कीटनाशक के जहर से 6 माह में 28 किसानों की मौत, 102 हुए शिकार
नागपुर मेडिकल कॉलेज के आंकड़ों से सामने आई चिंताजनक स्थिति, विशेषज्ञों ने विशेष सावधानी बरतने को कहा

नागपुर/दि.15- फसलों को रोग और कीटों से बचाने के लिए उपयोग किए जाने वाले कीटनाशक अब किसानों और खेत मजदूरों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं. नागपुर के शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (मेडिकल) के आंकड़ों ने एक चिंताजनक तस्वीर सामने रखी है. इस वर्ष 1 जनवरी से 30 जून के बीच केवल छह महीनों में कीटनाशक विषाक्तता के 102 मामले दर्ज हुए, जिनमें 28 किसानों और खेत मजदूरों की मौत हो गई. विशेष बात यह है कि यह आंकड़ा केवल नागपुर मेडिकल अस्पताल का है. अन्य सरकारी और निजी अस्पतालों के आंकड़े इसमें शामिल नहीं हैं. ऐसे में वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक होने की आशंका व्यक्त की जा रही है.
* बारिश के मौसम में बढ़ता है खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार खरीफ सीजन और बारिश के दौरान कीटनाशकों का उपयोग बढ़ जाता है. लेकिन सुरक्षा नियमों की अनदेखी, अत्यधिक मात्रा में दवा का प्रयोग, सुरक्षात्मक उपकरणों का अभाव और लापरवाही के कारण विषाक्तता की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं. मेडिकल कॉलेज में भर्ती अधिकांश मरीजों की हालत गंभीर पाई गई. कई मरीजों को गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में भर्ती करना पड़ा, जबकि बड़ी संख्या में मरीजों को वेंटिलेटर की सहायता लेनी पड़ी.
* नशे की आदत बन रही मौत का कारण
मेडिकल कॉलेज के औषधि चिकित्सा विभाग के प्रमुख डॉ. अतुल राजकोंडावार ने बताया कि उपचार के दौरान कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं. उन्होंने कहा कि कई किसान कीटनाशक छिड़काव से पहले या दौरान शराब का सेवन करते हैं, जिससे उनका ध्यान और सतर्कता कम हो जाती है. इसके अलावा तंबाकू, खर्रा या गुटखा खाने से पहले हाथ नहीं धोने के कारण हाथों पर लगे कीटनाशक सीधे शरीर में प्रवेश कर जाते हैं. कुछ मामलों में किसान कीटनाशक घोलने के लिए पानी पीने वाले गिलास का उपयोग करते हैं और बाद में उसी गिलास से पानी पी लेते हैं, जिससे गंभीर विषाक्तता हो जाती है.
* 40 प्रतिशत मरीजों को वेंटिलेटर की जरूरत
डॉ. राजकोंडावार के अनुसार कीटनाशक विषाक्तता एक गंभीर चिकित्सकीय आपात स्थिति है. ऐसे 30 से 40 प्रतिशत मरीजों को कृत्रिम श्वसन यंत्र (वेंटिलेटर) की आवश्यकता पड़ती है. ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को समय पर आधुनिक चिकित्सा सुविधा मिलना उनके जीवन को बचाने के लिए बेहद जरूरी है.
* विषाक्तता के प्रमुख लक्षण
मतली और उल्टी, चक्कर आना, तेज सिरदर्द, अत्यधिक पसीना आना, सांस लेने में परेशानी, आंखों में जलन या धुंधला दिखाई देना, हाथ-पैर कांपना, बेहोशी, मुंह से झाग निकलना. विशेषज्ञों का कहना है कि इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई देने पर तुरंत अस्पताल में भर्ती होना चाहिए.
* छिड़काव करते समय बरतें ये सावधानियां
मास्क, दस्ताने, चश्मा और गमबूट का उपयोग करें. पूरी बांह के कपड़े पहनें. हवा की दिशा के विपरीत छिड़काव न करें. खाली पेट या शराब पीकर दवा का छिड़काव न करें. दवा मिलाते समय हाथ का उपयोग न करें. छिड़काव के बाद साबुन से हाथ-पैर और शरीर अच्छी तरह धोएं या स्नान करें. खाली कीटनाशक बोतलों और डिब्बों का दोबारा घरेलू उपयोग न करें.
* विशेषज्ञों की अपील
डॉ. अतुल राजकोंडावार ने किसानों से अपील की है कि कीटनाशकों का उपयोग करते समय सभी सुरक्षा मानकों का पालन करें. उन्होंने कहा कि थोड़ी सी सावधानी कई जिंदगियां बचा सकती है. खेतों में काम करने वाले किसानों और मजदूरों को सुरक्षा उपकरणों का उपयोग अनिवार्य रूप से करना चाहिए तथा विषाक्तता के लक्षण दिखाई देते ही तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए. कीटनाशक विषाक्तता से लगातार बढ़ती मौतों ने कृषि क्षेत्र में सुरक्षा उपायों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जागरूकता और सुरक्षा उपायों पर जोर नहीं दिया गया तो आने वाले समय में यह समस्या और भी गंभीर रूप ले सकती है.





