ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है. कांग्रेस, शिवसेना उबाठा और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के कई वरिष्ठ नेताओं के बैठक में नहीं पहुंचने से विपक्षी गठबंधन की एकजुटता और समन्वय को लेकर सवाल उठने लगे हैं.
सूत्रों के अनुसार, बैठक से गैरहाजिर रहने वालों में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले, वरिष्ठ नेता विजय वडेट्टीवार, एनसीपी (शरद पवार गुट) के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल और कई अन्य प्रमुख विधायक शामिल थे. बताया जा रहा है कि इस स्थिति पर शिवसेना (उद्धव गुट) प्रमुख णववहर्रीं ढहरलज्ञशीरू ने भी नाराजगी जताई और गठबंधन की एकजुटता को लेकर चिंता व्यक्त की.

* किन दलों के विधायक रहे अनुपस्थित?
कांग्रेस के नाना पटोले, विजय वडेट्टीवार, अमित देशमुख, असलम शेख, विश्वजीत कदम, विकास ठाकरे, राकांपा (शरद पवार गुट) के जयंत पाटिल, रोहित पवार, संदीप क्षीरसागर, अभिजीत पाटिल व एक अन्य विधायक, शिवसेना उबाठा के सुनील राऊत, गजानन लवटे, बाबाजी काले, राहुल पाटिल और संजय दरेकर ऐसे 23 में से 16 विधायक बैठक में अनुपस्थित रहे.

* नेताओं ने दी सफाई
बैठक में अनुपस्थित रहने को लेकर नेताओं ने अलग-अलग कारण बताए हैं. जयंत पाटिल ने कहा कि बैठक की तारीख बदलने के कारण वे पहले से तय पारिवारिक कार्यक्रम और विवाह समारोह में शामिल होने गए थे. नाना पटोले ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया. विजय वडेट्टीवार ने स्वास्थ्य संबंधी कारणों से बैठक में नहीं पहुंच पाने की जानकारी दी. सुनील राऊत ने कहा कि उनके क्षेत्र में भारी बारिश के चलते सुरक्षा दीवार गिर गई थी और उन्हें राहत कार्यों में जुटना पड़ा.

* अनुपस्थिति का मतलब गद्दारी नहीं
सुनील राऊत ने स्पष्ट कहा कि बैठक में शामिल न हो पाने का अर्थ यह नहीं है कि वे पार्टी या महाविकास अघाड़ी के साथ विश्वासघात करेंगे. वहीं कांग्रेस विधायक विकास ठाकरे ने दावा किया कि उन्होंने पहले ही अपनी अनुपस्थिति की सूचना पार्टी नेतृत्व को दे दी थी और सभी विधायक गठबंधन के साथ मजबूती से खड़े हैं.

* बढ़ रही है समन्वय की चुनौती?
मानसून सत्र जैसे महत्वपूर्ण राजनीतिक मौके पर आयोजित बैठक में 23 विधायकों का एक साथ गैरहाजिर रहना विपक्षी गठबंधन के भीतर समन्वय की स्थिति को लेकर सवाल खड़े कर रहा है. इस बीच, रोहित पवार किसानों के मुद्दों पर अलग से सक्रिय दिखाई दे रहे हैं, जिससे विपक्षी दलों के बीच रणनीतिक तालमेल की कमी की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं.

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